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...मारि पिचकारी रंग केसरिया डारौ
अमर उजाला ब्यूरो मथ्ाुरा
Updated Sat, 12 Mar 2016 11:41 PM IST
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रमणरेती आश्रम में राधाकृष्ण के स्वरूप में कलाकारों ने ब्रजवासियों संग खेली होली
- फोटो : अमर उजाला
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कालिंदी का किनारा और सैकड़ों हरे भरे वृक्षों के बीच नदी की रेती पर सुनाई देते होली के गीत। हंसी-ठिठोली, पिचकारियों से छूटती रंग की धार और महिलाओं का परंपरागत गारी (गाली) गायन। शनिवार को रमणरेती आश्रम में होली महोत्सव कुछ इस प्रकार महसूस किया गया। यहां हजारों भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण और राधाजी के साथ टेसू के फूलों के रंग, अबीर-गुलाल और फूलों से होली खेली।
रमणरेती आश्रम में गुरु कार्ष्णि गोपाल जयंती कार्यक्रम मनाया जा रहा है। यहां 85वें वार्षिकोत्सव के अंतर्गत शनिवार को होली महोत्सव का आयोजन किया गया। ब्रज के प्रमुख रासाचार्य स्वामी रामस्वरूप शर्मा के निर्देशन में कलाकारों ने फू लों की होली का प्रदर्शन किया।
मोहक राधाकृष्ण, ग्वाल बाल, गोपियां और मनसुखा की होली का भी मंचन किया गया। ‘नैहनी नैहनी बूंदन परै फुहारौ, मारि पिचकारी रंग केसरिया डारौ’ पंक्तियां सुनकर भक्त झूम उठे। इसके अलावा नंदगांव के हुरियारों का बरसाना में होली खेलने जाने वाले दृश्य का भी मंचन किया गया।
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गोपियों ‘दरशन दैऊ निकसि अटा में तै दरशन देऊ...’ पंक्तियां गाकर ग्वालों को होली खेलने के लिए आमंत्रित किया। ‘ब्रज में हरि होरी मचाई... आदि पद गाकर राधा कृष्ण बने स्वरूपों ने संतों के साथ टेसू के रंग, गुलाल, अबीर और फूलों से होली खेली। श्रद्धालुओं ने एक दूसरे को गुलाल लगाया और ब्रज रज मस्तक पर लगाकर खुद को धन्य माना। इस दौरान संत अवधेशानंद, स्वामी स्वरूपानंद प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
खूब उड़ाया अबीर-गुलाल
रमणरेती आश्रम में संतों ने श्रद्धालुओं से होली खेलने के लिए काफी मात्रा में टेसू के फूल, सुगंधित गुलाल और अबीर का इंतजाम किया था। मंच से गुरु शरणानंद, संत अवधेशानंद और राधाकृष्ण स्वरूपों ने भक्तों के ऊपर गुलाल उड़ाया। फूलों की होली के लिए आश्रम प्रबंधन ने ट्रैक्टर चालित मशीन की व्यवस्था की थी। इससे गुलाब के फूलों की पंखुड़ियां श्रद्धालुओं पर बिखेरी गईं। श्रद्धालुओं ने पंखुड़ियों को समेटा और ब्रज रज का प्रसाद मानकर थैले में भर लिया।
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रमणरेती आश्रम में गुरु कार्ष्णि गोपाल जयंती कार्यक्रम मनाया जा रहा है। यहां 85वें वार्षिकोत्सव के अंतर्गत शनिवार को होली महोत्सव का आयोजन किया गया। ब्रज के प्रमुख रासाचार्य स्वामी रामस्वरूप शर्मा के निर्देशन में कलाकारों ने फू लों की होली का प्रदर्शन किया।
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मोहक राधाकृष्ण, ग्वाल बाल, गोपियां और मनसुखा की होली का भी मंचन किया गया। ‘नैहनी नैहनी बूंदन परै फुहारौ, मारि पिचकारी रंग केसरिया डारौ’ पंक्तियां सुनकर भक्त झूम उठे। इसके अलावा नंदगांव के हुरियारों का बरसाना में होली खेलने जाने वाले दृश्य का भी मंचन किया गया।
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गोपियों ‘दरशन दैऊ निकसि अटा में तै दरशन देऊ...’ पंक्तियां गाकर ग्वालों को होली खेलने के लिए आमंत्रित किया। ‘ब्रज में हरि होरी मचाई... आदि पद गाकर राधा कृष्ण बने स्वरूपों ने संतों के साथ टेसू के रंग, गुलाल, अबीर और फूलों से होली खेली। श्रद्धालुओं ने एक दूसरे को गुलाल लगाया और ब्रज रज मस्तक पर लगाकर खुद को धन्य माना। इस दौरान संत अवधेशानंद, स्वामी स्वरूपानंद प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
खूब उड़ाया अबीर-गुलाल
रमणरेती आश्रम में संतों ने श्रद्धालुओं से होली खेलने के लिए काफी मात्रा में टेसू के फूल, सुगंधित गुलाल और अबीर का इंतजाम किया था। मंच से गुरु शरणानंद, संत अवधेशानंद और राधाकृष्ण स्वरूपों ने भक्तों के ऊपर गुलाल उड़ाया। फूलों की होली के लिए आश्रम प्रबंधन ने ट्रैक्टर चालित मशीन की व्यवस्था की थी। इससे गुलाब के फूलों की पंखुड़ियां श्रद्धालुओं पर बिखेरी गईं। श्रद्धालुओं ने पंखुड़ियों को समेटा और ब्रज रज का प्रसाद मानकर थैले में भर लिया।