{"_id":"6adbb53ca0ba740f440cfcbd","slug":"first-braj-84-kos-yatra-since-ramesh-babas-passing-begins-today-mathura-news-c-412-1-mt21007-13145-2026-10-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mathura News: रमेश बाबा के बाद पहली ब्रज 84 कोस यात्रा आज से","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura News: रमेश बाबा के बाद पहली ब्रज 84 कोस यात्रा आज से
विज्ञापन
नंदगांव/बरसाना। नंदगांव/बरसाना। पद्मश्री रमेश बाबा के ब्रह्मलीन होने के बाद पहली बार निशुल्क श्री राधारानी ब्रज 84 कोस यात्रा शनिवार, 24 अक्तूबर को शुरू होगी। सुबह छह बजे मान मंदिर गोशाला, बरसाना से हजारों श्रद्धालु इस यात्रा पर रवाना होंगे। यह यात्रा 28 नवंबर को बरसाना में समाप्त होगी। बाबा ने वर्ष 1988 में गरीब भक्तों को बिना किसी आर्थिक बोझ के ब्रज दर्शन कराने के उद्देश्य से इस यात्रा की शुरुआत की थी। उनके जाने के बाद भी उनका सेवा संकल्प कायम है और उसी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए श्रद्धालु यात्रा में शामिल होंगे।
रमेश बाबा की इस पहल का उद्देश्य था कि आर्थिक तंगी किसी भक्त की आस्था के आड़े न आए। यात्रा में भोजन और ठहरने की निशुल्क व्यवस्था की जाती है। इसके माध्यम से उन श्रद्धालुओं को भी ब्रज के प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन का अवसर मिलता है, जिनके लिए लंबी धार्मिक यात्रा का खर्च उठाना मुश्किल होता है। समय के साथ यह यात्रा सेवा, समर्पण और भक्ति की परंपरा बन गई है। पद्मश्री रमेश बाबा ने गरीब भक्तों के लिए ब्रज दर्शन का मार्ग खोला था। उनका संकल्प था कि आर्थिक तंगी के कारण कोई भी भक्त ब्रज दर्शन से वंचित न रहे। यह उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो लंबी धार्मिक यात्रा का खर्च नहीं उठा सकते। बाबा द्वारा शुरू की गई यह सेवा परंपरा उनके संकल्प को जीवित रखेगी।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
विज्ञापन
यात्रा का कार्यक्रम
ब्रज 84 कोस यात्रा शनिवार, 24 अक्तूबर को सुबह छह बजे मान मंदिर गोशाला, बरसाना से शुरू होगी। यह यात्रा 28 नवंबर को बरसाना में ही समाप्त होगी। इस दौरान श्रद्धालु मंदिरों, वनों, कुंडों और प्राचीन तीर्थस्थलों के दर्शन करेंगे। भजन-कीर्तन और सामूहिक साधना के बीच यह यात्रा ब्रज की धार्मिक संस्कृति से जुड़ने का अवसर देती है। इस बार यात्रा में रमेश बाबा की अनुपस्थिति श्रद्धालुओं को भावुक करेगी, लेकिन उनके द्वारा स्थापित परंपरा जारी रहेगी।
विज्ञापन
रमेश बाबा की इस पहल का उद्देश्य था कि आर्थिक तंगी किसी भक्त की आस्था के आड़े न आए। यात्रा में भोजन और ठहरने की निशुल्क व्यवस्था की जाती है। इसके माध्यम से उन श्रद्धालुओं को भी ब्रज के प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन का अवसर मिलता है, जिनके लिए लंबी धार्मिक यात्रा का खर्च उठाना मुश्किल होता है। समय के साथ यह यात्रा सेवा, समर्पण और भक्ति की परंपरा बन गई है। पद्मश्री रमेश बाबा ने गरीब भक्तों के लिए ब्रज दर्शन का मार्ग खोला था। उनका संकल्प था कि आर्थिक तंगी के कारण कोई भी भक्त ब्रज दर्शन से वंचित न रहे। यह उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो लंबी धार्मिक यात्रा का खर्च नहीं उठा सकते। बाबा द्वारा शुरू की गई यह सेवा परंपरा उनके संकल्प को जीवित रखेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
यात्रा का कार्यक्रम
ब्रज 84 कोस यात्रा शनिवार, 24 अक्तूबर को सुबह छह बजे मान मंदिर गोशाला, बरसाना से शुरू होगी। यह यात्रा 28 नवंबर को बरसाना में ही समाप्त होगी। इस दौरान श्रद्धालु मंदिरों, वनों, कुंडों और प्राचीन तीर्थस्थलों के दर्शन करेंगे। भजन-कीर्तन और सामूहिक साधना के बीच यह यात्रा ब्रज की धार्मिक संस्कृति से जुड़ने का अवसर देती है। इस बार यात्रा में रमेश बाबा की अनुपस्थिति श्रद्धालुओं को भावुक करेगी, लेकिन उनके द्वारा स्थापित परंपरा जारी रहेगी।