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Mathura News: केंद्रीय मंत्री पद की दौड़ में शामिल हुईं हेमामालिनी
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- 1951 से लेकर 2019 तक किसी भी सांसद को कैबिनेट में नहीं मिला स्थान
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। मथुरा संसदीय सीट से लगातार तीसरी बार बड़े अंतर से जीत हासिल करने वाली हेमामालिनी को केंद्रीय कैबिनेट में मथुरा का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिल सकता है। एनडीए के केंद्र में सत्ता संभालने के बाद उन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिलती है तो मथुरा के लिए ऐतिहासिक सौगात होगी। दरअसल, 1951 से लेकर 2019 तक बने किसी भी सांसद को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला है। इसकी कसक मथुरा की जनता को भी हमेशा रहती है। इस बार उम्मीद है कि 72 साल का रिकॉर्ड टूटेगा और मंत्रिमंडल में मथुरा के सांसद को स्थान मिलेगा।
आजादी के बाद हुए पहले आम चुनाव से लेकर 2019 तक हर चुनाव में मथुरा की जनता ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। ब्रज के चेहरों को नकार कर देश के नामचीन चेहरों को संसद में पहुंचाया। इसके बाद भी कभी मथुरा के हिस्से में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री का पद नहीं आया। जबकि यह वही सीट है, जहां से साक्षी महाराज, जयंत चौधरी, हेमामालिनी जैसे चेहरे चुनाव लड़े और जीते हैं।
हिंदुत्व की सियासत को साधती है मथुरा लोकसभा सीट
मथुरा कान्हा की क्रीड़ा स्थली है। तीन लोकों से न्यारी यह धरा देश की हिंदुत्व की सियासत को साधने वाली चुनिंदा लोकसभा सीटों में शुमार है। मथुरा के बाद हिंदुत्व की राजनीति का नाम आने पर जहन में काशी और अयोध्या का नाम आता है। मथुरा-वृंदावन की धरा पर बड़े-बड़े संत हुए हैं। इन संतों के जरिये यहां से हिंदुत्व को धार दी जाती रही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। मथुरा संसदीय सीट से लगातार तीसरी बार बड़े अंतर से जीत हासिल करने वाली हेमामालिनी को केंद्रीय कैबिनेट में मथुरा का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिल सकता है। एनडीए के केंद्र में सत्ता संभालने के बाद उन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिलती है तो मथुरा के लिए ऐतिहासिक सौगात होगी। दरअसल, 1951 से लेकर 2019 तक बने किसी भी सांसद को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला है। इसकी कसक मथुरा की जनता को भी हमेशा रहती है। इस बार उम्मीद है कि 72 साल का रिकॉर्ड टूटेगा और मंत्रिमंडल में मथुरा के सांसद को स्थान मिलेगा।
आजादी के बाद हुए पहले आम चुनाव से लेकर 2019 तक हर चुनाव में मथुरा की जनता ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। ब्रज के चेहरों को नकार कर देश के नामचीन चेहरों को संसद में पहुंचाया। इसके बाद भी कभी मथुरा के हिस्से में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री का पद नहीं आया। जबकि यह वही सीट है, जहां से साक्षी महाराज, जयंत चौधरी, हेमामालिनी जैसे चेहरे चुनाव लड़े और जीते हैं।
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हिंदुत्व की सियासत को साधती है मथुरा लोकसभा सीट
मथुरा कान्हा की क्रीड़ा स्थली है। तीन लोकों से न्यारी यह धरा देश की हिंदुत्व की सियासत को साधने वाली चुनिंदा लोकसभा सीटों में शुमार है। मथुरा के बाद हिंदुत्व की राजनीति का नाम आने पर जहन में काशी और अयोध्या का नाम आता है। मथुरा-वृंदावन की धरा पर बड़े-बड़े संत हुए हैं। इन संतों के जरिये यहां से हिंदुत्व को धार दी जाती रही है।
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