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सरकारी अस्पताल न आया काम , निजी खून से बची बंदी की जान

Fri, 14 Aug 2020 08:54 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2020 08:54 PM IST
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मथुरा। सरकारी अस्पताल की ब्लड बैंक ने जरूरत पड़ने पर जेल में निरुद्ध बंदी के लिए खून देने से मना कर दिया। जेल चिकित्सक ने प्रयास कर निजी रक्त कोष से से खून दिलाकर बंदी की जान बचा ली।
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मथुरा जिला कारागार में तीन वर्ष से घनश्याम नामक युवक नशीला पदार्थ रखने के आरोप में बंद है। कई दिन से उसकी सेहत सही नहीं थी। बुधवार को जेल चिकित्सक डॉ. उपेंद्रपाल सिंह सोलंकी उसे जिला अस्पताल लेकर गए। यहां चिकित्सकों ने उसके लिए खून की जरूरत बताई। बंदी के रक्त की जांच की गई तो उसका ग्रुप एबी-प्लस निकला। इस ग्रुप का रक्त देने में जिला अस्पताल की ब्लड बैंक ने हाथ खड़े कर दिए।
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मामला गंभीर होते देख चिकित्सक ने निजी ब्लड बैंक सद्भावना चेरिटेबल ब्लड बैंक से संपर्क किया और बंदी के लिए रक्त का इंतजाम कर लिया। तब जाकर बंदी की जान बच सकी। वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेंद्र कुमार मैत्रेय ने बताया कि सद्भावना चेरिटेबल ब्लड बैंक ने बंदी के लिए जो सहयोग किया है, उसके लिए उसके संचालकों को सम्मानित किया जाएगा।
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