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मथुरा: दुष्कर्मी को २० वर्ष का कठोर कारावास
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मथुरा। लगभग चार वर्ष पूर्व घर के बाहर खेल रही छह वर्षीय बालिका को टॉफी के बहाने ले जाकर दुष्कर्म करने वाले अभियुक्त को न्यायालय अतिरिक्त विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट-२ अमर सिंह ने २० वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अभियुक्त को जेल भेजा है।
०३ मार्च २०१७ में थाना रिफाइनरी क्षेत्र के एक गांव में छह वर्षीय बालिका घर के बाहर चबूतरा पर खेल रही थी। तभी शैलू उर्फ शैलेंद्र बालिका को टॉफी के बहाने बुलाकर सामने पड़े टूटे मकान मेें ले गया। कुछ देर बाद ही बालिका के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी।
आवाज सुनकर बालिका की मां पहुंची, जिसे देखकर आरोपी किशोर भाग निकला। पिता ने थाना रिफाइनरी में रिपोर्ट दर्ज कराई। जिसके बाद पुलिस ने अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, बाद में उसे जमानत मिल गई थी।
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केस की सुनवाई न्यायालय अतिरिक्त पॉक्सो एक्ट-२ की अदालत मेें चली। शुक्रवार को केस की सुनवाई के बाद न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी मानते हुए २० वर्ष के कठोर कारावास तथा १.२५ लाख के अर्थदंड की सजा सुनाई।
एडीजीसी सुभाष चंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि अर्थदंड जमा न करने पर दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने अभियुक्त को जेल भेज दिया। पूर्व मेें जेल में बिताई छह माह की अवधि सजा मेें समाहित होगी। अभियुक्त द्वारा दी गई अर्थदंड की राशि पीड़िता को दी जाएगी। यदि अभियुक्त यह राशि नहीं देता हो तो यह राशि सरकार द्वारा दी जाएगी।
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०३ मार्च २०१७ में थाना रिफाइनरी क्षेत्र के एक गांव में छह वर्षीय बालिका घर के बाहर चबूतरा पर खेल रही थी। तभी शैलू उर्फ शैलेंद्र बालिका को टॉफी के बहाने बुलाकर सामने पड़े टूटे मकान मेें ले गया। कुछ देर बाद ही बालिका के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी।
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आवाज सुनकर बालिका की मां पहुंची, जिसे देखकर आरोपी किशोर भाग निकला। पिता ने थाना रिफाइनरी में रिपोर्ट दर्ज कराई। जिसके बाद पुलिस ने अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, बाद में उसे जमानत मिल गई थी।
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केस की सुनवाई न्यायालय अतिरिक्त पॉक्सो एक्ट-२ की अदालत मेें चली। शुक्रवार को केस की सुनवाई के बाद न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी मानते हुए २० वर्ष के कठोर कारावास तथा १.२५ लाख के अर्थदंड की सजा सुनाई।
एडीजीसी सुभाष चंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि अर्थदंड जमा न करने पर दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने अभियुक्त को जेल भेज दिया। पूर्व मेें जेल में बिताई छह माह की अवधि सजा मेें समाहित होगी। अभियुक्त द्वारा दी गई अर्थदंड की राशि पीड़िता को दी जाएगी। यदि अभियुक्त यह राशि नहीं देता हो तो यह राशि सरकार द्वारा दी जाएगी।