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टेल्गो का पहला ट्रायल सफल
अमर उजाला मथुरा
Updated Sat, 09 Jul 2016 11:29 PM IST
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टेल्गो का पहला ट्रायल सफल
- फोटो : अमर उजाला
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देश की सबसे तेज रफ्तार ट्रेन कही जा रही टेल्गो का बहुप्रतीक्षित ट्रायल शनिवार को सफल रहा। ट्रेन 12:40 बजे जंक्शन रेलवे स्टेशन से रवाना हुई। मथुरा से पलवल तक का 84 किमी का सफर ट्रेन ने 55 मिनट में पूरा किया। रफ्तार रही 120 किमी प्रति घंटा। बाद में मथुरा जंक्शन से रूंधी रेलवे स्टेशन तक 130 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से एक और ट्रायल किया गया। मथुरा में एक महीने तक ट्रेन का ट्रायल होगा। अधिकतम रफ्तार तक पहुंचने तक प्रति दिन दस किमी प्रति घंटा रफ्तार बढ़ाई जाएगी।
मथुरा से पलवल मार्ग पर टेल्गो के ट्रायल का वक्त 11 बजे तय था। दस बजे तक इंजीनियरिंग स्टाफ यहां पहुंच गया। चेकिंग के बाद टेल्गो के ट्रायल की अनुमति दी गई। इसी बीच रेलवे मुख्यालय बड़ौदा हाउस से कहा गया कि फिलहाल कुछ एक्सप्रेस इस रूट से गुजरेंगी लिहाजा इनके जाने के बाद ट्रायल शुरू किया जाए। 12:40 पर ट्रेन को मथुरा जंक्शन से रवाना किया गया। ट्रेन में डीजल इंजन लगाया गया था।
लोको पायलट सुजीत पाठक और विवेक शर्मा ने टेल्गो को चलाया। टेल्गो ठीक 1:35 बजे पलवल रेलवे स्टेशन पर पहुंची। पलवल से इसे 2 बजे चलाया गया और 3:12 बजे ये मथुरा जंक्शन पर पहुंची। दूसरे ट्रायल में 3:57 बजे पर टेल्गो मथुरा से रवाना हुई। यहां रफ्तार बढ़कर 130 किलोमीटर प्रति घंटा हो गई। इस बार पलवल से करीब 12 किमी पहले रूंधी स्टेशन तक ही इसे चलाया गया। इस स्टेशन पर ट्रेन 4:40 बजे पहुंची।
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स्पेन से आए दस इंजीनियरों ने ट्रायल के पल-पल पर नजर रखी। इंजीनियरों ने बताया कि किसी प्रकार की कोई तकनीकी खामी नहीं आई है। पहला ट्रायल पूरी तरह से सफल बताया जा रहा है।
एक माह तक प्रतिदिन होगा ट्रायल
टेल्गो का मथुरा-पलवल खंड पर एक माह तक प्रतिदिन ट्रायल होगा। प्रत्येक दिन दस किमी प्रति घंटा की स्पीड बढ़ाई जाएगी। इसकी अधिकतम स्पीड दो सौ किमी प्रति घंटा है। मथुरा-पलवल खंड पर इसे 80 से 180 किमी प्रति घंटा की स्पीड से चलाया जाएगा।
ट्रैक खाली होने का करना पड़ा इंतजार
ट्रैक खाली होने पर ही 12:20 बजे टेल्गो को शेड से निकाला गया। टेल्गो के स्टाफ का कहना था कि ट्रायल के दौरान ट्रैक को खाली किया जाना जरूरी होता है। बड़ौदा हाउस से इस संबंध में पल-पल की रिपोर्टिंग की गई। इस बीच जंक्शन पर रेलवे का भी पूरा स्टाफ पहुंच गया था। बड़ौदा हाउस से अनुमति मिलने के बाद ही टेल्गो को दौड़ाया गया। ट्रायल के दौरान रेलवे के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल सक्सेना, एडीआरएम डीके सिंह, एरिया मैनेजर एनपी सिंह, स्टेशन अधीक्षक केएल मीना, आरपीएफ प्रभारी निरीक्षक सतेंद्र यादव आदि मौजूद रहे।
