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दो एडीओ और 10 सचिवों पर कार्रवाई की तलवार
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मथुरा। जिले की 77 ग्राम पंचायतों में गलत तरीके से जारी की गई 48 करोड़ की परफोर्मेंस ग्रांट के मामले में मथुरा और गोवर्धन ब्लाक के 10 पंचायत सचिव व दो एडीओ पंचायत पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। इससे पंचायती राज विभाग में खलबली मची हुई है।
सन 2016 में ग्राम पंचायतों को परफार्मेंस ग्रांट देने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था नहीं थी। सभी कार्यवाही मैनुअल होती थी। इसी प्रक्रिया में मथुरा से तत्कालीन जिला पंचायत राज अधिकारी ने गोवर्धन व मथुरा ब्लाक की 77 ग्राम पंचायतों के सचिवों व एडीओ पंचायत की संस्तुति पर परफार्मेंस ग्रांट देने के लिए आवेदन शासन को भेजे थे। इसमें जुलाई माह तक दो किश्तों में 48 करोड़ रुपये की राशि जारी हुई थी।
कुछ ग्राम प्रधानों ने इसमें से विकास कार्य कराना भी शुरू कर दिया। तभी इस मामले को लेकर कुछ प्रधानों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी और पंचायतों को दिए गए रुपये के आवंटन को गलत बताया। इस मामले में पंचायती राज निदेशालय ने विजिलेंस से जांच कराई। विजिलेंस टीम ने 2017 में मथुरा से इन पंचायतों की पत्रावली जुटाई और जांच की।
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इसमें बड़े स्तर पर पंचायतों को परफॉर्मेंस ग्रांट के लिए अपात्र पाया गया। आनन फानन में पंचायतों को मिली रकम खर्च करने पर रोक लगा दी गई। अब मामले में अफसरों, पंचायत सचिव व एडीओ पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। सन 2016 व 2017 में मथुरा के तत्कालीन डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद यादव पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
साथ ही मथुरा व गोवर्धन ब्लाक में तत्कालीन दो एडीओ व 10 से अधिक पंचायत सचिवों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। डीपीआरओ डॉ. प्रीतम सिंह ने बताया कि पूरा मामला उनसे पहले का है। इन ग्राम पंचायतों की जांच व पत्रावली उनसे पहले की पूरी कर ली गई थी।
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सन 2016 में ग्राम पंचायतों को परफार्मेंस ग्रांट देने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था नहीं थी। सभी कार्यवाही मैनुअल होती थी। इसी प्रक्रिया में मथुरा से तत्कालीन जिला पंचायत राज अधिकारी ने गोवर्धन व मथुरा ब्लाक की 77 ग्राम पंचायतों के सचिवों व एडीओ पंचायत की संस्तुति पर परफार्मेंस ग्रांट देने के लिए आवेदन शासन को भेजे थे। इसमें जुलाई माह तक दो किश्तों में 48 करोड़ रुपये की राशि जारी हुई थी।
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कुछ ग्राम प्रधानों ने इसमें से विकास कार्य कराना भी शुरू कर दिया। तभी इस मामले को लेकर कुछ प्रधानों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी और पंचायतों को दिए गए रुपये के आवंटन को गलत बताया। इस मामले में पंचायती राज निदेशालय ने विजिलेंस से जांच कराई। विजिलेंस टीम ने 2017 में मथुरा से इन पंचायतों की पत्रावली जुटाई और जांच की।
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इसमें बड़े स्तर पर पंचायतों को परफॉर्मेंस ग्रांट के लिए अपात्र पाया गया। आनन फानन में पंचायतों को मिली रकम खर्च करने पर रोक लगा दी गई। अब मामले में अफसरों, पंचायत सचिव व एडीओ पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। सन 2016 व 2017 में मथुरा के तत्कालीन डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद यादव पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
साथ ही मथुरा व गोवर्धन ब्लाक में तत्कालीन दो एडीओ व 10 से अधिक पंचायत सचिवों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। डीपीआरओ डॉ. प्रीतम सिंह ने बताया कि पूरा मामला उनसे पहले का है। इन ग्राम पंचायतों की जांच व पत्रावली उनसे पहले की पूरी कर ली गई थी।