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दरोगा ने सिपाही का लोटा से फोड़ा सिर
ब्यूरो अमर उजाला
Updated Sat, 22 Apr 2017 12:07 AM IST
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सिपाही
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कचहरी हवालात पर बंदी से मिलने पहुंचे उसके घर वालों को सिपाही ने रोका तो दरोगा आपा खो बैठा। आदेश के बाद भी सिपाही ने घर वालों को मिलने न देने पर दरोगा ने सिपाही को पीट दिया। लहूलुहान कर दिया। लोटा से सिर तक फोड़ दिया। बाद में पुलिस अफसरों ने मौके पर पहुंचकर मामले को शांत कराया।
कचहरी में हवालात के पास हुई यह घटना दोपहर ठीक सवा तीन बजे की है। हुआ यूं कि राया निवासी बंदी राधेश्याम को पुलिस ने एडीजे छह की कोर्ट में पेश किया था। राधेश्याम और दूसरे बंदियों को दरोगा नेपाल सिंह और सिपाही सुरेंद्र पेशी पर लेकर पहुंचे थे। जब राधेश्याम को कोर्ट से बाहर लेकर आए तो उसके घर वाले भी मुलाकात करने के लिए पीछे-पीछे चल दिए।
इस पर सिपाही सुरेंद्र सिंह ने उन्हें वहां से जाने को कहा। इस पर दरोगा नेपाल सिंह ने सिपाही से कहा कि वह बात हो जाने दे। सिपाही ने नियमों का हवाला देकर इंकार कर दिया। हवालात के पास पहुंचकर दरोगा ने सिपाही से फिर कहा कि वह बातचीत हो जाने दे। सिपाही ने फिर इंकार कर दिया। इस पर दरोगा ने आपा खो दिया और सिपाही सुरेंद्र पर टूट पड़ा। मारपीट शुरू कर दी।
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दोनों तरफ से ही हाथापाई शुरू हो गई थी। इसी दौरान दरोगा ने हवालात में रखा लोटा उठाकर सिपाही सुरेंद्र के सिर में दे मारा। सुरेंद्र का सिर फूट गया और वह लहूलुहान हो गया। पुलिसवालों को लड़ता देख भीड़ लग गई थी। बाद में पुलिस अफसर भी पहुंचे। एसपी सिटी अशोक कुमार ने बताया कि जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
पुलिस की देख लड़ाई, बंदियों ने खूब ताली बजाई
कचहरी में हवालात के बाहर दरोगा और सिपाही को लड़ते देख बंदियों ने पुलिस की हाय हाय करनी शुरू दी। दूसरों का झगड़ा निपटाने वाले पुलिस वाले ही अगर भरी कचहरी में लड़ने लगें तो भीड़ लगना लाजमी है। बंदियों को भी भला ऐसा मौका कहां मिलता होगा। जब उन्होंने दरोगा और सिपाही की लड़ाई देखी तो कभी तालियां बजाते तो कभी पुलिस की हाय हाय करने लगते। नारेबाजी से हवालात गूंजने लगी थी। जब तक पुलिस अधिकारी यहां नहीं पहुंच गए झगड़ा होता ही रहा।
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कचहरी में हवालात के पास हुई यह घटना दोपहर ठीक सवा तीन बजे की है। हुआ यूं कि राया निवासी बंदी राधेश्याम को पुलिस ने एडीजे छह की कोर्ट में पेश किया था। राधेश्याम और दूसरे बंदियों को दरोगा नेपाल सिंह और सिपाही सुरेंद्र पेशी पर लेकर पहुंचे थे। जब राधेश्याम को कोर्ट से बाहर लेकर आए तो उसके घर वाले भी मुलाकात करने के लिए पीछे-पीछे चल दिए।
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इस पर सिपाही सुरेंद्र सिंह ने उन्हें वहां से जाने को कहा। इस पर दरोगा नेपाल सिंह ने सिपाही से कहा कि वह बात हो जाने दे। सिपाही ने नियमों का हवाला देकर इंकार कर दिया। हवालात के पास पहुंचकर दरोगा ने सिपाही से फिर कहा कि वह बातचीत हो जाने दे। सिपाही ने फिर इंकार कर दिया। इस पर दरोगा ने आपा खो दिया और सिपाही सुरेंद्र पर टूट पड़ा। मारपीट शुरू कर दी।
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दोनों तरफ से ही हाथापाई शुरू हो गई थी। इसी दौरान दरोगा ने हवालात में रखा लोटा उठाकर सिपाही सुरेंद्र के सिर में दे मारा। सुरेंद्र का सिर फूट गया और वह लहूलुहान हो गया। पुलिसवालों को लड़ता देख भीड़ लग गई थी। बाद में पुलिस अफसर भी पहुंचे। एसपी सिटी अशोक कुमार ने बताया कि जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
पुलिस की देख लड़ाई, बंदियों ने खूब ताली बजाई
कचहरी में हवालात के बाहर दरोगा और सिपाही को लड़ते देख बंदियों ने पुलिस की हाय हाय करनी शुरू दी। दूसरों का झगड़ा निपटाने वाले पुलिस वाले ही अगर भरी कचहरी में लड़ने लगें तो भीड़ लगना लाजमी है। बंदियों को भी भला ऐसा मौका कहां मिलता होगा। जब उन्होंने दरोगा और सिपाही की लड़ाई देखी तो कभी तालियां बजाते तो कभी पुलिस की हाय हाय करने लगते। नारेबाजी से हवालात गूंजने लगी थी। जब तक पुलिस अधिकारी यहां नहीं पहुंच गए झगड़ा होता ही रहा।