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अब टारगेट बॉल के लिए जानी जाएगी कान्हा की नगरी
अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 25 Jul 2016 11:31 PM IST
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टारगेट बॉल
- फोटो : अमर उजाला
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कुश्ती के लिए विख्यात कान्हा की नगरी अब टारगेट बॉल जैसे आधुनिक खेल के लिए भी जानी जाएगी। मथुरा से शुरू हुए खेल को स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) से मान्यता मिलने के बाद इसे नया मुकाम मिल गया है। इसकी लोकप्रियता का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि 2012 से अब तक टारगेट बॉल ने नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका और दुबई में अपनी पहचान बना ली है।
टारगेट बॉल खेल को विकसित करने वाले मथुरा के विश्वलक्ष्मी नगर निवासी सोनू शर्मा ने आठ अक्तूबर 2012 को पहली बार श्रीजी बाबा विद्यालय में खेल का परिचय लोगों को दिया था। अक्तूबर 2013 में हाथरस में टारगेट बॉल की पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित हुई। इसमें देश के नौ राज्यों की टीम ने प्रतिभाग किया।
सोनू शर्मा बताते हैं कि 2013 से 2016 तक देश में टारगेट बॉल के सात राष्ट्रीय आयोजन हो चुके हैं। नेपाल, भूटान और बांगलादेश में अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट भी आयोजित किए गए। तीनों में ही भारतीय टीम विजयी रही। फिलहाल यह खेल भारत के 22 राज्यों के साथ विश्व के पांच देशों में खेला जा रहा है।
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टारगेट बॉल फेडरेशन के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश फेडरेशन के सचिव सोनू कहते हैं कि इस गेम लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। यही कारण है कि चार साल में ही इसे एसजीएफआई से मान्यता मिल गई और खेल भारत के स्कूली गेम्स कैलेंडर में शामिल हो गया। अक्तूबर 2016 में तेलंगाना में एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी।
बास्केटबाल जैसा खेल
सोनू बताते हैं कि बास्केटबाल से मिलता जुलता टारगेट बॉल गेम ग्रास कोर्ट पर खेला जाता है। 14 खिलाड़ियों की एक टीम के छह खिलाड़ी खेल में प्रतिभाग करते हैं जबकि आठ एक्स्ट्रा के तौर पर रहते हैं। 20-20 मिनट के दो हाफ के साथ खेले जाने वाले इस खेल में बॉल एक टारगेट रिंग से पास करानी होती है।
नई सोच और टारगेट बॉल
लक्ष्मीबाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजूकेशन, ग्वालियर से स्नातक और परास्नातक कर चुके सोनू की कुछ नया करने की सोच ने दुनिया को टारगेट बॉल जैसा गेम दिया। एमफिल के बाद नेट उत्तीर्ण कर चुके सोनू फिलहाल मथुरा के केडी डेंटल कालेज में बतौर स्पोर्ट्स आफिसर कार्य कर रहे हैं।
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टारगेट बॉल खेल को विकसित करने वाले मथुरा के विश्वलक्ष्मी नगर निवासी सोनू शर्मा ने आठ अक्तूबर 2012 को पहली बार श्रीजी बाबा विद्यालय में खेल का परिचय लोगों को दिया था। अक्तूबर 2013 में हाथरस में टारगेट बॉल की पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित हुई। इसमें देश के नौ राज्यों की टीम ने प्रतिभाग किया।
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सोनू शर्मा बताते हैं कि 2013 से 2016 तक देश में टारगेट बॉल के सात राष्ट्रीय आयोजन हो चुके हैं। नेपाल, भूटान और बांगलादेश में अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट भी आयोजित किए गए। तीनों में ही भारतीय टीम विजयी रही। फिलहाल यह खेल भारत के 22 राज्यों के साथ विश्व के पांच देशों में खेला जा रहा है।
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टारगेट बॉल फेडरेशन के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश फेडरेशन के सचिव सोनू कहते हैं कि इस गेम लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। यही कारण है कि चार साल में ही इसे एसजीएफआई से मान्यता मिल गई और खेल भारत के स्कूली गेम्स कैलेंडर में शामिल हो गया। अक्तूबर 2016 में तेलंगाना में एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी।
बास्केटबाल जैसा खेल
सोनू बताते हैं कि बास्केटबाल से मिलता जुलता टारगेट बॉल गेम ग्रास कोर्ट पर खेला जाता है। 14 खिलाड़ियों की एक टीम के छह खिलाड़ी खेल में प्रतिभाग करते हैं जबकि आठ एक्स्ट्रा के तौर पर रहते हैं। 20-20 मिनट के दो हाफ के साथ खेले जाने वाले इस खेल में बॉल एक टारगेट रिंग से पास करानी होती है।
नई सोच और टारगेट बॉल
लक्ष्मीबाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजूकेशन, ग्वालियर से स्नातक और परास्नातक कर चुके सोनू की कुछ नया करने की सोच ने दुनिया को टारगेट बॉल जैसा गेम दिया। एमफिल के बाद नेट उत्तीर्ण कर चुके सोनू फिलहाल मथुरा के केडी डेंटल कालेज में बतौर स्पोर्ट्स आफिसर कार्य कर रहे हैं।