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मथुरा: विधायक कारिंदा सिंह समेत छह दोषमुक्त
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मथुरा। 8 साल पूर्व मथुरा रिफाइनरी के गेट नंबर 9 पर हुए जानलेवा हमला एवं अपहरण के मामले में गोवर्धन के विधायक ठाकुर कारिंदा सिंह और उनके पुत्र सुनील सिंह समेत पांच लोगों को एमपी/एमएलए कोर्ट ने दोषमुक्त करार दिया है। इस मामले की पैरवी जनपद के वरिष्ठ अधिवक्ता नंदकिशोर उपमन्यु ने की।
थाना रिफाइनरी के गांव बाद निवासी चंद्रशेखर सिंह पुत्र हरस्वरूप सिंह ने ठा. कारिंदा सिंह, उनके पुत्र सुनील सिंह, महेश, ओमप्रकाश, देवो उर्फ देवेंद्र सिंह के खिलाफ अपर जिला जज सप्तम न्यायालय में एक वाद दायर किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि 14 अगस्त 2013 को रिफाइनरी के गेट नंबर 9 पर इन सभी लोगों ने धरना देने के वक्त मारपीट करके गोली चलाई और मुझे गाड़ी में अगवा करके ले गए। बमुश्किल क्षेत्रीय पुलिस ने जान बचाई।
इस मामले में न्यायालय में प्रस्तुत सभी गवाह अपने बयानों से मुकर गए और यहां तक कि तत्कालीन चौकी इंचार्ज ने भी इस तरह की कोई घटना होने से इनकार कर दिया। वादी चंद्रशेखर के अनुसार मथुरा रिफाइनरी में शटडाउन के वक्त 40 स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाता है। अगस्त 2013 में शटडाउन के वक्त स्थानीय लोगों को आश्वासन के बावजूद काम नहीं दिया गया, जिसको लेकर 14 अगस्त को उनके नेतृत्व में धरना दिया जा रहा था। धरने को खत्म करने के लिए रिफाइनरी प्रबंधन ने ठाकुर कारिंदा सिंह के साथ मिलकर यह घटना कराई।
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इस मामले में क्रॉस मुकदमा दर्ज हुआ था। पहला मुकदमा ठाकुर कारिंदा सिंह ने दर्ज कराया, जबकि उसके बाद चंद्रशेखर ने दर्ज कराई। मुकदमे के अलावा चंद्रशेखर ने न्यायालय में इसी घटना का दावा भी दायर किया। मुकदमे और दावे में तथ्य अलग अलग बताए गए। दावा के संबंध में 20 दिसंबर 21 को अपर जिला जज कमलेश कुमार पाठक ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अभियुक्तों को दोषमुक्त करार दिया गया। एडीजीसी क्रिमिनल मुकेश गोस्वामी ने बताया कि विधायक, उनके बेटे समेत पांच को दोषमुक्त करार दिया गया है।
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थाना रिफाइनरी के गांव बाद निवासी चंद्रशेखर सिंह पुत्र हरस्वरूप सिंह ने ठा. कारिंदा सिंह, उनके पुत्र सुनील सिंह, महेश, ओमप्रकाश, देवो उर्फ देवेंद्र सिंह के खिलाफ अपर जिला जज सप्तम न्यायालय में एक वाद दायर किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि 14 अगस्त 2013 को रिफाइनरी के गेट नंबर 9 पर इन सभी लोगों ने धरना देने के वक्त मारपीट करके गोली चलाई और मुझे गाड़ी में अगवा करके ले गए। बमुश्किल क्षेत्रीय पुलिस ने जान बचाई।
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इस मामले में न्यायालय में प्रस्तुत सभी गवाह अपने बयानों से मुकर गए और यहां तक कि तत्कालीन चौकी इंचार्ज ने भी इस तरह की कोई घटना होने से इनकार कर दिया। वादी चंद्रशेखर के अनुसार मथुरा रिफाइनरी में शटडाउन के वक्त 40 स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाता है। अगस्त 2013 में शटडाउन के वक्त स्थानीय लोगों को आश्वासन के बावजूद काम नहीं दिया गया, जिसको लेकर 14 अगस्त को उनके नेतृत्व में धरना दिया जा रहा था। धरने को खत्म करने के लिए रिफाइनरी प्रबंधन ने ठाकुर कारिंदा सिंह के साथ मिलकर यह घटना कराई।
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इस मामले में क्रॉस मुकदमा दर्ज हुआ था। पहला मुकदमा ठाकुर कारिंदा सिंह ने दर्ज कराया, जबकि उसके बाद चंद्रशेखर ने दर्ज कराई। मुकदमे के अलावा चंद्रशेखर ने न्यायालय में इसी घटना का दावा भी दायर किया। मुकदमे और दावे में तथ्य अलग अलग बताए गए। दावा के संबंध में 20 दिसंबर 21 को अपर जिला जज कमलेश कुमार पाठक ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अभियुक्तों को दोषमुक्त करार दिया गया। एडीजीसी क्रिमिनल मुकेश गोस्वामी ने बताया कि विधायक, उनके बेटे समेत पांच को दोषमुक्त करार दिया गया है।