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Mathura News: बांकेबिहारी कॉरिडोर और न्यास के खिलाफ निकाला पैदल मार्च
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मथुरा। वृंदावन में पैदल मार्च निकालते सेवायत व स्थानीय निवासी।
- फोटो : mathura
वृंदावन। प्रस्तावित श्रीबांकेबिहारी मंदिर कॉरिडोर और न्यास गठन के खिलाफ जनविरोध लगातार तेज होता जा रहा है। बृहस्पतिवार को सेवायतों, स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने एकजुट होकर पैदल मार्च निकाला, जिसमें महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की भी भागीदारी रही। सभी ने कॉरिडोर हाय-हाय और हमारा मंदिर, हमारी पहचान जैसे नारों के साथ विरोध दर्ज कराया।
यह पैदल मार्च मंदिर के गेट नंबर एक से शुरू होकर अड़खंभा, बनखंडी महादेव, लोई बाजार, शाहजी मंदिर होते हुए निधिवन मंदिर तक पहुंचा। इस दौरान रास्ते भर स्थानीय लोग उत्साह और आक्रोश के साथ नारेबाजी करते रहे। मंदिर के सेवायतों ने आशंका जताई है कि इस परियोजना से उनकी पारंपरिक सेवाओं और धार्मिक जिम्मेदारियों में कटौती हो सकती है। वे इसे केवल विकास परियोजना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय समुदाय के अधिकारों पर हमला मानते हैं।
इस पैदल मार्च में श्यामा गोस्वामी, दक्षा गोस्वामी, मनीषा गोस्वामी, अदिति गोस्वामी, नीलम गोस्वामी, सुमन गोस्वामी, शिवानी गोस्वामी, रेनू गोस्वामी, श्रद्धा खंडेलवाल, लाला भैया, सोमनाथ गोस्वामी, नंदन आदि लोग शामिल थे।
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प्रदर्शनकारियों की मांग
विरोध करने वालों का कहना है कि प्रस्तावित कॉरिडोर से मंदिर की पारंपरिक संरचना, तीर्थाटन की सहजता और स्थानीय लोगों की आजीविका पर असर पड़ेगा। वे परियोजना को रद्द कर सभी हितधारकों से विचार-विमर्श की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन से संतुलन की अपेक्षा
स्थानीय नागरिकों और सेवायतों ने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि वे इस संवेदनशील मामले पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाएं और संवाद के माध्यम से हल निकालें। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र हो सकता है।
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यह पैदल मार्च मंदिर के गेट नंबर एक से शुरू होकर अड़खंभा, बनखंडी महादेव, लोई बाजार, शाहजी मंदिर होते हुए निधिवन मंदिर तक पहुंचा। इस दौरान रास्ते भर स्थानीय लोग उत्साह और आक्रोश के साथ नारेबाजी करते रहे। मंदिर के सेवायतों ने आशंका जताई है कि इस परियोजना से उनकी पारंपरिक सेवाओं और धार्मिक जिम्मेदारियों में कटौती हो सकती है। वे इसे केवल विकास परियोजना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय समुदाय के अधिकारों पर हमला मानते हैं।
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इस पैदल मार्च में श्यामा गोस्वामी, दक्षा गोस्वामी, मनीषा गोस्वामी, अदिति गोस्वामी, नीलम गोस्वामी, सुमन गोस्वामी, शिवानी गोस्वामी, रेनू गोस्वामी, श्रद्धा खंडेलवाल, लाला भैया, सोमनाथ गोस्वामी, नंदन आदि लोग शामिल थे।
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प्रदर्शनकारियों की मांग
विरोध करने वालों का कहना है कि प्रस्तावित कॉरिडोर से मंदिर की पारंपरिक संरचना, तीर्थाटन की सहजता और स्थानीय लोगों की आजीविका पर असर पड़ेगा। वे परियोजना को रद्द कर सभी हितधारकों से विचार-विमर्श की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन से संतुलन की अपेक्षा
स्थानीय नागरिकों और सेवायतों ने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि वे इस संवेदनशील मामले पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाएं और संवाद के माध्यम से हल निकालें। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र हो सकता है।