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Mathura News: अधिक मास आज से शुरू, 84 कोस परिक्रमा में उमड़ने लगे श्रद्धालु
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मथुरा। अधिक मास के साथ ही आज से ब्रज 84-कोस की परिक्रमा शुरू हो गई है। राधे-राधे जयकारों से के साथ शनिवार रात से ही श्रद्धालु परिक्रमा लगाने के लिए श्रद्धालु उमड़ने लगे। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के उमड़ने की उम्मीद है। इधर, जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार ने परिक्रमा मार्ग तथा प्रमुख मंदिरों की व्यवस्थाएं परखीं और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के निर्देश दिए। परिक्रमा मार्ग को छह जोन व 17 सेक्टरों में बांटा है।
ब्रजमंडल की ऐतिहासिक 84 कोस परिक्रमा भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा रानी की लीला स्थली की एक संपूर्ण गोलाकार यात्रा है। यह केवल मथुरा जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार राजस्थान (भरतपुर) और हरियाणा (पलवल/होडल) के कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों तक है। यह यात्रा लगभग 252 से 268 किलोमीटर लंबी है, जिसमें 12 मुख्य वन, 24 उपवन, 20 से अधिक प्रमुख कुंड और लगभग 1300 गांव आते हैं।
यह परिक्रमा विश्राम घाट से यमुना पूजन के बाद शुरू होती है। इसके बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि, द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन होते हैं। इसके बाद यात्रा मधुवन, तालवन और कुमुदवन की ओर बढ़ती है। इसके बाद गोवर्धन, राजस्थान में डीग और काम्यवन, बरसाना, नंदगांव, कोसीकलां, शेरगढ़, चीरघाट, भांडीरवन, बेलवन समेत विभिन्न स्थान वृंदावन, गोकुल होते हुए विश्राम घाट पर ही परिक्रमा संपन्न होती है। शनिवार को जिलाधिकारी और एसएसपी ने वृंदावन समेत कई क्षेत्रों में परिक्रमा मार्ग का निरीक्षण किया। साथ ही कहा कि परिक्रमा मार्ग पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई है। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों और प्रमुख मंदिरों के आसपास विशेष निगरानी रखी जाएगी। आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल भी तैयार रखे गए हैं। यातायात प्रबंधन के लिए भी विशेष योजना बनाई गई है ताकि परिक्रमा मार्ग पर जाम की स्थिति न बने।
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प्रत्येक जोन पर सीओ व एसडीएम को दी जिम्मेदारी
अधिकारियों के अनुसार, जिले में परिक्रमा मार्ग को छह जोन और 17 सेक्टरों में बांटा है। प्रत्येक जोन पर एक उप जिलाधिकारी और क्षेत्राधिकारियों को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। सेक्टरों की निगरानी के लिए नायब तहसीलदार, तहसीलदार और थाना प्रभारियों को जिम्मेदारी गई है। साथ ही परिक्रमा मार्ग के विभिन्न स्थानों पर पुलिस बल भी तैनात किया गया है। तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए परिक्रमा मार्ग पर पेयजल, अस्थायी शौचालय और चिकित्सा शिविरों की व्यवस्था की गई है। गर्मी को देखते हुए छाया और विश्राम स्थलों का भी प्रबंध किया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगाई गई हैं। सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न होने दें और सभी आवश्यक सेवाएं सुचारू रूप से प्रदान करें।
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ब्रजमंडल की ऐतिहासिक 84 कोस परिक्रमा भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा रानी की लीला स्थली की एक संपूर्ण गोलाकार यात्रा है। यह केवल मथुरा जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार राजस्थान (भरतपुर) और हरियाणा (पलवल/होडल) के कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों तक है। यह यात्रा लगभग 252 से 268 किलोमीटर लंबी है, जिसमें 12 मुख्य वन, 24 उपवन, 20 से अधिक प्रमुख कुंड और लगभग 1300 गांव आते हैं।
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यह परिक्रमा विश्राम घाट से यमुना पूजन के बाद शुरू होती है। इसके बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि, द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन होते हैं। इसके बाद यात्रा मधुवन, तालवन और कुमुदवन की ओर बढ़ती है। इसके बाद गोवर्धन, राजस्थान में डीग और काम्यवन, बरसाना, नंदगांव, कोसीकलां, शेरगढ़, चीरघाट, भांडीरवन, बेलवन समेत विभिन्न स्थान वृंदावन, गोकुल होते हुए विश्राम घाट पर ही परिक्रमा संपन्न होती है। शनिवार को जिलाधिकारी और एसएसपी ने वृंदावन समेत कई क्षेत्रों में परिक्रमा मार्ग का निरीक्षण किया। साथ ही कहा कि परिक्रमा मार्ग पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई है। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों और प्रमुख मंदिरों के आसपास विशेष निगरानी रखी जाएगी। आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल भी तैयार रखे गए हैं। यातायात प्रबंधन के लिए भी विशेष योजना बनाई गई है ताकि परिक्रमा मार्ग पर जाम की स्थिति न बने।
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प्रत्येक जोन पर सीओ व एसडीएम को दी जिम्मेदारी
अधिकारियों के अनुसार, जिले में परिक्रमा मार्ग को छह जोन और 17 सेक्टरों में बांटा है। प्रत्येक जोन पर एक उप जिलाधिकारी और क्षेत्राधिकारियों को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। सेक्टरों की निगरानी के लिए नायब तहसीलदार, तहसीलदार और थाना प्रभारियों को जिम्मेदारी गई है। साथ ही परिक्रमा मार्ग के विभिन्न स्थानों पर पुलिस बल भी तैनात किया गया है। तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए परिक्रमा मार्ग पर पेयजल, अस्थायी शौचालय और चिकित्सा शिविरों की व्यवस्था की गई है। गर्मी को देखते हुए छाया और विश्राम स्थलों का भी प्रबंध किया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगाई गई हैं। सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न होने दें और सभी आवश्यक सेवाएं सुचारू रूप से प्रदान करें।