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सर्द हवाओं ने बढ़ा दी कंपकंपी
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर देहात
Updated Tue, 30 Dec 2014 01:24 AM IST
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इस साल हाड़कंपाऊ ठंड से सभी बेहाल हैं। गिरता पारा रोज नए रिकार्ड बना रहा
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है। आसमान में छा रही बर्फ की चादर धूप के धरती तक आने में बाधक
बनी है। जिससे गलन बढ़ी है। वहीं कोहरे का कहर भी जारी है। हालात के लिए
प्राकृतिक कारण ही नहीं मानवीय गतिविधियां भी जिम्मेदार हैं।
मालूम हो कि गत रविवार को वायुमंडल का न्यूनतम तापमान 5 डिग्री था और अधिकतम आर्द्रता 100 प्रतिशत दर्ज की गई थी। कृषि विशेषज्ञ बीएस यादव ने बताया कि सतह से करीब एक किलोमीटर की ऊंचाई पर अति सूक्ष्म प्रदूषित कणों (एयरोसोल्स) के संघनन से मुलायम बर्फ की परत (हेज लेयर) बनती है।
सूर्य की किरणें इसी परत से टकराकर वायुमंडल में छितराती हैं या लौट जाती हैं। जबकि लोगों को बदली का भ्रम होता है। इस परत के नीचे कोहरा मौजूद रहता है।
वातावरण की अनुकूल दशाओं में जब सतह का तापमान कम होता है, तब आर्द्रता बढ़ने पर धरती के नजदीक हवा में कोहरे की मौजूदगी सामान्य प्राकृतिक घटना है। जबकि धुएं और कोहरे के मिश्रण से धुंध बनता है। जो बढ़ते वायु प्रदूषण की उपज है।
सापेक्षिक आर्द्रता शतप्रतिशत होने पर हवा में जलवाष्प की मात्रा स्थिर हो जाती है। जिससे अतिरिक्त जलवाष्प शामिल होने या तापमान कम होने पर संघनन शुरू हो जाता है और वायुमंडल में कोहरा फैल जाता है। इन दिनों खेतों में सिंचाई के चलते वायुमंडल में आर्द्रता बढ़ी है। प्रदूषण भी कोहरा और धुंध बनने में सहायक सिद्ध हो रहा है।
मालूम हो कि गत रविवार को वायुमंडल का न्यूनतम तापमान 5 डिग्री था और अधिकतम आर्द्रता 100 प्रतिशत दर्ज की गई थी। कृषि विशेषज्ञ बीएस यादव ने बताया कि सतह से करीब एक किलोमीटर की ऊंचाई पर अति सूक्ष्म प्रदूषित कणों (एयरोसोल्स) के संघनन से मुलायम बर्फ की परत (हेज लेयर) बनती है।
सूर्य की किरणें इसी परत से टकराकर वायुमंडल में छितराती हैं या लौट जाती हैं। जबकि लोगों को बदली का भ्रम होता है। इस परत के नीचे कोहरा मौजूद रहता है।
वातावरण की अनुकूल दशाओं में जब सतह का तापमान कम होता है, तब आर्द्रता बढ़ने पर धरती के नजदीक हवा में कोहरे की मौजूदगी सामान्य प्राकृतिक घटना है। जबकि धुएं और कोहरे के मिश्रण से धुंध बनता है। जो बढ़ते वायु प्रदूषण की उपज है।
सापेक्षिक आर्द्रता शतप्रतिशत होने पर हवा में जलवाष्प की मात्रा स्थिर हो जाती है। जिससे अतिरिक्त जलवाष्प शामिल होने या तापमान कम होने पर संघनन शुरू हो जाता है और वायुमंडल में कोहरा फैल जाता है। इन दिनों खेतों में सिंचाई के चलते वायुमंडल में आर्द्रता बढ़ी है। प्रदूषण भी कोहरा और धुंध बनने में सहायक सिद्ध हो रहा है।