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मथुरा वालों की डिग्रियों पर कई शहरों में मेडिकल स्टोर
अजय खंडेलवाल
Updated Thu, 08 Dec 2016 11:04 PM IST
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मेडिकल स्टोर
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फार्मासिस्ट मथुरा के हैं लेकिन इनके रजिस्ट्रेशन नंबर पर बुलंदशहर, गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर समेत प्रदेश के कई शहरों में मेडिकल स्टोर चल रहे हैं। इसका खुलासा ऑनलाइन जांच में हुआ है। मामले में मुकदमा दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
गौरतलब है कि मेडिकल स्टोर का लाइसेंस लेने के लिए फार्मासिस्ट की डिग्री लगानी जरूरी है। इसके बिना लाइसेंस जारी नहीं किया जाता। डिग्री भी वही होनी चाहिए जिसका रजिस्ट्रेशन उत्तर प्रदेश फार्मा काउंसिल में हो। अब इसे लेकर बड़े पैमाने पर गोलमाल शुरू हो गया है। फर्जीवाड़े में एक बड़ा गिरोह है जो किसी के रजिस्ट्रेशन नंबर से किसी दूसरे का मेडिकल स्टोर खुलवा रहा है। इस प्रकार के मामले सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मचा है। जांच शुरू करा दी गई है।
केस वन:
गोवर्धन के राधाकुंड निवासी घनश्याम ने जिला औषधि निरीक्षक कार्यालय में दवा की दुकान के लाइसेंस के लिए आवेदन किया। इसके लिए उन्होंने अपना फार्मासिस्ट का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट लगाया। इस रजिस्ट्रेशन नंबर 46679 को ऑनलाइन किया गया तो इस पर बुलंदशहर में गौर मेडिकल स्टोर संचालित दर्शाया गया। इस खेल में दिलचस्प बात ये है कि इस रजिस्ट्रेशन नंबर पर ही प्रमाण पत्र अंशु कुमार के नाम से थे।
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केस दो:
यह गाजियाबाद में पकड़ा गया है। मथुरा के कोसीखुर्द रामपुर निवासी जोगेंद्र सिंह ने जिला औषधि निरीक्षक कार्यालय में अपना रजिस्ट्रेशन नंबर 63649 दाखिल किया। इस नंबर की जांच में सामने आया कि इस नंबर से हरिओम मेडिकोज नाम से गाजियाबाद में दवा दुकान चल रही है। इस पर मेरठ ड्रग लाइसेंस अथॉरिटी को शिकायत दर्ज कराई गई है।
एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर पर अलग-अलग नाम
मथुरा,ब्यूरो। एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर पर अलग-अलग नाम प्रदेश में बड़े फर्जीबाड़े की ओर इशारा कर रहे है। सूत्र बताते है कि सूबे में कोई गैंग इस खेल को अंजाम दे रहा है जिसमें छात्रों के रजिस्ट्रेशन नंबर पर नीचे फर्जी नाम और पता लिखकर सर्टिफिकेट जारी किये जा रहे है।
ऑनलाइन जांच में दोनों ही मामलों के खुलासे हुए हैं। इसमें मेरठ ड्रग लाइसेंस अथॉरिटी ने गाजियाबाद के जिला औषधि निरीक्षक को एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। बुलंदशहर वाले मामले में हम वहां के ड्रग इंस्पेक्टर को कड़ी कार्रवाई के लिए पत्र लिख रहे हैं।
- दीपक कुमार
जिला औषधि निरीक्षक, मथुरा
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गौरतलब है कि मेडिकल स्टोर का लाइसेंस लेने के लिए फार्मासिस्ट की डिग्री लगानी जरूरी है। इसके बिना लाइसेंस जारी नहीं किया जाता। डिग्री भी वही होनी चाहिए जिसका रजिस्ट्रेशन उत्तर प्रदेश फार्मा काउंसिल में हो। अब इसे लेकर बड़े पैमाने पर गोलमाल शुरू हो गया है। फर्जीवाड़े में एक बड़ा गिरोह है जो किसी के रजिस्ट्रेशन नंबर से किसी दूसरे का मेडिकल स्टोर खुलवा रहा है। इस प्रकार के मामले सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मचा है। जांच शुरू करा दी गई है।
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गोवर्धन के राधाकुंड निवासी घनश्याम ने जिला औषधि निरीक्षक कार्यालय में दवा की दुकान के लाइसेंस के लिए आवेदन किया। इसके लिए उन्होंने अपना फार्मासिस्ट का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट लगाया। इस रजिस्ट्रेशन नंबर 46679 को ऑनलाइन किया गया तो इस पर बुलंदशहर में गौर मेडिकल स्टोर संचालित दर्शाया गया। इस खेल में दिलचस्प बात ये है कि इस रजिस्ट्रेशन नंबर पर ही प्रमाण पत्र अंशु कुमार के नाम से थे।
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केस दो:
यह गाजियाबाद में पकड़ा गया है। मथुरा के कोसीखुर्द रामपुर निवासी जोगेंद्र सिंह ने जिला औषधि निरीक्षक कार्यालय में अपना रजिस्ट्रेशन नंबर 63649 दाखिल किया। इस नंबर की जांच में सामने आया कि इस नंबर से हरिओम मेडिकोज नाम से गाजियाबाद में दवा दुकान चल रही है। इस पर मेरठ ड्रग लाइसेंस अथॉरिटी को शिकायत दर्ज कराई गई है।
एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर पर अलग-अलग नाम
मथुरा,ब्यूरो। एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर पर अलग-अलग नाम प्रदेश में बड़े फर्जीबाड़े की ओर इशारा कर रहे है। सूत्र बताते है कि सूबे में कोई गैंग इस खेल को अंजाम दे रहा है जिसमें छात्रों के रजिस्ट्रेशन नंबर पर नीचे फर्जी नाम और पता लिखकर सर्टिफिकेट जारी किये जा रहे है।
ऑनलाइन जांच में दोनों ही मामलों के खुलासे हुए हैं। इसमें मेरठ ड्रग लाइसेंस अथॉरिटी ने गाजियाबाद के जिला औषधि निरीक्षक को एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। बुलंदशहर वाले मामले में हम वहां के ड्रग इंस्पेक्टर को कड़ी कार्रवाई के लिए पत्र लिख रहे हैं।
- दीपक कुमार
जिला औषधि निरीक्षक, मथुरा