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घायलों को स्वीपर ने लगाए टांके, नहीं पहुंचे डॉक्टर
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 17 Oct 2016 12:11 AM IST
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घायलों के परिवारीजन
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मथुरा-गोवर्धन मार्ग पर हुए हादसे में घायल बोलेरो सवारों को महर्षि दयानंद जिला अस्पताल में स्वीपर ने टांके लगाए। इनके शरीर पर लगा खून भी साफ नहीं किया गया। इतने बड़े हादसे के बाद भी अस्पताल प्रशासन का कोई अफसर तो दूर, डॉक्टर भी घायलों को देखने नहीं पहुंचे।
हादसे में मारे गए पुष्पराज पाराशर के साढ़ू हरिओम ने बताया कि कि रात करीब डेढ़ बजे जब उनके घायल रिश्तेदारों को यहां लाया गया तो चिकित्सकों की बजाए स्वीपरों ने टांके लगाए। रातभर चिकित्सक की बाट जोहते रहे, पर सुबह तक कोई नहीं आया। उनका कहना है कि इस जिला अस्पताल से अच्छी व्यवस्थाएं तो मध्य प्रदेश में सीएचसी-पीएचसी पर हो जाती हैं।
घायल बसंती देवी के पति रामजीलाल का कहना है कि रात से सुबह हो गई, लेकिन अस्पताल की नर्स या वार्ड ब्वॉय ने मरीजों के शरीर से खून तक साफ नहीं किया है। आठ वर्षीय घायल मोहित को तो बेड भी नहीं मिला, वह फर्श पर लेटा हुआ था। यह हाल देखकर हादसे में घायलों के तीमारदार जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को कोस रहे थे। वह हर हाल में यहां से जाने के लिए तत्पर दिख रहे थे।
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सीएमएस डॉ. अमिताभ पांडेय का कहना है कि हादसे के घायलों के इलाज के लिए ऑन कॉल चिकित्सक बुलाए गए थे। कुछ देरी हो गई होगी, लेकिन चिकित्सकों ने पूरा इलाज किया। उन्होंने स्वीपर के टांके लगाने के आरोप को भी नकार दिया।
सात महीने पहले मुरैना के छह लोगों की हुई थी मौत
लापरवाही से अनियंत्रित दौड़ने वाले डग्गामार वाहन अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। करीब सात माह पूर्व होली के समय पर भी डग्गामार बस की टक्कर से बोलेरो सवार मुरैना, मध्य प्रदेश के छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी।
गत 22 मार्च को तड़के अड़ींग के निकट हुई वह घटना भी इतनी भीषण थी कि घायल श्रद्धालुओं को बोलेरो को काटकर बाहर निकालना पड़ा था। लोगों का कहना है कि यहां चलने वाले डग्गामार वाहनों को पुलिस का संरक्षण मिला हुआ है। इन वाहनों से पुलिस की महीनादारी भी बंधी हुई है। डग्गामार वाहनों की प्रतिस्पर्धा में यह वाहन अपना नियंत्रण भी खो देते हैं, जो कि भीषण हादसों का कारण भी बनते हैं।
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हादसे में मारे गए पुष्पराज पाराशर के साढ़ू हरिओम ने बताया कि कि रात करीब डेढ़ बजे जब उनके घायल रिश्तेदारों को यहां लाया गया तो चिकित्सकों की बजाए स्वीपरों ने टांके लगाए। रातभर चिकित्सक की बाट जोहते रहे, पर सुबह तक कोई नहीं आया। उनका कहना है कि इस जिला अस्पताल से अच्छी व्यवस्थाएं तो मध्य प्रदेश में सीएचसी-पीएचसी पर हो जाती हैं।
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घायल बसंती देवी के पति रामजीलाल का कहना है कि रात से सुबह हो गई, लेकिन अस्पताल की नर्स या वार्ड ब्वॉय ने मरीजों के शरीर से खून तक साफ नहीं किया है। आठ वर्षीय घायल मोहित को तो बेड भी नहीं मिला, वह फर्श पर लेटा हुआ था। यह हाल देखकर हादसे में घायलों के तीमारदार जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को कोस रहे थे। वह हर हाल में यहां से जाने के लिए तत्पर दिख रहे थे।
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सीएमएस डॉ. अमिताभ पांडेय का कहना है कि हादसे के घायलों के इलाज के लिए ऑन कॉल चिकित्सक बुलाए गए थे। कुछ देरी हो गई होगी, लेकिन चिकित्सकों ने पूरा इलाज किया। उन्होंने स्वीपर के टांके लगाने के आरोप को भी नकार दिया।
सात महीने पहले मुरैना के छह लोगों की हुई थी मौत
लापरवाही से अनियंत्रित दौड़ने वाले डग्गामार वाहन अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। करीब सात माह पूर्व होली के समय पर भी डग्गामार बस की टक्कर से बोलेरो सवार मुरैना, मध्य प्रदेश के छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी।
गत 22 मार्च को तड़के अड़ींग के निकट हुई वह घटना भी इतनी भीषण थी कि घायल श्रद्धालुओं को बोलेरो को काटकर बाहर निकालना पड़ा था। लोगों का कहना है कि यहां चलने वाले डग्गामार वाहनों को पुलिस का संरक्षण मिला हुआ है। इन वाहनों से पुलिस की महीनादारी भी बंधी हुई है। डग्गामार वाहनों की प्रतिस्पर्धा में यह वाहन अपना नियंत्रण भी खो देते हैं, जो कि भीषण हादसों का कारण भी बनते हैं।