{"_id":"64248ae273f0b4c3400b0f34","slug":"artisans-realizing-the-idols-of-the-great-saints-of-braj-mathura-news-c-29-1-mtr1002-51148-2023-03-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mathura News: ब्रज के महान संतों की मूर्तियों को साकार कर रहे शिल्पकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura News: ब्रज के महान संतों की मूर्तियों को साकार कर रहे शिल्पकार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मथुरा। राजकीय संग्रहालय में इन दिनों शिल्पकारों की अंगुलियां ब्रज के महान संतों की मूर्तियों को साकार रूप में जुटी हैं। दस दिवसीय मूर्तिकला शिविर में अपने-अपने क्षेत्र के ख्यातनाम कलाकार अपना हुनर प्रदर्शित कर रहे हैं। उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद् द्वारा यह शिविर मूर्तिकला परंपरा को सहेजने के लिए आयोजित किया गया है। इसमें ब्रज के महान संतों की मूर्तियों का निर्माण कराया जा रहा है। पांच अप्रैल तक मूर्तियों का निर्माण पूरा करना है। शिविर में 16 मुख्य कलाकार एवं 4 सहायक कलाकार लगातार काम में जुटे हैं। कलाकार प्रदेश के विभिन्न जनपदों प्रयागराज, आजमगढ़, लालगंज, लखनऊ, कानपुर, बांदा, जौनपुर, बाराबंकी, चित्रकूट सहित दिल्ली एवं ग्वालियर से भी आए हैं।
इन 16 संतों की तराशी जा रही मूर्तियां
शिविर में ब्रज के जिन महान विरक्त संतों की मूर्तियों का निर्माण किया जा रहा है, उनमें स्वामी हरिदास, स्वामी देवरहा बाबा, कृष्णभक्त मीराबाई, चैतन्य महाप्रभु, हरिराम व्यास, रामानुजाचार्य, रामानंदाचार्य, रघुनाथ भट्ट गोस्वामी, नाभादास, सनातन गोस्वामी, प्रभुपाद्जी, हरिव्यास देवाचार्य, गोपाल भट्ट, जीव गोस्वामी, माधवाचार्य एवं सम गोस्वामी शामिल हैं।
बॉम्बे क्ले -पीओपी आदि का हो रहा प्रयोग
मूर्तियों को बनाने के लिए बॉम्बे क्ले का प्रयोग किया जा रहा है। यह मिट्टी जयपुर में पत्थरों को पीसकर बनाई जाती है। फिलहाल इसे दिल्ली से लाया जा रहा है। मूर्तियों के निर्माण की प्रारंभिक अवस्था में इस मिट्टी का प्रयोग होगा। प्रथम चरण के बाद इसे पीओपी के सांचे में ढाला जाएगा। जिसके बाद इस पर फाइबर-मार्बल डस्ट की 10 से 12 परतें चढ़ाईं जाएंगी। फिर अंतिम रूप देने के लिए घिसाई और रंग किया जाएगा।
विज्ञापन
प्रोफेशनल हैं सभी कलाकार
शिविर संयोजक अजय कुमार ने बताया कि शिविर में आए सभी कलाकार पूरी तरह प्रोफेशनल हैं। इनमें से एक भी परंपरागत कलाकार नहीं है। सभी फाइन आर्ट्स में स्नातक डिग्री उत्तीर्ण हैं। कई कलाकारों के पास तो मास्टर्स डिग्री भी है। सभी लोग न सिर्फ मिट्टी से बल्कि धातु, पीओपी, सीमेंट, किसी भी तरह के कबाड़ अथवा अनुपयोगी सामान व फाइबर आदि से भी मूर्तियां बना लेते हैं।
मेरा सपना आरंभ से ही मूर्ति कलाकार बनने का था लेकिन अलीगढ़ के साथ-साथ आसपास के जनपदों में इससे संबंधित प्रशिक्षण की कोई सुविधा नहीं थी। कानपुर सहित अन्य विश्वविद्यालय से पहले स्नातक और फिर मास्टर्स डिग्री हासिल की। यहां स्वामी हरिदास की मूर्ति बना रहा हूं।
- अजय, निवासी अलीगढ़
मैं करीब 12 वर्षों से मूर्तियां बनाने का काम कर रहा हुं। यहां से पहले लखनऊ, चंडीगढ़, कानपुर, गोवा, जयपुर सहित कई अन्य स्थानों पर मूर्तियों का निर्माण कर चुका हूं, लेकिन ब्रज में पहली बार आया हूं। हैं। यहां आकर उन्हें काफी अच्छा लगा है।
- सतीश कुमार, बाराबंकी
