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बसों में शीशे के बजाए टिन लगाकर चलया जा रहा काम
Kasganj
Updated Sun, 10 Nov 2013 05:38 AM IST
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कासगंज। सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है। रात में तापमान इन दिनों 17 डिग्री सेल्सियस से नीचे आने लगा है। ऐसे में ठंडी हवाओं को झेलने के लिए रोडवेज बस यात्री मजबूूर हैं। रोडवेज की बसों में या तो खिड़कियों में शीशे हैं नहीं। यदि हैं तो वे बंद नहीं होते। वहीं बसों में फॉग लाइट न होने से कोहरे के कारण सुबह को बसों की रफ्तार पर भी असर पड़ने लगा है।
ठंड शुरू होने के बाद भी परिवहन विभाग ने अभी तक बसों के शीशे ठीक नहीं कराए हैं। बसों के शीशे न होने से रात में सफर यात्रियों के लिए काफी दिक्कत भरा हो जाता है। कुछ शीशे तो लगते ही नहीं हैं। पिछले वर्षों में शीशों के स्थान पर टिन लगाकर काम चलाया गया। अब यह टिन जाम हो चुकी हैं। जरूरत के समय इधर-उधर न खिसकने से खिड़कियां बंद नहीं होतीं और रात में ठंडी हवा यात्रियों को चुभती है।
मौसम के बदलाव के साथ कोहरा भी छाने लगा है। इसके बावजूद बसों में अभी तक फॉग लाइटें नहीं लग पाई हैं। इसके चलते चालकों की बस चलाने में परेशानी बढ़ गई है। उन्हें बसों की गति को कम रखना पड़ता है। काफी धीमी गति के कारण यात्री समय से गंतव्य तक नहीं पहुंच पाते। यात्रियों का दबाव लगातार गति को तेज करने का रहता है। इससे हादसों की आशंका बनी रहती है।
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मौसम अभी बहुत सर्द नहीं है। बसों के शीशों के लिए डिमांड भेजी गई है। जो 20 शीशे आए थे वह अच्छी गुणवत्ता के नहीं थे। शीघ्र ही नए शीशे आ जाएंगे। ठंड बढ़ने तक सभी बसों में शीशे दुरुस्त हो जाएंगे। फॉग लाइटें भी शीघ्र लगाईं जाएंगी। -
- एके सिंह, एआरएम, कासगंज
दिन में तो बिना शीशों की बस में काम चल जाता है। सूरज की गरमी में ठंडक नहीं होती, लेकिन रात को सफर करने पर हल्की सी भी ठंडी हवा शरीर में चुभती है। ऐसे में बसों में शीशे न होने से सफर काफी मुश्किल हो जाता है।
- सचिन कुमार, एटा
रोडवेज किराया तो पूरा वसूलता है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर यात्रियों को कुछ नहीं देता। यात्रियों को ठंड में भी सर्द हवा का सामना करते हुए यात्रा करनी पड़ती है।
- महेंद्र सिंह, अलीगढ़
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ठंड शुरू होने के बाद भी परिवहन विभाग ने अभी तक बसों के शीशे ठीक नहीं कराए हैं। बसों के शीशे न होने से रात में सफर यात्रियों के लिए काफी दिक्कत भरा हो जाता है। कुछ शीशे तो लगते ही नहीं हैं। पिछले वर्षों में शीशों के स्थान पर टिन लगाकर काम चलाया गया। अब यह टिन जाम हो चुकी हैं। जरूरत के समय इधर-उधर न खिसकने से खिड़कियां बंद नहीं होतीं और रात में ठंडी हवा यात्रियों को चुभती है।
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मौसम के बदलाव के साथ कोहरा भी छाने लगा है। इसके बावजूद बसों में अभी तक फॉग लाइटें नहीं लग पाई हैं। इसके चलते चालकों की बस चलाने में परेशानी बढ़ गई है। उन्हें बसों की गति को कम रखना पड़ता है। काफी धीमी गति के कारण यात्री समय से गंतव्य तक नहीं पहुंच पाते। यात्रियों का दबाव लगातार गति को तेज करने का रहता है। इससे हादसों की आशंका बनी रहती है।
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मौसम अभी बहुत सर्द नहीं है। बसों के शीशों के लिए डिमांड भेजी गई है। जो 20 शीशे आए थे वह अच्छी गुणवत्ता के नहीं थे। शीघ्र ही नए शीशे आ जाएंगे। ठंड बढ़ने तक सभी बसों में शीशे दुरुस्त हो जाएंगे। फॉग लाइटें भी शीघ्र लगाईं जाएंगी। -
- एके सिंह, एआरएम, कासगंज
दिन में तो बिना शीशों की बस में काम चल जाता है। सूरज की गरमी में ठंडक नहीं होती, लेकिन रात को सफर करने पर हल्की सी भी ठंडी हवा शरीर में चुभती है। ऐसे में बसों में शीशे न होने से सफर काफी मुश्किल हो जाता है।
- सचिन कुमार, एटा
रोडवेज किराया तो पूरा वसूलता है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर यात्रियों को कुछ नहीं देता। यात्रियों को ठंड में भी सर्द हवा का सामना करते हुए यात्रा करनी पड़ती है।
- महेंद्र सिंह, अलीगढ़