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नोटबंदी से निवेश के ढांचे में होगा बड़ा बदलाव

Tue, 27 Dec 2016 08:13 PM IST
अमर उजाला मथुरा
अमर उजाला मथुरा Updated Tue, 27 Dec 2016 08:13 PM IST
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noteban will change the scene of investment
इंडियन इकोनोमिक एसोसिएशन की कार्यशाला - फोटो : अमर उजाला
भारतीय आर्थिक संगठन (इंडियन इकोनोमिक एसोसिएशन) की तीन दिवसीय कार्यशाला में देश के कई राज्यों से जुटे अर्थशास्त्रियों ने नोटबंदी के बाद पैदा हुए हालातों पर मंथन किया। अर्थशास्त्रियों का कहना था कि नोटबंदी से निवेश के ढांचे में बड़ा बदलाव आएगा। देश के समग्र विकास का आर्थिक ढांचा मजबूत होगा। 
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मंगलवार को वेटरनेरी विवि में शुरू हुई कार्यशाला में देश में सकल घरेलू उत्पाद को बढ़ाने, कृषि आय को दो गुना करने और श्रम संसाधन को बढ़ाने से संबंधित बिंदुओं पर चर्चा की गई। योजना आयोग के पूर्व सदस्य पद्म भूषण प्रोफेसर किरीट पारिक  ने कहा कि अंबेडकर के दर्शन के आधार पर रोजगार सृजन और आर्थिक वृद्धि की भूमिका बनानी होगी। विशिष्ट अतिथि हिमाचल विवि के कुलपति डा. एडीएन वाजपेयी ने कहा कि दीनदयाल जी के एकात्मवाद को प्रमुख मानकर रोजगार सृजन को लेकर काम करना होगा।  रोजगार दिलाने और गरीबी मिटाने को लाइन में लगे अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना होगा। 
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कार्यक्रम के अध्यक्ष वेटरनेरी विवि के कुलपति डा. केएमएल पाठक ने कहा कि देश के बुनियादी आर्थिक आधार सुधार में पशुधन, कृषि व श्रम सुधार को प्राथमिकता देनी चाहिए। आगरा विवि के कुलपति प्रो. अरविंद दीक्षित ने विश्वविद्यालयों को कलेंडर के हिसाब से पढ़ाई कराकर परिणाम घोषित कर आर्थिक सुधार के प्रयास के लिए आगे आने को कहा। इस दौरान एसोसिएशन अध्यक्ष पीके चौबे, उपाध्यक्ष रंगा रैड्डी, सचिव इंदू वार्ष्णेय, जयश्री शर्मा सहित अर्थ जगत से जुड़े लोग मौजूद रहे। 
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केवल छह प्रतिशत ही काला धन निकला: किरीट पारीक   
योजना आयोग के पूर्व सदस्य किरीट पारीक ने कहा कि नोटबंदी से केवल छह प्रतिशत ही काले धन पर लगाम कस सकी है। असली कालाधन तो रियल एस्टेट और सोने में लगा है। इनमें 40 प्रतिशत धन लगा है। फिर से रियल एस्टेट कारोबार को पटरी पर लाने को स्टांप ड्यूटी कम करनी होगी और कीमतें घटानी हाेंगी। 


2000 का नोट जारी करना सरकार की बड़ी चूक: पीके चौबे
भारतीय आर्थिक परिषद के अध्यक्ष व भारतीय लोक प्रशासन संस्थान नई दिल्ली के सदस्य पीके चौबे ने कहा कि नोटबंदी के बाद 100 के बाद सीधा 2000 का नोट जारी करना सरकार की बड़ी चूक है। हकीकत है कि सरकार को नहीं पता था कि काला धन कितना है। बैंकों ने ही सरकार की नोटबंदी प्रक्रिया को फेल किया है। चार्टर्ड एकाउंटेंटों ने मोटी रकम लेकर बैंककर्मियों की मदद से पैसे बदलवाए हैं।
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