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फाग खेलने बरसाने से आए नटवर नंद किशोर...
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 20 Mar 2016 12:03 AM IST
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान
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रंगभरनी एकादशी को श्रीकृष्ण जन्मस्थान होली के रंग में रंग गया। लीला मंच पर रसिया गायन की धूम के साथ आसमान से उड़ते गुलाल ने संपूर्ण वातावरण को होलीमय कर दिया। यहां कभी राजस्थान के कलाकारों ने होली के रंग बिखेरे तो कभी ब्रज के कलाकारों ने श्रद्धालुओं को होली के गीतों से भावविभोर कर दिया। हरियाणा के कलाकारों की प्रस्तुति भी समां बांधती रही। श्रद्धा का सैलाब अपने कान्हा की जन्मभूमि पर होली उत्सव को जी रहा था।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान लीला मंच पर ब्रज गोपी ग्वाल मंडल के कलाकारों ने ‘जगत होरी ब्रज होरा, ऐसौ न देख निगोड़ा’ नाटिका की प्रस्तुति दी। ‘बरसाने की मोरकुटी पर मोर बन आयौ रसिया’ के स्वरों के साथ मयूर नृत्य पर उपस्थित समूह भी झूम उठा।
चरकुला नृत्य और राजस्थानी कलाकारों के भवई नृत्य की प्रस्तुति पर तो लोगों ने दांतों तले अंगुलियां दबा लीं। फूलों की होली भी हुई। फाग खेलने बरसाने से आए नटवर नंद किशोर..., मेरी चूनर पर रंग डाल गयौ कान्हा वंशी बारौ..., जन्मभूमि की होरी गोरी रोज-रोज ना आवे जो कान्हा संग होरी खेले जन्म सफल है जावै..., जन्मभूमि की होरी मची खेल रहे नंदलाल, रंग गुलाल उडवाते नाचें दै दै कार...।
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होली गीतों ने आस्था के रंग को और गाढ़ा किया। लीला मंच पर एक के बाद एक, एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी गई।
इससे पूर्व यहां होली के कार्यक्रम की शुरुआत कार्ष्णि गुरु शरणानंद महाराज ने युगल सरकार की आरती के साथ की। सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा और सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
हुरियारिनों ने बरसाईं प्रेम पगीं लाठियां
आसमान से हुई गुलाल की बरसात, आनंदित हुए भक्त
श्रीकृष्ण जन्मस्थान लीला मंच पर रसिया और लोकनृत्य की प्रस्तुतियों के बीच दर्शकों पर आसमान से गुलाल की बरसात होने लगी। उड़त गुलाल देख रावल से आए हुरियारे और हुरियारिन लाठियों के साथ मैदान में आ गए।
फिर लाठियों की तड़तड़ाहट के बीच प्रिया-प्रियतम की होली का दौर शुरू हो गया। हुरियारे और हुरियारिन के बीच होली में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंचे भक्त भी शामिल हो गए। हुरियारिनों की लाठियां भक्तों को आनंदित कर दिया। अद्भुत आनंद देने वाले इस क्षण में गुलाल के साथ आसमान से फूलों की भी बरसात हुई। इससे संपूर्ण श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर पर सतरंगी छटा छा गई।
जन्मस्थान पर उमड़ा जनसमूह
बरसाना और नंदगांव में लठामार होली के बाद रंगभरनी एकादशी के दिन संपूर्ण ब्रज देश-विदेशी भक्तों के साथ श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर नजर आया। होली कार्यक्रम शुरू होने से पहले तक शहर का प्रत्येक रास्ता श्रीकृष्ण जन्मस्थान की ओर जाने वाले भक्तों से ही अटा दिखाई दिया।
इससे स्थिति यह हो गई कि होली आयोजन के दौरान श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर हर तरफ भीड़ का रैला नजर आया। होली देखने के लिए लोगों ने जन्मस्थान परिसर की छतों का भी सहारा लिया। लीला मंच पंडाल के अलावा संपूर्ण मैदान और भागवत भवन की सीढ़ियों के साथ केशवदेव मंदिर और गर्भगृह की छत भी भक्तों से अटी रही।
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान लीला मंच पर ब्रज गोपी ग्वाल मंडल के कलाकारों ने ‘जगत होरी ब्रज होरा, ऐसौ न देख निगोड़ा’ नाटिका की प्रस्तुति दी। ‘बरसाने की मोरकुटी पर मोर बन आयौ रसिया’ के स्वरों के साथ मयूर नृत्य पर उपस्थित समूह भी झूम उठा।
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चरकुला नृत्य और राजस्थानी कलाकारों के भवई नृत्य की प्रस्तुति पर तो लोगों ने दांतों तले अंगुलियां दबा लीं। फूलों की होली भी हुई। फाग खेलने बरसाने से आए नटवर नंद किशोर..., मेरी चूनर पर रंग डाल गयौ कान्हा वंशी बारौ..., जन्मभूमि की होरी गोरी रोज-रोज ना आवे जो कान्हा संग होरी खेले जन्म सफल है जावै..., जन्मभूमि की होरी मची खेल रहे नंदलाल, रंग गुलाल उडवाते नाचें दै दै कार...।
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होली गीतों ने आस्था के रंग को और गाढ़ा किया। लीला मंच पर एक के बाद एक, एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी गई।
इससे पूर्व यहां होली के कार्यक्रम की शुरुआत कार्ष्णि गुरु शरणानंद महाराज ने युगल सरकार की आरती के साथ की। सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा और सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
हुरियारिनों ने बरसाईं प्रेम पगीं लाठियां
आसमान से हुई गुलाल की बरसात, आनंदित हुए भक्त
श्रीकृष्ण जन्मस्थान लीला मंच पर रसिया और लोकनृत्य की प्रस्तुतियों के बीच दर्शकों पर आसमान से गुलाल की बरसात होने लगी। उड़त गुलाल देख रावल से आए हुरियारे और हुरियारिन लाठियों के साथ मैदान में आ गए।
फिर लाठियों की तड़तड़ाहट के बीच प्रिया-प्रियतम की होली का दौर शुरू हो गया। हुरियारे और हुरियारिन के बीच होली में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंचे भक्त भी शामिल हो गए। हुरियारिनों की लाठियां भक्तों को आनंदित कर दिया। अद्भुत आनंद देने वाले इस क्षण में गुलाल के साथ आसमान से फूलों की भी बरसात हुई। इससे संपूर्ण श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर पर सतरंगी छटा छा गई।
जन्मस्थान पर उमड़ा जनसमूह
बरसाना और नंदगांव में लठामार होली के बाद रंगभरनी एकादशी के दिन संपूर्ण ब्रज देश-विदेशी भक्तों के साथ श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर नजर आया। होली कार्यक्रम शुरू होने से पहले तक शहर का प्रत्येक रास्ता श्रीकृष्ण जन्मस्थान की ओर जाने वाले भक्तों से ही अटा दिखाई दिया।
इससे स्थिति यह हो गई कि होली आयोजन के दौरान श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर हर तरफ भीड़ का रैला नजर आया। होली देखने के लिए लोगों ने जन्मस्थान परिसर की छतों का भी सहारा लिया। लीला मंच पंडाल के अलावा संपूर्ण मैदान और भागवत भवन की सीढ़ियों के साथ केशवदेव मंदिर और गर्भगृह की छत भी भक्तों से अटी रही।