GST से बौराया-बौराया सा बाजार, पहले ही दिन ये रहा हाल

टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Mon, 03 Jul 2017 08:51 AM IST
worried retailers says market in poor situation due to gst rollout
डेमो
जीएसटी लागू होने का पहला दिन व्यापारियों ने गफलत में गुजार दिया। दरअसल, किसी को ये समझ ही नहीं आया कि नफा हुआ या नुकसान। सभी के चेहरे पर परेशानी नजर आई। बाजारों की हालत खस्ता रही। थोक बाजारों में बिक्री पूरी तरह ठप रही। किसी के पास बिल नहीं था तो किसी को एचएसएन कोड की जानकारी नहीं थी।

किराना, इलेक्ट्रानिक, बारदाना, तिरपाल, मारबल, दवा कारोबार में धंधा नहीं हो सका। पूरा दिन व्यापारी वस्तुओं में कोड डालने में लगे रहे। बिल बुक बनवाईं। दवाओं में 42000 से अधिक आइटम हैं जिनमें एचएसएन कोड डालना है। फुटकर व्यापार एमआरपी पर हुआ लेकिन कहीं बिल मिले कहीं नहीं।

कानपुर में नवीन मार्केट स्थित कपड़ों की दुकान अबु संस के प्रोपराइटर अबु हुरेजा ने बताया कि अभी पुराने रेट पर ही कपड़ों की बिक्री कर रहे हैं। जीएसटी नंबर तो मिल गया है लेकिन सॉफ्टवेयर में अभी फीड नहीं हो सका है। इसलिए बिलिंग भी टिन नंबर पर ही हो रही है। इंजीनियर से बात की है। उसने दो दिन में सॉफ्टवेयर में बदलाव करने को कहा है। इसके बाद ही बिल पर जीएसटी नंबर दर्ज होगा और कपड़ों की कीमतों में भी बदलाव।

नवीन मार्केट स्थित जूतों की दुकान बल्ली शूज में जहां कभी पांव रखने की जगह नहीं हुआ करती थी वहां सन्नाटा पसरा था। प्रोपराइटर कपिल कत्याल ने बताया कि शनिवार को शनिवार शाम चार बजे तक एक भी ग्राहक नहीं आया। अभी उन्होंने जीएसटी नंबर नहीं लिया है। अगर कोई ग्राहक आया तो टिन नंबर वाला ही बिल देंगे। एक-दो दिन में जीएसटी नंबर ले लेंगे। अभी वह असमंजस में हैं क्योकि उनके पास पुराना स्टाक है। इसमें जीएसटी किस तरह जुड़ेगा, यह पता नहीं है। इस बारे में वह और दुकानदारों से जानकारी ले रहे हैं।

रेलवे ऑनलाइन टिकट महंगा हुआ, एसी बसों में भी पांच फीसदी जीएसटी लगकर यात्रियों के टिकट काटे गए। डाक विभाग के पास प्रति डाक के हिसाब से कितना जीएसटी टैक्स लगेगा इसकी सूची भी नहीं आ पाई थी। बिजली का बिल जीएसटी से मुक्त रहा।

कैंट क्षेत्र में कामर्शियल वाहनों के प्रवेश पर लगने वाला टैक्स पूरी तरह से खत्म कर दिया गया। रोजाना बाहरी वाहनों से टैक्स के रूप में 40 हजार रुपये की वसूली होती था। शनिवार को किसी भी वाहन पर टैक्स नहीं लगा। बाजारों में पहले दिन कामकाज सामान्य नहीं रहा। जो भी ग्राहक आए वे भी जीएसटी को लेकर कारोबारियों से उलझे रहे। कई जगहों पर तो ग्राहकों ने यहां तक सौदेबाजी की है कि जीएसटी कल से लगा लेना आज पुराने वाले रेट पर दे दो।

ऐसी स्थिति में व्यापारी और खरीदार दोनों भारी असमंजस में रहे। कई जगहों का हाल ऐसा रहा जहां ग्राहक दुकान पर होने के बाद भी सामान बेचने से व्यापारी हिचके और बिक्री का लेखा जोखा कैसे तैयार करना है, इस पचड़े को सुलझाने में जुटे रहे। अभी न तो व्यापारी ये समझ पा रहा है कि जीएसटी लागू होने के बाद उसे क्या नफा और नुकसान है और न ही जनता को इसके फायदे समझ आ रहे हैं। 

शनिवार को कानपुर शहर के कुछ व्यापारियों से देश में लागू हुई जीएसटी के बारे में उनकी राय जानी गई। रेडीमेड वस्त्र विक्रेता, गल्ला व्यापारी और ज्वैलर्स का एक सा जवाब रहा कि अभी तो लाभ-हानि समझने को गुणा भाग लगा रहे हैं। 

 
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दुकानदारों का दुखड़ा

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