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छेड़छाड़ के दोषी को तीन साल की सजा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Nov 2016 12:12 AM IST
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- 16 साल पुराने मामले में एडीजे-दो की अदालत ने सुनाया फैसला
- दोषी पर सात हजार का जुर्माना भी लगा, एससी एक्ट से किया बरी
महिला के साथ छेड़छाड़ के दोषी को तीन साल की सजा सुनाई गई है। 16 साल पुराने इस मामले में एडीजे-दो की अदालत ने सात हजार का जुर्माना भी लगाया है। वहीं एससी एक्ट में साक्ष्यों के अभाव में उसे बरी कर दिया गया है।
थाना हाईवे क्षेत्र केे गांव असगरपुर निवासी ठाकुर लक्ष्मीनारायण ने चार सितंबर 2001 को गांव की महिला से उसके घर में घुसकर छेड़छाड़ की थी। उस वक्त महिला घर पर अकेली थी। महिला ने पति को घटना बताई। बाद में पति जब शिकायत करने गया तो लक्ष्मीनारायण का महिला के पति से विवाद हो गया। आरोप लगा कि लक्ष्मीनारायण ने पीड़िता के पति के साथ मारपीट की जिसमें उसका एक दांत भी टूट गया। मामले में पीड़िता के पति हाईवे थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई और एससी एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज कराया। यह मामला एडीजे दो की अदालत में पहुंचा। न्यायाधीश जेपी सिंह ने दोनो पक्षों को सुना और आठ लोगों ने गवाही दी। मारपीट और छेड़छाड़ का आरोप सिद्ध हो गया लेकिन एससी एक्ट साबित नहीं हो सका। इस पर कोर्ट ने दोषी को तीन साल की सजा सुनाई। एसपीओ डीके मिश्रा और एडीजीसी गोविंद सिद्धराज ने सरकार की ओर से बहस की।
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- दोषी पर सात हजार का जुर्माना भी लगा, एससी एक्ट से किया बरी
महिला के साथ छेड़छाड़ के दोषी को तीन साल की सजा सुनाई गई है। 16 साल पुराने इस मामले में एडीजे-दो की अदालत ने सात हजार का जुर्माना भी लगाया है। वहीं एससी एक्ट में साक्ष्यों के अभाव में उसे बरी कर दिया गया है।
थाना हाईवे क्षेत्र केे गांव असगरपुर निवासी ठाकुर लक्ष्मीनारायण ने चार सितंबर 2001 को गांव की महिला से उसके घर में घुसकर छेड़छाड़ की थी। उस वक्त महिला घर पर अकेली थी। महिला ने पति को घटना बताई। बाद में पति जब शिकायत करने गया तो लक्ष्मीनारायण का महिला के पति से विवाद हो गया। आरोप लगा कि लक्ष्मीनारायण ने पीड़िता के पति के साथ मारपीट की जिसमें उसका एक दांत भी टूट गया। मामले में पीड़िता के पति हाईवे थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई और एससी एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज कराया। यह मामला एडीजे दो की अदालत में पहुंचा। न्यायाधीश जेपी सिंह ने दोनो पक्षों को सुना और आठ लोगों ने गवाही दी। मारपीट और छेड़छाड़ का आरोप सिद्ध हो गया लेकिन एससी एक्ट साबित नहीं हो सका। इस पर कोर्ट ने दोषी को तीन साल की सजा सुनाई। एसपीओ डीके मिश्रा और एडीजीसी गोविंद सिद्धराज ने सरकार की ओर से बहस की।
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