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ब्रज और वेस्ट में भाजपा के टिकट को ‘टेस्ट’
पुनीत शर्मा
Updated Thu, 11 Aug 2016 12:01 AM IST
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ब्रज क्षेत्र और वेस्ट यूपी की सीटों पर टिकट के लिए खड़ी हुई दावेदारों की फौज ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की भी टेंशन बढ़ा दी है। एक सीट से पांच-पांच दावेदार निकलकर आ रहे हैं। इनमें वह भी शामिल हैं जिन्होंने 2012 का इलेक्शन लड़ा था और बहुत कम अंतर से हारे थे। टिकट के लिए बढ़ी भीड़ को देखकर दावेदारों का टेस्ट शुरू हो गया है। पहले भाजपा की प्रांतीय समिति और फिर केंद्रीय समिति के समक्ष दावेदारों का बायोडाटा पहुंच रहा है। किसी प्रकार का अंतर्विरोध न पनपे इसके लिए लंबा-चौड़ा टेस्ट तय कर दिया गया है।
विधानसभा चुनाव-2017 के लिए सभी पार्टियां योजना बनाने लगी हैं। सपा और बसपा ने तो अधिकांश सीटों पर अपने प्रत्याशी भी तय कर दिए हैं। कई सीटों पर बदलाव भी किया जा रहा है लेकिन भाजपा ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। ऐसे में एक सीट से कई-कई दावेदार निकलकर आ रहे हैं। बाकायदा बोर्ड लगाकर वोट भी मांगने लगे हैं। हाईवे हो या फिर शहर के प्रमुख रास्ते विधानसभा की झलक वाले बोर्ड दिख ही जाएंगे।
ब्रज क्षेत्र में शामिल आगरा, मथुरा, एटा, कासगंज, फीरोजाबाद और मैनपुरी जनपद की हर सीट पर कई-कई लोग अपना टिकट पक्का मान रहे हैं। हालांकि भाजपा ने अभी कोई एलान नहीं किया है लेकिन दावेदारों ने अपने-अपने हिसाब से तैयारियां शुरू कर दी हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपदों में भी यही स्थिति है।
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अब भाजपा ने टिकट पर बढ़ती टेंशन को देख टेस्ट का रास्ता निकाला है। हर प्रत्याशी पहले प्रांतीय कार्यसमिति के समक्ष बायोडाटा लेकर पेश होगा। बाद में केंद्रीय कार्यसमिति के सामने परेड होगी। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने बताया कि जिताऊ को ही टिकट दिया जाएगा। जल्द ही टिकट फाइनल कर लिए जाएंगे।
भारी अंतर से हारने वालों को नहीं मिलेगा टिकट
2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से चुनाव लड़े वह 180 लोग भी टिकट के लिए दोबारा दावेदारी कर रहे हैं जो बहुत कम अंतर से हारे थे। किसी के हार का अंतर 1000 था तो किसी का उससे भी कम। जो लोग भारी अंतर से हारे थे उनको टिकट मिलना संभव नहीं है। प्रांतीय नेतृत्व ने तो भारी मतों से हारने वालों के नामों पर विचार करने से ही इंकार कर दिया।
इन बिंदुओं पर ली जाएगी रिपोर्ट
- संगठन में दावेदार की भूमिका
- कितने समय से पार्टी में हैं
- क्या कभी पहले चुनाव लड़ चुके हैं
- अगर पहले चुनाव लड़ा तो क्या स्थिति रही
- दावेदार की संबंधित विधानसभा में स्थिति
- उनकी जाति के वोटों का प्रतिशत
- कोई किसी प्रकार का मुकदमा तो नहीं
- कैसे जीतेंगे चुनाव, इस पर भी ली जाएगी रिपोर्ट
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विधानसभा चुनाव-2017 के लिए सभी पार्टियां योजना बनाने लगी हैं। सपा और बसपा ने तो अधिकांश सीटों पर अपने प्रत्याशी भी तय कर दिए हैं। कई सीटों पर बदलाव भी किया जा रहा है लेकिन भाजपा ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। ऐसे में एक सीट से कई-कई दावेदार निकलकर आ रहे हैं। बाकायदा बोर्ड लगाकर वोट भी मांगने लगे हैं। हाईवे हो या फिर शहर के प्रमुख रास्ते विधानसभा की झलक वाले बोर्ड दिख ही जाएंगे।
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ब्रज क्षेत्र में शामिल आगरा, मथुरा, एटा, कासगंज, फीरोजाबाद और मैनपुरी जनपद की हर सीट पर कई-कई लोग अपना टिकट पक्का मान रहे हैं। हालांकि भाजपा ने अभी कोई एलान नहीं किया है लेकिन दावेदारों ने अपने-अपने हिसाब से तैयारियां शुरू कर दी हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपदों में भी यही स्थिति है।
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अब भाजपा ने टिकट पर बढ़ती टेंशन को देख टेस्ट का रास्ता निकाला है। हर प्रत्याशी पहले प्रांतीय कार्यसमिति के समक्ष बायोडाटा लेकर पेश होगा। बाद में केंद्रीय कार्यसमिति के सामने परेड होगी। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने बताया कि जिताऊ को ही टिकट दिया जाएगा। जल्द ही टिकट फाइनल कर लिए जाएंगे।
भारी अंतर से हारने वालों को नहीं मिलेगा टिकट
2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से चुनाव लड़े वह 180 लोग भी टिकट के लिए दोबारा दावेदारी कर रहे हैं जो बहुत कम अंतर से हारे थे। किसी के हार का अंतर 1000 था तो किसी का उससे भी कम। जो लोग भारी अंतर से हारे थे उनको टिकट मिलना संभव नहीं है। प्रांतीय नेतृत्व ने तो भारी मतों से हारने वालों के नामों पर विचार करने से ही इंकार कर दिया।
इन बिंदुओं पर ली जाएगी रिपोर्ट
- संगठन में दावेदार की भूमिका
- कितने समय से पार्टी में हैं
- क्या कभी पहले चुनाव लड़ चुके हैं
- अगर पहले चुनाव लड़ा तो क्या स्थिति रही
- दावेदार की संबंधित विधानसभा में स्थिति
- उनकी जाति के वोटों का प्रतिशत
- कोई किसी प्रकार का मुकदमा तो नहीं
- कैसे जीतेंगे चुनाव, इस पर भी ली जाएगी रिपोर्ट