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Kanpur News: पुरुषों की तुलना में महिलाओं को तनाव अधिक
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कानपुर। महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक तनाव में रहती हैं। साथ ही तनाव की समस्या लेकर देर में अस्पताल पहुंचती है। स्ट्रेस बढ़ने पर जब समस्या के लक्षण अधिक आक्रामक होते हैं तब वे विशेषज्ञों के पास पहुंच पाती हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग की ओपीडी में आने वाले स्ट्रेस के रोगियों में 65 फीसदी महिलाएं और 35 फीसदी पुरुष होते हैं।
मेडिकल कॉलेज के मनोरोग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय चौधरी ने बताया कि महिलाओं में मानसिक तनाव का मुख्य कारण परिवार होता है। एकाकी परिवार होने से यह समस्या बढ़ी है। इसके साथ ही इस समस्या के साथ मोबाइल भी जुड़ा है। ओपीडी में जो महिलाएं दिखाने आती हैं, उनमें पति, बच्चों की पढ़ाई, घर की आमदनी तथा अकेलेपन को लेकर स्ट्रेस अधिक होता है। विभिन्न ओपीडी में औसत 100 रोगी आते हैं। इनमें महिलाओं की संख्या अधिक होती है।
वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. कृतिका चावला ने बताया कि स्ट्रेस के रोगियों में 65 फीसदी महिलाएं होती हैं। कामकाजी महिलाओं में अपने कार्यस्थल को लेकर स्ट्रेस होता है लेकिन उनमें बर्दाश्त की क्षमता अधिक होती है। इसके अलावा पुरुषों की तुलना में देर में अस्पताल आती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रेस के लिए कार्टिसोल न्यूरो केमिकल जिम्मेदार होता है।
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इन बातों का रखें ध्यान
-मां-बाप बेटे और बेटी से बराबरी का बर्ताव करें
-महिलाएं नकारात्मक सोच न रखें
-योग, प्राणायाम से स्ट्रेस मैनेजमेंट करें
-साथी, सहेलियों से सकरात्मक बातें करें
-अपने को कामों में व्यस्त रखें
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मेडिकल कॉलेज के मनोरोग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय चौधरी ने बताया कि महिलाओं में मानसिक तनाव का मुख्य कारण परिवार होता है। एकाकी परिवार होने से यह समस्या बढ़ी है। इसके साथ ही इस समस्या के साथ मोबाइल भी जुड़ा है। ओपीडी में जो महिलाएं दिखाने आती हैं, उनमें पति, बच्चों की पढ़ाई, घर की आमदनी तथा अकेलेपन को लेकर स्ट्रेस अधिक होता है। विभिन्न ओपीडी में औसत 100 रोगी आते हैं। इनमें महिलाओं की संख्या अधिक होती है।
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वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. कृतिका चावला ने बताया कि स्ट्रेस के रोगियों में 65 फीसदी महिलाएं होती हैं। कामकाजी महिलाओं में अपने कार्यस्थल को लेकर स्ट्रेस होता है लेकिन उनमें बर्दाश्त की क्षमता अधिक होती है। इसके अलावा पुरुषों की तुलना में देर में अस्पताल आती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रेस के लिए कार्टिसोल न्यूरो केमिकल जिम्मेदार होता है।
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इन बातों का रखें ध्यान
-मां-बाप बेटे और बेटी से बराबरी का बर्ताव करें
-महिलाएं नकारात्मक सोच न रखें
-योग, प्राणायाम से स्ट्रेस मैनेजमेंट करें
-साथी, सहेलियों से सकरात्मक बातें करें
-अपने को कामों में व्यस्त रखें