लक्ष्मण हुए मूर्छित, हनुमान लाए संजीवनी

ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा Updated Mon, 10 Oct 2016 12:07 AM IST
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श्री रामलीला महोत्सव के तहत रविवार को महाविद्या मैदान में लक्ष्मण शक्ति, कुंभकरण वध लीला का मंचन हुआ। कुंभकरण वध और हनुमान के संजीवनी लाने की लीला लीला देखकर सभी श्रद्धालु आनंदित हो उठे। मैदान श्रीराम-लक्ष्मण की जय-जयकार से गुंजायमान रहा।
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रामलीला मंचन में श्रीराम से युद्ध में लगातार हार मिलने पर रावण अपने भाई कुंभकरण को जगाता है। कुंभकरण ब्रह्माजी के वरदान से छह माह सोता है और छह माह ही जागता है। कुंभकरण प्रभु श्रीराम से शत्रुता पर रावण को समझाने की कोशिश करता है लेकिन वो नहीं मानता। कुंभकरण का हनुमान और सुग्रीव से युद्ध होता है। अंत में प्रभु श्रीराम कुंभकरण का वध कर देते हैं।
इसके बाद रावण पुत्र मेघनाद को युद्ध के लिए भेजता है। मेघनाद राम सेना को व्याकुल कर देता है। लक्ष्मण, प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद लेकर मेघनाद से युद्ध करने के लिए आते हैं। युद्ध में मेघनाद लक्ष्मण के ऊपर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर उन्हें मूर्छित कर देता है। राम सेना में हाहाकार मच जाता है। विभीषण की सलाह पर लंका से सुषेन वैद्य को लाया जाता है। 
वो हिमालय से संजीवनी बूटी लाने की कहते हैैं। हिमालय पर पहुंच कर हनुमानजी जड़ी-बूटी को पहचान नहीं पाते तो पूरे पहाड़ को लेकर आते हैं। संजीवनी से लक्ष्मण होश में आ जाते हैं। राम दल में खुशी की लहर दौड़ जाती है।

मेघनाथ वध, सुलोचना सती लीला आज
मीडिया प्रभारी विपुल पारिक ने बताया कि 10 अक्तूबर (आज) को मेघनाद वध और सुलोचना सती की लीला का मंचन शाम चार बजे से महा विद्या मैदान पर होगा। इसके बाद चित्रकूट पर पुन: इन लीलाओं का मंचन किया जाएगा।

कोसी में लंका दहन लीला
रामलीला संस्थान के तत्वावधान में आयोजित भरत मिलाप मेले में रविवार की शाम राम-लक्ष्मण, हनुमान जी के डोले की सवारी निकाली गई। सवारी के गोमती कुंड पहुंचने पर लंका दहन लीला का मंचन किया गया। लीला से पूर्व गोमती सरोवर पर प्रतीकात्मक सोने की लंका दहन किया गया।

शाम 6 बजे गयालाल स्मृति भवन से अशोक वाटिका में बैठी सीता जी, राम-लक्ष्मण, वानर सेना, शिव आराधना करता रावण, विभीषण के घर पर हनुमान की सवारी निकली। सवारी प्रमुख मार्गों से होती हुई भगवती मंदिर पहुंची। 

रविवार को रामलीला गोमती सरोवर के किनारे आयोजित की गई। लीला निर्देशक सत्यनारायण शर्मा के निर्देशन स्थानीय कलाकारों ने लीला का मंचन किया। भानुप्रताप सिंह, तरुण सेठ, अजयपाल सिंह, प्रमोद बठैनिया आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे। मेले में सोमवार की शाम 5 बजे रामजी की सवारी निकाली जाएगी। रात में 7 बजे कुंभकरण वध और रात 10 बजे तोताराम मंदिर से मां काली की सवारी निकाली जाएगी।

चार फुट लंबे मुखौटे वाली होगी कोसी की काली
उत्तर भारत का प्रमुख काली मेला सोमवार को कोसी में आयोजित किया जाएगा। क्वार माह की नवरात्रि में नवमी की रात्रि में इस मेले का आयोजन रामलीला संस्थान की ओर से किया जाता है। मेले का एक प्रमुख आकर्षण मां काली की सवारी है। ये सवारी किसी वाहन में नहीं निकाली जाती।

काली के स्वरूप 15 से 20 किग्रा भारी मुखौटे को लगाए, शरीर पर 40-45 किलो वजन के वस्त्र-आभूषण आदि धारण किए, दोनों हाथों में नंगी तलवार लिए निकलते हैं। आगे 10-12 लांगुरिया होते हैं। अवधेश शर्मा तीसरी बार काली का स्वरूप बनेंगे।

बोले कि काली की भूमिका को निभाने के लिए नियमों का पालन करना पड़ता है। इनमें नवरात्रि व्रत रखना, मां की लगातार पूजा-आराधना करना और ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है। उनको इस संबंध में गुरु नेत्रपाल शर्मा से प्रेरणा मिली। मोहन श्याम, अशोक, मनीष, देवदत्त, बबलू, सचिन, सूरज, संजय आदि काले-लाल भैरव के स्वरूप में उनके साथ रहते हैं।

मां काली पर भेंट चढ़ाने हेतु करता है हरण
लीला निर्देशक सत्यनारायण शर्मा ने बताया कि कुंभकरण वध के बाद रावण पाताल के राजा अहिरावण से मदद मांगता है। अहिरावण हनुमान जी का भेष धारण कर भगवान राम और लक्ष्मण का हरण मां काली पर भेंट चढ़ाने के लिए करता है। तभी रामायण में मां काली के पात्र का उदय होता है। पूरी रात चलने वाले मेले के बाद मंगलवार तड़के चार बजे भरत मिलाप चौक पर अहिरावण वध लीला का मंचन किया जाएगा।

राया में आज निकलेगी काली की पदयात्रा
रामलीला कमेटी की ओर से 10 अक्तूबर को दोपहर दो बजे बलदेव रोड स्थित झंकीमल धर्मशाला से मां काली की पैदल यात्रा निकलेगी जाएगी। रामलीला मैदान में मेघनाथ का पुतला दहन किया जाएगा। 11 अक्तूबर को भी काली की पैदल यात्रा निकलेगी। इस वार भी काली के स्वरूप रामकुमार उपाध्याय उर्फ कन्हैया गुरु बनेंगे।

लक्ष्मण शक्ति लीला का मंचन
श्री धाम राधाकुंड में रामलीला महोत्सव में लक्ष्मण शक्ति लीला का मंचन हुआ। हनुमान संजीवनी बूटी लाए तब लक्ष्मण के प्राण बचाए जा सके। लीला में पप्पी मिश्रा, लक्ष्मीकान्त गोस्वामी, सुरेश जोशी, राम जोशी का सहयोग रहा।
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