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कुपोषण से जंग: कासगंज में अब तक छह परिवारों ने ही ली पालने के लिए गाय

Fri, 08 Jan 2021 10:33 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज Published by: Abhishek Saxena Updated Fri, 08 Jan 2021 10:33 AM IST
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Malnutrition in india: Only Six Families Have Taken Cows For Malntrition
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत कुपोषित बच्चों के परिवार वाले मुफ्त में भी गाय लेने को तैयार नहीं है। जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या 8633 है लेकिन अब तक मात्र 6 परिवारों ने ही योजना के तहत आश्रय स्थल की गाय लेने में दिलचस्पी दिखाई है। ऐसी स्थिति में जहां सरकार की महत्वाकांक्षी योजना दम तोड़ रही है वहीं कुपोषित बच्चे भी पोषित नहीं हो पा रहे।
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शासन ने कुपोषित बच्चों को पोषित करने के लिए गाय का दूध उपलब्ध कराने के लिए करीब चार माह पहले निराश्रित गोवंशों को कुपोषित बच्चों वाले परिवारों को देने की योजना शुरू की।  योजना के तहत निराश्रित गोवंश स्थल से जिन पशुओं को लिया जाएगा उनको बेचा या खुला नहीं छोड़ा जा सकता।
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योजना के तहत कुपोषित बच्चों के परिवार आश्रय स्थल से इन गायों को ले सकते हैं। जिला में 8633 कुपोषित बच्चे हैं। इनमें से 1830 बच्चे अति कुपोषित श्रेणी के हैं।  बावजूद इसके कुपोषित बच्चों के परिवार के लोग आगे नहीं आ रहे। इससे योजना के क्रियान्वयन से जुड़े विभाग के अधिकारी भी परेशान है। अधिकारी ऐसे परिवार के लोगों को गोपालन के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं, लेकिन सार्थक परिणा सामने नहीं आ पा रहे।

गोपालन को दिए जा रहे 
शासन से बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे है। शासन कई येेजनाएं चला रही है। इनमें से एक योजना गोपालन की भी है। इसके पीछे शासन की मंशा है कि जो गाय निराश्रित हैं उनका पालन होने के साथ ही कुपोषित बच्चों के लिए गाय का दूध भी मिल सके। इसके लिए शासन से गोपालन को चारे का प्रावधान भी किया गया है। शासन गोपालन करने पर 900 रुपये प्रतिमाह भी दे रहा है।

फैक्ट फाइल
पशु पालन केंद्र -14
पशुपालन केंद्रों पर कूल पशु -2100
पशु पालन केंद्रों पर पल रही गाय -1700
जिला में आंगनबाड़ी केंद्रों पर कुल बच्चे -113384
कुपोषित बच्चों की संख्या- 6803
अति कुपोषति बच्चों की संख्या -1830

गोपालन के लिए कुपोषित परिवार के 6 आवेदन विभाग को प्राप्त हुए थे। इन परिवारों को गाय उपलब्ध करा दी गई हैं। अन्य परिवारों को लगातार योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है ताकि निराश्रित गायों का पालन हो सके। -एके  सागर, प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
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