ट्रेन में लगे थे नौ कोच
टेल्गो ट्रेन में नौ कोच लगाए गए थे। इनमें दो कोच प्रथम श्रेणी के थे। ंप्रत्येक में 18-18 यात्री सीट हैं। द्वितीय श्रेणी के चार कोच में से प्रत्येक में 36-36 सीट लगी हैं। इसके साथ एक कोच में पैंट्री कार, एक जनरेटर रूम और एक अंतिम कोच गार्ड रूम रहा। इस तरह प्रथम ट्रायल में टेल्गो ट्रेन नौ कोच के साथ चली।
छह जुलाई से हो रही थी लगातार जांच
यह हाईस्पीड ट्रेन ट्रायल के लिए 6 जुलाई को मथुरा जंक्शन पर आकर खड़ी हो गई थी। स्पेन से आई इंजीनियरों की टीम उसी दिन से लगातार परीक्षण कर रही थी। जो भी छोटी-मोटी कमियां थीं उन्हें दूर कर लिया गया था। शनिवार को ट्रायल से पहले एक-एक पहिया चेक किया गया। इस टीम की परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद ही रेलवे ने टेल्गो को ट्रायल के लिए ट्रैक पर उतारा।
तीन घंटे कम हो जाएगी दिल्ली से मुंबई की दूरी
ट्रायल के दौरान जंक्शन रेलवे स्टेशन पर मौजूद रहे रेलवे के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल सक्सेना ने बताया कि टेल्गो का मथुरा से पलवल तक ट्रायल सफल होने के बाद इसका दिल्ली से मुंबई के बीच ट्रायल किया जाएगा। दिल्ली से मुंबई के बीच टेल्गो के चलने से अन्य सबसे तेज ट्रेन की अपेक्षा यात्रा में तीन घंटे कम लगेंगे।
टेल्गो कोच: खास बातें
ट्रेनों की भिड़ंत होने के दौरान अक्सर देखा गया है कि ट्रेन के डिब्बे एक-दूसरे के ऊपर चढ़ जाते हैं। इससे यात्रियों की जानमाल का काफी नुकसान होता है। जबकि टेल्गो कोच दुर्घटना होने पर एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढे़ंगे। जानमाल के नुकसान की आशंका कम रहेगी।
टेल्गो कोच का निर्माण इस तरह किया गया है कि ट्रैक पर मोड़ आने के दौरान भी इनकी स्पीड कम नहीं करनी पड़ेगी। शनिवार को कोच में सेंसर भी लगाए गए। इन सेंसर से ट्रेन के चलने के दौरान होने वाले कंपन और वाइब्रेशन को दर्ज किया गया। जांच कर इनको दूर करने के प्रयास किए जाएंगे।
इन कोच में झटका महसूस नहीं होता। यहां तक कि आपातकालीन ब्रेक लगाने पर भी यात्रियों को झटके का अहसास नहीं होगा। टेल्गो के कोच में मनोरंजन के लिए एलईडी स्क्रीन भी लगाई गई है। जाहिर है, सभी कोच एसी हैं।
हर कोई हो गया टेल्गो का कायल
देश की सबसे तेज रफ्तार ट्रेन टेल्गो के ट्रायल पर सभी की नजर थी। ट्रेन तो मथुरा जंक्शन पर चार दिन पहले ही आकर खड़ी हो गई थी लेकिन शनिवार को उसे चलाया जाना था। लिहाजा जंक्शन रेलवे स्टेशन पर काफी भीड़ रही। लोगों ने कोच में जाकर सीट पर बैठकर देखा। जिसने देखा वही कायल हो गया।
