बिना एनओसी के भट्ठे चलते मिले तो होगी कार्रवाई

Kasganj Updated Thu, 01 Nov 2012 12:00 PM IST
कासगंज। ईंट भट्ठा कारोबारियों को अब बिना पर्यावरण और वन मंत्रालय की एनओसी के भट्ठों का संचालन कर पाना संभव नहीं होगा। जिले में भट्ठों के संचालन के लिए एनओसी न होने की स्थिति में इनका संचालन रोक दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित तहसीलों के डिप्टी कलक्टर भट्ठों के संचालन की स्थिति की जांच पड़ताल करेंगे और बिना एनओसी के संचालित होने वाले ईंट भट्ठा संचालकों के खिलाफ दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जिले में करीब 160 ईंट भट्ठे संचालित हैं। कासगंज, सोरों, ढोलना, सहावर, अमांपुर, पटियाली, गंजडुंडवारा, गढ़का आदि इलाकों में भट्ठाें का संचालन होता है। उच्चतम न्यायालय के द्वारा ईंट की पथाई के लिए मिट्टी का खनन किए जाने के लिए पर्यावरण और वन मंत्रालय की एनओसी की बाध्यता निर्धारित की गई है। यह एनओसी जिले के किसी भी भट्ठा संचालक के पास नहीं है। ऐसी स्थिति में कासगंज इलाके के तमाम संचालकों ने पहले से ही अपने भट्ठों का संचालन बंद कर दिया था। लेकिन ग्रामीण इलाकों के संचालक लगातार भट्ठों का संचालन कर रहे थे। अब जिला प्रशासन उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए तैयारी कर चुका है। अपर जिलाधिकारी बीएम मिश्रा ने बुधवार को स्पष्ट तौर पर सभी तहसीलों के डिप्टी कलक्टरों को निर्देश जारी किए हैं कि ईंट भट्ठाें पर मिट्टी का खनन तभी संभव हो सकता है, जब उनके पास पर्यावरण और वन मंत्रालय की एनओसी हो। बिना एनओसी के यदि संचालक ईंटों की पथाई या मिट्टी का खनन करते हैं तो ऐसे संचालकों को चिह्नित करके उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। पीएम व सीएम से की है समाधान की मांग। कासगंज ईंट निर्माता संघ के अध्यक्ष नवल किशोर अग्रवाल और महामंत्री सुभाष चंद्र गर्ग का कहना है कि ईंट भट्ठों के संबंध में मिट्टी के खनन की अनुमति को लेकर भ्रमात्मक व्याख्या की गई है। एनओसी को लेकर अभी तक पर्यावरण मंत्रालय भी अंतिम निर्णय नहीं ले पा रहा है। भट्ठा संचालन पहले से ही कारोबारियों ने बंद कर दिया है और वे लगातार इस संबंध में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से समस्या के समाधान की मांग उठा रहे हैं।

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