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उपन्यासों में भारतीय संस्कृति झलकती है : अरुणेश
कुशीनगर
Updated Tue, 08 Mar 2016 12:05 AM IST
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अज्ञेय सभागार में 125वीं जयंती पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
- फोटो : अमर उजाला
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कसया। कुशीनगर स्थित राजकीय बौद्ध संग्रहालय के अज्ञेय सभागार में सोमवार को अज्ञेय की 125वीं जयंती पर उनके उपन्यासों के पुनरावलोकन विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई।
इस कार्यक्रम में कई साहित्यकार मौजूद थे। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र की शुरूआत मुख्य अतिथि विश्वनाथ तिवारी और अध्यक्षता कर रहे रामदेव शुक्ल की ओर से मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप जलाकर कर किया गया। मुख्य अतिथि विश्वनाथ तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि अज्ञेय छायावादोत्तर काल के अग्रदूत साहित्यकार थे।
उन्होंने अज्ञेय के उपन्यास शेखर एक जीवनी को मानवीय स्वतंत्रता के लिए खोज बताया। इसमें शक्ति और बुद्धि का अच्छा तालमेल होना भी दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि अज्ञेय प्रखर बुद्धि वाल चिंतन लेकर साहित्य जगत में आए थे।
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इस दौरान उन्होंने शेखर एक जीवनी उपन्यास से जुड़ी पंक्तियां भी सुनाईं। कहा कि इस उपन्यास के माध्यम से अज्ञेय ने समाज के अनछुए पहलुओं को साहित्य सृजनात्मक शक्ति से छूने का काम किया था। इस सत्र में विषय प्रस्ताविकी डॉ. अरुणेश नीरन ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि अज्ञेय के उपन्यासों में भारतीय संस्कृति की झलक स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
शेखर एक जीवनी भी इससे अछूता नहीं है। इसके अलावा इस सत्र में संगोष्ठी के संचालक एवं आयोजक महेश्वर मिश्र, डॉ. गणेश प्रसाद शुक्ल सहित कई साहित्यकारों ने अज्ञेय के उपन्यास शेखर एक जीवनी पर प्रकाश डाला।
इसके पूर्व अज्ञेय से जुडे़ विद्याश्री न्यास की ओर से मुख्य अतिथि का माल्यार्पण और अंग वस्त्र भेंट कर स्वागत किया गया। संगोष्ठी के पहले सत्र में अज्ञेय के उपन्यास शेखर एक जीवनी और नदी के दीप पर प्रमोद कुमार सिंह, आनंद प्रकाश, गिरिराज किशोर और अपूर्वानंद आदि साहित्यकारों ने अपने विचार व्यक्त किए। उधर संगोष्ठी के दूसरे सत्र में अज्ञेय के उपन्यास अपने-अपने अजनबी पर नंद किशोर आचार्य, अवधेश प्रधान और उपन्यास कर्म पर ओम थानवी और चितरंजन मिश्र ने अपने व्यक्तव्य दिए।
दोनों सत्र में मंच का संचालन उदय प्रकाश ने किया। इसके अलावा शाम को अनंत मिश्र की अध्यक्षता में काव्य संध्या का पाठ भी किया गया। जिसमें अरूणेश नीरन, अवधेश प्रधान, गिरिधर करूण, नंद किशोर आचार्य, विश्वनाथ प्रसाद तिवारी सहित कई अन्य ने साहित्यकारों ने भाग लिया। इस मौके पर सभागार में साहित्य जगत से जुडे़ कई साहित्य प्रेमी और बुद्ध पीजी कॉलेज के शिक्षकगण मौजूद रहे।
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इस कार्यक्रम में कई साहित्यकार मौजूद थे। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र की शुरूआत मुख्य अतिथि विश्वनाथ तिवारी और अध्यक्षता कर रहे रामदेव शुक्ल की ओर से मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप जलाकर कर किया गया। मुख्य अतिथि विश्वनाथ तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि अज्ञेय छायावादोत्तर काल के अग्रदूत साहित्यकार थे।
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उन्होंने अज्ञेय के उपन्यास शेखर एक जीवनी को मानवीय स्वतंत्रता के लिए खोज बताया। इसमें शक्ति और बुद्धि का अच्छा तालमेल होना भी दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि अज्ञेय प्रखर बुद्धि वाल चिंतन लेकर साहित्य जगत में आए थे।
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इस दौरान उन्होंने शेखर एक जीवनी उपन्यास से जुड़ी पंक्तियां भी सुनाईं। कहा कि इस उपन्यास के माध्यम से अज्ञेय ने समाज के अनछुए पहलुओं को साहित्य सृजनात्मक शक्ति से छूने का काम किया था। इस सत्र में विषय प्रस्ताविकी डॉ. अरुणेश नीरन ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि अज्ञेय के उपन्यासों में भारतीय संस्कृति की झलक स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
शेखर एक जीवनी भी इससे अछूता नहीं है। इसके अलावा इस सत्र में संगोष्ठी के संचालक एवं आयोजक महेश्वर मिश्र, डॉ. गणेश प्रसाद शुक्ल सहित कई साहित्यकारों ने अज्ञेय के उपन्यास शेखर एक जीवनी पर प्रकाश डाला।
इसके पूर्व अज्ञेय से जुडे़ विद्याश्री न्यास की ओर से मुख्य अतिथि का माल्यार्पण और अंग वस्त्र भेंट कर स्वागत किया गया। संगोष्ठी के पहले सत्र में अज्ञेय के उपन्यास शेखर एक जीवनी और नदी के दीप पर प्रमोद कुमार सिंह, आनंद प्रकाश, गिरिराज किशोर और अपूर्वानंद आदि साहित्यकारों ने अपने विचार व्यक्त किए। उधर संगोष्ठी के दूसरे सत्र में अज्ञेय के उपन्यास अपने-अपने अजनबी पर नंद किशोर आचार्य, अवधेश प्रधान और उपन्यास कर्म पर ओम थानवी और चितरंजन मिश्र ने अपने व्यक्तव्य दिए।
दोनों सत्र में मंच का संचालन उदय प्रकाश ने किया। इसके अलावा शाम को अनंत मिश्र की अध्यक्षता में काव्य संध्या का पाठ भी किया गया। जिसमें अरूणेश नीरन, अवधेश प्रधान, गिरिधर करूण, नंद किशोर आचार्य, विश्वनाथ प्रसाद तिवारी सहित कई अन्य ने साहित्यकारों ने भाग लिया। इस मौके पर सभागार में साहित्य जगत से जुडे़ कई साहित्य प्रेमी और बुद्ध पीजी कॉलेज के शिक्षकगण मौजूद रहे।