सेल्फी का दौर भी चला
टेल्गो ट्रेन के साथ सेल्फी का दौर भी खूब चला। लोग परिवार के साथ भी पहुंचे। माता-पिता बच्चों को लेकर पहुंचे। ट्रेन के स्टाफ से प्रश्न पूछने की होड़ सी रही। कहां तक ट्रायल होगा। ट्रायल होने के बाद यह टेल्गो कब से ट्रैक पर दौड़ने लगेगी। कहां से कहां तक चलेगी। सवाल पर सवाल किए गए।
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मथुरा से पलवल मार्ग पर टेल्गो के ट्रायल का वक्त 11 बजे तय था। दस बजे तक इंजीनियरिंग स्टाफ यहां पहुंच गया। चेकिंग के बाद टेल्गो के ट्रायल की अनुमति दी गई। इसी बीच रेलवे मुख्यालय बड़ौदा हाउस से कहा गया कि फिलहाल कुछ एक्सप्रेस इस रूट से गुजरेंगी लिहाजा इनके जाने के बाद ट्रायल शुरू किया जाए। 12:40 पर ट्रेन को मथुरा जंक्शन से रवाना किया गया। ट्रेन में डीजल इंजन लगाया गया था।
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लोको पायलट सुजीत पाठक और विवेक शर्मा ने टेल्गो को चलाया। टेल्गो ठीक 1:35 बजे पलवल रेलवे स्टेशन पर पहुंची। पलवल से इसे 2 बजे चलाया गया और 3:12 बजे ये मथुरा जंक्शन पर पहुंची। दूसरे ट्रायल में 3:57 बजे पर टेल्गो मथुरा से रवाना हुई। यहां रफ्तार बढ़कर 130 किलोमीटर प्रति घंटा हो गई। इस बार पलवल से करीब 12 किमी पहले रूंधी स्टेशन तक ही इसे चलाया गया। इस स्टेशन पर ट्रेन 4:40 बजे पहुंची।
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स्पेन से आए दस इंजीनियरों ने ट्रायल के पल-पल पर नजर रखी। इंजीनियरों ने बताया कि किसी प्रकार की कोई तकनीकी खामी नहीं आई है। पहला ट्रायल पूरी तरह से सफल बताया जा रहा है।
एक माह तक प्रतिदिन होगा ट्रायल
टेल्गो का मथुरा-पलवल खंड पर एक माह तक प्रतिदिन ट्रायल होगा। प्रत्येक दिन दस किमी प्रति घंटा की स्पीड बढ़ाई जाएगी। इसकी अधिकतम स्पीड दो सौ किमी प्रति घंटा है। मथुरा-पलवल खंड पर इसे 80 से 180 किमी प्रति घंटा की स्पीड से चलाया जाएगा।
ट्रैक खाली होने का करना पड़ा इंतजार
ट्रैक खाली होने पर ही 12:20 बजे टेल्गो को शेड से निकाला गया। टेल्गो के स्टाफ का कहना था कि ट्रायल के दौरान ट्रैक को खाली किया जाना जरूरी होता है। बड़ौदा हाउस से इस संबंध में पल-पल की रिपोर्टिंग की गई। इस बीच जंक्शन पर रेलवे का भी पूरा स्टाफ पहुंच गया था। बड़ौदा हाउस से अनुमति मिलने के बाद ही टेल्गो को दौड़ाया गया। ट्रायल के दौरान रेलवे के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल सक्सेना, एडीआरएम डीके सिंह, एरिया मैनेजर एनपी सिंह, स्टेशन अधीक्षक केएल मीना, आरपीएफ प्रभारी निरीक्षक सतेंद्र यादव आदि मौजूद रहे।
ट्रेन में लगे थे नौ कोच
