UP Police: जब-जब पुलिस पर उठे सवाल, तो जांच की खानापूरी बनी ढाल, पढ़िए पुलिस की लापरवाही के मामले
पुलिस की लापरवाही और बर्बरता के कई मामले जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिए गए। नवाबगंज पुलिस हिरासत में मौत के मामले में अब तक जांच पूरी नहीं हुई है। तो वहीं, स्वरूपनगर में वृद्धा को थर्ड डिग्री देने के मामले की भी जांच अधर में है।
विस्तार
कानपुर कमिश्नरी में पिछले छह महीने के भीतर कई ऐसी बड़ी वारदात हुईं, जिसमें खाकी पर सवाल उठे। अफसरों ने फौरी तौर पर जांच के आदेश दिए। जांच भी शुरू हुई, लेकिन कई माह बाद भी जांचें पूरी नहीं हो सकीं। इसलिए जिम्मेदारों पर जांच की आंच तक नहीं आई। जांच का हवाला देकर सिर्फ मामलों को शांत किया गया।
सुदामा की मौत का जिम्मेदार नहीं हुआ बेनकाब
एनआरआई सिटी निवासी कारोबारी रमन नेमानी ने दावा किया किया था 17 अप्रैल को उनके फ्लैट से चोरी हुई। आरोप 13 वर्षीय नौकरानी पर लगाया था। आठ मई को शिकायत पर नवाबगंज पुलिस ने बिना एफआईआर दर्ज किए किशोरी व उसकी मां सुदामा से थाने में कई घंटे पूछताछ की थी।
उसी रात ढाई बजे दोनों को पुलिस ने स्वरूपनगर स्थित वन स्टाप सेंटर में ठहराया था। सुबह सुदामा का शव बाथरूम में फंदे से झूलता मिला था। मामले की जांच तत्कालीन डीसीपी साउथ रवीना त्यागी को दी गई थी। ढाई महीने से अधिक का समय बीतने के बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है।
बुजुर्ग पर बर्बरता करने वालों पर भी नहीं हुई कार्रवाई
स्वरूपनगर स्थित कॉनकॉर्ड अपार्टमेंट में ज्योतिषार्चा मधु कपूर (68) की फ्लैट में घुसकर हत्या कर दी गई थी। वारदात का अब तक पुलिस खुलासा नहीं कर सकी है। पुलिस ने वारदात के कुछ दिन बाद उनकी नौकरानी सावित्री को पूछताछ के लिए उठाया था।
सावित्री को थर्ड डिग्री दी थी। मामला उजागर होने पर एडीसीपी एंटी वूमेन क्राइम शिवाजी शुक्ला को जांच दी गई थी। यह जांच भी ठप पड़ी हुई है। एडीसीपी का कहना है कि सावित्री के बयान नहीं हुए हैं, जबकि जांच शुरू होते ही बयान दर्ज किए गए थे।
दरोगा बन घूमने वाले हेडकांस्टेबल की भी जांच अधूरी
हेड कांस्टेबल दयाशंकर वर्मा पिछले चार वर्षों से दरोगा बनकर नौकरी रहा है। 2017 में जब वह घाटमपुर थाने में तैनात था, तब उसका तबादला दूसरे थाने में हुआ था। इस गश्ती में उसको हेडकांस्टेबल के बजाए दरोगा बताया गया था।
इसके बाद वह भी दरोगा की वर्दी पहन घूमने लगा था। मामले में अफसरों ने एडीसीपी पूर्वी को जांच दी थी, लेकिन आज तक जांच पूरी नहीं हो सकी। इसमें बड़े अफसर भी जद में आते, इसलिए जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
मकान कब्जाने के मामले में थानेदार और एसीपी पर भी मेहरबानी
बर्रा में दलित परिवार को प्रताड़ित कर उसके मकान पर कब्जा करने के मामले में 11 दरोगा-सिपाही लाइन हाजिर किए गए थे। इसमें गोविंद नगर एसीपी व बर्रा थानेदार की भूमिका की भी जांच की गई थी। जांच अफसर ने दोनों को हटाने की संस्तुति की थी लेकिन उच्चाधिकारियों ने जांच को जस का तस रोक दिया।
जो जांचें लंबित हैं, उनकी समीक्षा की जाएगी। संबंधित अफसर को निर्देशित कर जांचें जल्द से जल्द पूरी कर उचित कार्रवाई की जाएगी। -बीपी जोगदंड, पुलिस कमिश्नर