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श्रोता बन भागवत सुनने पहुंचे मोरारी बापू
अमर उजाला ब्यूरो वृंदावन
Updated Thu, 17 Mar 2016 12:44 AM IST
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श्रोता बन भागवत सुनने पहुंचे मोरारी बापू
- फोटो : अमर उजाला
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान लीला मंच पर आयोजित हो रही श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को सातवें दिन प्रख्यात कथा वाचक मोरारी बापू भी शामिल हुए। उन्होंने कहा मैं भागवत का वक्ता नहीं श्रोता हूं।
आचार्य इन्द्रेश उपाध्याय के श्रीमुख से भागवत कथा सुनने हुए मोरारी बापू ने बताया कि गोपीगीत मेरा प्रिय गीत है। इसमें पांच सांसारिक विषयों को निकालने के लिए पांच तरह के विश्वास हैं। इसके गायन और श्रवण से श्रीकृष्ण के साक्षात दर्शन होते हैं।
श्रीमद्भागवत कथा के प्रसंग पर चर्चा करते हुए आचार्य इन्द्रेश उपाध्याय ने कहा कि व्यक्ति प्रभु से अपने कर्म का फल संसारी सुख के रूप में मांगता है और वह संसार का सुख भोगते हुए मोह में ही बंधा रहता है। अगर व्यक्ति फल के रूप में प्रभु को मांगे तो परमात्मा उस व्यक्ति को संसार का सुख देते हुए स्वयं दर्शन भी देते हैं।
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आचार्य इन्द्रेश ने रुक्मिणी विवाह की चर्चा की। भगवान श्रीकृष्ण का मथुरा गमन, द्वारिकापुरी निर्माण प्रसंगों पर प्रकाश डाला। मोरारी बापू का अभिनंदन श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान की ओर से गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, मुख्य अधिशासी अधिकारी राजीव श्रीवास्तव आदि ने किया।
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आचार्य इन्द्रेश उपाध्याय के श्रीमुख से भागवत कथा सुनने हुए मोरारी बापू ने बताया कि गोपीगीत मेरा प्रिय गीत है। इसमें पांच सांसारिक विषयों को निकालने के लिए पांच तरह के विश्वास हैं। इसके गायन और श्रवण से श्रीकृष्ण के साक्षात दर्शन होते हैं।
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श्रीमद्भागवत कथा के प्रसंग पर चर्चा करते हुए आचार्य इन्द्रेश उपाध्याय ने कहा कि व्यक्ति प्रभु से अपने कर्म का फल संसारी सुख के रूप में मांगता है और वह संसार का सुख भोगते हुए मोह में ही बंधा रहता है। अगर व्यक्ति फल के रूप में प्रभु को मांगे तो परमात्मा उस व्यक्ति को संसार का सुख देते हुए स्वयं दर्शन भी देते हैं।
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आचार्य इन्द्रेश ने रुक्मिणी विवाह की चर्चा की। भगवान श्रीकृष्ण का मथुरा गमन, द्वारिकापुरी निर्माण प्रसंगों पर प्रकाश डाला। मोरारी बापू का अभिनंदन श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान की ओर से गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, मुख्य अधिशासी अधिकारी राजीव श्रीवास्तव आदि ने किया।