टेल्गो ट्रेन में नौ कोच लगाए गए थे। इनमें दो कोच प्रथम श्रेणी के थे। ंप्रत्येक में 18-18 यात्री सीट हैं। द्वितीय श्रेणी के चार कोच में से प्रत्येक में 36-36 सीट लगी हैं। इसके साथ एक कोच में पैंट्री कार, एक जनरेटर रूम और एक अंतिम कोच गार्ड रूम रहा। इस तरह प्रथम ट्रायल में टेल्गो ट्रेन नौ कोच के साथ चली।
छह जुलाई से हो रही थी लगातार जांच
यह हाईस्पीड ट्रेन ट्रायल के लिए 6 जुलाई को मथुरा जंक्शन पर आकर खड़ी हो गई थी। स्पेन से आई इंजीनियरों की टीम उसी दिन से लगातार परीक्षण कर रही थी। जो भी छोटी-मोटी कमियां थीं उन्हें दूर कर लिया गया था। शनिवार को ट्रायल से पहले एक-एक पहिया चेक किया गया। इस टीम की परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद ही रेलवे ने टेल्गो को ट्रायल के लिए ट्रैक पर उतारा।
तीन घंटे कम हो जाएगी दिल्ली से मुंबई की दूरी
ट्रायल के दौरान जंक्शन रेलवे स्टेशन पर मौजूद रहे रेलवे के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल सक्सेना ने बताया कि टेल्गो का मथुरा से पलवल तक ट्रायल सफल होने के बाद इसका दिल्ली से मुंबई के बीच ट्रायल किया जाएगा। दिल्ली से मुंबई के बीच टेल्गो के चलने से अन्य सबसे तेज ट्रेन की अपेक्षा यात्रा में तीन घंटे कम लगेंगे।
टेल्गो कोच: खास बातें
ट्रेनों की भिड़ंत होने के दौरान अक्सर देखा गया है कि ट्रेन के डिब्बे एक-दूसरे के ऊपर चढ़ जाते हैं। इससे यात्रियों की जानमाल का काफी नुकसान होता है। जबकि टेल्गो कोच दुर्घटना होने पर एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढे़ंगे। जानमाल के नुकसान की आशंका कम रहेगी।
टेल्गो कोच का निर्माण इस तरह किया गया है कि ट्रैक पर मोड़ आने के दौरान भी इनकी स्पीड कम नहीं करनी पड़ेगी। शनिवार को कोच में सेंसर भी लगाए गए। इन सेंसर से ट्रेन के चलने के दौरान होने वाले कंपन और वाइब्रेशन को दर्ज किया गया। जांच कर इनको दूर करने के प्रयास किए जाएंगे।
इन कोच में झटका महसूस नहीं होता। यहां तक कि आपातकालीन ब्रेक लगाने पर भी यात्रियों को झटके का अहसास नहीं होगा। टेल्गो के कोच में मनोरंजन के लिए एलईडी स्क्रीन भी लगाई गई है। जाहिर है, सभी कोच एसी हैं।
हर कोई हो गया टेल्गो का कायल
देश की सबसे तेज रफ्तार ट्रेन टेल्गो के ट्रायल पर सभी की नजर थी। ट्रेन तो मथुरा जंक्शन पर चार दिन पहले ही आकर खड़ी हो गई थी लेकिन शनिवार को उसे चलाया जाना था। लिहाजा जंक्शन रेलवे स्टेशन पर काफी भीड़ रही। लोगों ने कोच में जाकर सीट पर बैठकर देखा। जिसने देखा वही कायल हो गया।
सेल्फी का दौर भी चला
टेल्गो ट्रेन के साथ सेल्फी का दौर भी खूब चला। लोग परिवार के साथ भी पहुंचे। माता-पिता बच्चों को लेकर पहुंचे। ट्रेन के स्टाफ से प्रश्न पूछने की होड़ सी रही। कहां तक ट्रायल होगा। ट्रायल होने के बाद यह टेल्गो कब से ट्रैक पर दौड़ने लगेगी। कहां से कहां तक चलेगी। सवाल पर सवाल किए गए।