- मैनें मूर्तिकला से संबंधित प्रोफेशनल प्रशिक्षण लिया है। शुरुआत से ही मूर्तियां बनाने में दिलचस्पी रही है। सौभाग्य है कि ब्रज के संतों की मूर्तियां बनाने का मौका मिला।
- सनी केसरी, प्रयागराज
-मैं पिछले कई वर्षां से मूर्तियों का निर्माण कर रहा हूं। अब तक अलग-अलग तरह की वह दर्जनों मूर्तियों का निर्माण कर चुका हूं। यहां ब्रज के संतों की मूर्तियां बनाने का अवसर मिला है।
विनय कुमार साहू, चित्रकूट
- भगवान श्रीकृष्ण के महान भक्त चैतन्य महाप्रभु की मूर्ति बनाते हुए अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही है। आकर काफी अच्छा लग रहा है। मैं पिछले करीब 15 वर्ष से मूर्ति निर्माण कार्य में जुटा हूं।
राकेश कश्यप, कानपुर
विज्ञापन
इन 16 संतों की तराशी जा रही मूर्तियां
शिविर में ब्रज के जिन महान विरक्त संतों की मूर्तियों का निर्माण किया जा रहा है, उनमें स्वामी हरिदास, स्वामी देवरहा बाबा, कृष्णभक्त मीराबाई, चैतन्य महाप्रभु, हरिराम व्यास, रामानुजाचार्य, रामानंदाचार्य, रघुनाथ भट्ट गोस्वामी, नाभादास, सनातन गोस्वामी, प्रभुपाद्जी, हरिव्यास देवाचार्य, गोपाल भट्ट, जीव गोस्वामी, माधवाचार्य एवं सम गोस्वामी शामिल हैं।
विज्ञापन
बॉम्बे क्ले -पीओपी आदि का हो रहा प्रयोग
मूर्तियों को बनाने के लिए बॉम्बे क्ले का प्रयोग किया जा रहा है। यह मिट्टी जयपुर में पत्थरों को पीसकर बनाई जाती है। फिलहाल इसे दिल्ली से लाया जा रहा है। मूर्तियों के निर्माण की प्रारंभिक अवस्था में इस मिट्टी का प्रयोग होगा। प्रथम चरण के बाद इसे पीओपी के सांचे में ढाला जाएगा। जिसके बाद इस पर फाइबर-मार्बल डस्ट की 10 से 12 परतें चढ़ाईं जाएंगी। फिर अंतिम रूप देने के लिए घिसाई और रंग किया जाएगा।
विज्ञापन
प्रोफेशनल हैं सभी कलाकार
शिविर संयोजक अजय कुमार ने बताया कि शिविर में आए सभी कलाकार पूरी तरह प्रोफेशनल हैं। इनमें से एक भी परंपरागत कलाकार नहीं है। सभी फाइन आर्ट्स में स्नातक डिग्री उत्तीर्ण हैं। कई कलाकारों के पास तो मास्टर्स डिग्री भी है। सभी लोग न सिर्फ मिट्टी से बल्कि धातु, पीओपी, सीमेंट, किसी भी तरह के कबाड़ अथवा अनुपयोगी सामान व फाइबर आदि से भी मूर्तियां बना लेते हैं।
मेरा सपना आरंभ से ही मूर्ति कलाकार बनने का था लेकिन अलीगढ़ के साथ-साथ आसपास के जनपदों में इससे संबंधित प्रशिक्षण की कोई सुविधा नहीं थी। कानपुर सहित अन्य विश्वविद्यालय से पहले स्नातक और फिर मास्टर्स डिग्री हासिल की। यहां स्वामी हरिदास की मूर्ति बना रहा हूं।
- अजय, निवासी अलीगढ़
मैं करीब 12 वर्षों से मूर्तियां बनाने का काम कर रहा हुं। यहां से पहले लखनऊ, चंडीगढ़, कानपुर, गोवा, जयपुर सहित कई अन्य स्थानों पर मूर्तियों का निर्माण कर चुका हूं, लेकिन ब्रज में पहली बार आया हूं। हैं। यहां आकर उन्हें काफी अच्छा लगा है।
- सतीश कुमार, बाराबंकी
- मैनें मूर्तिकला से संबंधित प्रोफेशनल प्रशिक्षण लिया है। शुरुआत से ही मूर्तियां बनाने में दिलचस्पी रही है। सौभाग्य है कि ब्रज के संतों की मूर्तियां बनाने का मौका मिला।
- सनी केसरी, प्रयागराज
-मैं पिछले कई वर्षां से मूर्तियों का निर्माण कर रहा हूं। अब तक अलग-अलग तरह की वह दर्जनों मूर्तियों का निर्माण कर चुका हूं। यहां ब्रज के संतों की मूर्तियां बनाने का अवसर मिला है।
विनय कुमार साहू, चित्रकूट
- भगवान श्रीकृष्ण के महान भक्त चैतन्य महाप्रभु की मूर्ति बनाते हुए अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही है। आकर काफी अच्छा लग रहा है। मैं पिछले करीब 15 वर्ष से मूर्ति निर्माण कार्य में जुटा हूं।
राकेश कश्यप, कानपुर