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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kasganj News ›   Martyr Mahavir Singh Rathore was a passionate freedom fighter; he rallied support for Mahatma Gandhi by organizing a group of children.

Kasganj News: आजादी के दीवाने थे शहीद महावीर सिंह राठौर, बच्चों की टोली बनाकर किया था महात्मा गांधी का समर्थन

Tue, 11 Aug 2026 11:07 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 11 Aug 2026 11:07 PM IST
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Martyr Mahavir Singh Rathore was a passionate freedom fighter; he rallied support for Mahatma Gandhi by organizing a group of children.
फोटो33महावीर सिंह राठौर।
कासगंज। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में जिले के सपूतों का स्वर्णिम योगदान रहा है। पटियाली तहसील क्षेत्र के शाहपुर टहला गांव में जन्मे अमर शहीद महावीर सिंह राठौर का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। बालपन से ही देश के लिए कुछ कर गुजरने की उनकी इच्छा ने उन्हें महान बना दिया। उन्होंने शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के साथ मिलकर भारतीय क्रांति के इतिहास में कई प्रेरणादायक अध्याय जोड़े।
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महावीर सिंह किशोरावस्था से ही स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी थी। उन्होंने बच्चों की टोलियां बनाकर अमन सभा के दौरान ब्रिटिश अफसरों के सामने अंग्रेजी हुकूमत के विरोध में और महात्मा गांधी के समर्थन में जबरदस्त नारेबाजी की थी। इस घटना के बाद ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें आधिकारिक रूप से विद्रोही घोषित कर दिया था।
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सन् 1904 में जन्मे महावीर सिंह राठौर की शहादत आज भी देश के लिए प्रेरणा है। उनकी स्मृति में उनके पैतृक गांव शाहपुर टहला, पटियाली और अंडमान की सेल्यूलर जेल में उनकी प्रतिमाएं स्थापित हैं। उनके वंशज वर्तमान में राजस्थान में रहते हैं, जहां उनकी याद में बड़े आयोजन भी किए जाते हैं।
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कानपुर में हुई चंद्रशेखर आजाद से मुलाकात
इंटरमीडिएट की शिक्षा पूरी करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए कानपुर के डीएवी कॉलेज पहुंचे। यहीं उनकी मुलाकात महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद से हुई। इसके बाद वह ''हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन'' से जुड़ गए। इसी दौरान उनकी भेंट शहीद भगत सिंह से हुई और देश की आजादी के लिए क्रांतिकारियों का कारवां तेजी से आगे बढ़ने लगा।
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भगत सिंह का सहयोग करने पर मिला आजीवन कारावास
वर्ष 1929 में दिल्ली असेंबली में बम फेंकने और ब्रिटिश अधिकारी सांडर्स हत्याकांड जैसी ऐतिहासिक घटनाओं में महावीर सिंह की अहम भूमिका रही। इन मामलों में भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, बटुकेश्वर दत्त और महावीर सिंह को गिरफ्तार किया गया। लाहौर में चली लंबी मुकदमे की कार्रवाई के बाद उन्हें भगत सिंह का सहयोग करने के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

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भूख हड़ताल तुड़वाने के लिए जबरन पिलाया गया दूध
सजा के दौरान उन्हें पंजाब और तमिलनाडु की जेलों के बाद साल 1933 में अंडमान की सेल्यूलर जेल भेज दिया गया। वहां अन्य क्रांतिकारियों के साथ उन्होंने जेल की अमानवीय व्यवस्था के खिलाफ ऐतिहासिक भूख हड़ताल की।
अंग्रेजों ने जबरन उनके मुंह में दूध डालकर हड़ताल तुड़वाने की कोशिश की, जिससे दूध उनके फेफड़ों में चला गया और उनकी तबीयत बिगड़ गई। इस तरह मात्र 29 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। अंग्रेजों ने क्रूरता की हदें पार करते हुए उनके पार्थिव शरीर को पत्थरों से बांधकर समुद्र में प्रवाहित कर दिया था।
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