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ट्रायल हुआ पर ट्रेनों का संचालन अभी दूर
Kasganj
Updated Mon, 27 Oct 2014 05:30 AM IST
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कासगंज। कासगंज-बरेली बड़ी रेल लाइन के आमान परिवर्तन के कार्य में ट्रायल के बाद भी कई रोड़े अटके हैं। रेल संचालन में कार्यों में लेटलतीफी यात्रियों पर भारी पड़ रही है। बरेली तक रेलवे संचालन ठप रहने के कारण सड़क यातायात पर यात्रियों का दबाव है। इससेयात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
गौरतलब हो कि सितंबर माह में रेलवे ने कासगंज से रामगंगा तक इंजन का ट्रायल किया था। अक्तूबर माह में संरक्षा निरीक्षण होने का दावा किया था, लेकिन अब यह संरक्षा निरीक्षण दिसंबर माह के लिए टलता नजर आ रहा है, क्योंकि अभी रेल संचालन शुरू होने में कई रोड़े है। जंक्शन पर प्लेटफार्म निर्माण कार्य कछुआ गति से चल रहा है। रेल लाइन पर पैकिंग का कार्य अधूरा है। इसके अलावा रेल पटरी पर गिट्टी डालने का कार्य भी अभी तक नहीं हुआ है, जबकि दावों के मुताबिक यह सारे कार्य अब तक पूरे हो जाने चाहिए थे, लेकिन ये अधूरे ही पड़े हैं। यात्री लगातार रेल संचालन शुरू करने के लिए दबाव बना रहे हैं।
रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी राजेंद्र सिंह का कहना है कि रेलवे समय से कार्य पूरा कर रहा है। जो कार्य अधूरे हैं, उन्हें युद्ध स्तर पर पूरा किया जा रहा है। बजट की भी कोई समस्या नहीं है। दिसंबर तक संरक्षा निरीक्षण हो जाएगा।
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इस रूट पर वाहनों का जबरदस्त दबाव
कासगंज (ब्यूरो)। कासगंज-बरेली मार्ग पर रेल यातायात बंद होने के कारण सड़क पर वाहनों का काफी दबाव है। परिवहन विभाग भी इस मार्ग पर अतिरिक्त बसों की व्यवस्था नहीं कर सका है, जिससे यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वाहनों के दबाव के कारण जगह-जगह जाम के हालात रहते है। नगरीय क्षेत्र में भी जाम के कारण यातायात की समस्या बनी रहती है। रविवार को पूरे दिन नदरई गेट पुरानी चुंगी के रेलवे पुल के नीचे जाम सा लगा रहा।
समय हो रहा ज्यादा खर्च
कासगंज से बदायूं जा रहे यात्री विवेक कुमार का कहना था कि रेल संचालन बंद होने के कारण बस से सफर करने में काफी समय लगता है। पहले तो समय से बस नहीं मिलती और जब बस मिल भी जाए जगह-जगह जाम में कितना समय लग जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। रेल के मुकाबले तीन गुना अधिक खर्च करना पड़ता है। नमकीन के कारोबारी सचिन कुमार ने बताया कि कारोबार के सिलसिले में आए दिन बरेली आना जाना होता है। पहले ट्रेन से कम समय में यात्रा हो जाती थी अब बस में धक्के खाने पड़ते हैं। बस में बैठने को जगह नहीं मिलती। खर्चा भी अधिक करना पड़ता है। उन्हेांने रेल संचालन अतिशीघ्र शुरू किए जाने की मांग की।
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गौरतलब हो कि सितंबर माह में रेलवे ने कासगंज से रामगंगा तक इंजन का ट्रायल किया था। अक्तूबर माह में संरक्षा निरीक्षण होने का दावा किया था, लेकिन अब यह संरक्षा निरीक्षण दिसंबर माह के लिए टलता नजर आ रहा है, क्योंकि अभी रेल संचालन शुरू होने में कई रोड़े है। जंक्शन पर प्लेटफार्म निर्माण कार्य कछुआ गति से चल रहा है। रेल लाइन पर पैकिंग का कार्य अधूरा है। इसके अलावा रेल पटरी पर गिट्टी डालने का कार्य भी अभी तक नहीं हुआ है, जबकि दावों के मुताबिक यह सारे कार्य अब तक पूरे हो जाने चाहिए थे, लेकिन ये अधूरे ही पड़े हैं। यात्री लगातार रेल संचालन शुरू करने के लिए दबाव बना रहे हैं।
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रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी राजेंद्र सिंह का कहना है कि रेलवे समय से कार्य पूरा कर रहा है। जो कार्य अधूरे हैं, उन्हें युद्ध स्तर पर पूरा किया जा रहा है। बजट की भी कोई समस्या नहीं है। दिसंबर तक संरक्षा निरीक्षण हो जाएगा।
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इस रूट पर वाहनों का जबरदस्त दबाव
कासगंज (ब्यूरो)। कासगंज-बरेली मार्ग पर रेल यातायात बंद होने के कारण सड़क पर वाहनों का काफी दबाव है। परिवहन विभाग भी इस मार्ग पर अतिरिक्त बसों की व्यवस्था नहीं कर सका है, जिससे यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वाहनों के दबाव के कारण जगह-जगह जाम के हालात रहते है। नगरीय क्षेत्र में भी जाम के कारण यातायात की समस्या बनी रहती है। रविवार को पूरे दिन नदरई गेट पुरानी चुंगी के रेलवे पुल के नीचे जाम सा लगा रहा।
समय हो रहा ज्यादा खर्च
कासगंज से बदायूं जा रहे यात्री विवेक कुमार का कहना था कि रेल संचालन बंद होने के कारण बस से सफर करने में काफी समय लगता है। पहले तो समय से बस नहीं मिलती और जब बस मिल भी जाए जगह-जगह जाम में कितना समय लग जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। रेल के मुकाबले तीन गुना अधिक खर्च करना पड़ता है। नमकीन के कारोबारी सचिन कुमार ने बताया कि कारोबार के सिलसिले में आए दिन बरेली आना जाना होता है। पहले ट्रेन से कम समय में यात्रा हो जाती थी अब बस में धक्के खाने पड़ते हैं। बस में बैठने को जगह नहीं मिलती। खर्चा भी अधिक करना पड़ता है। उन्हेांने रेल संचालन अतिशीघ्र शुरू किए जाने की मांग की।