Kanpur: केस्को के 22 टन स्क्रैप घोटाले में विजिलेंस जांच तेज, हिस्सेदारी के विवाद से खुला था फर्जीवाड़े का खेल
Kanpur News: केस्को के आरपीएच स्टोर से 22 टन स्क्रैप बेचने के मामले में विजिलेंस ने जांच तेज कर दी है। केस्को एमडी की संस्तुति के बाद लखनऊ से आई विजिलेंस टीम ने पुलिस के साथ मामले की जानकारी जुटाई।
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केस्को के आरपीएच स्टोर से जुड़े चर्चित 22 टन स्क्रैप घोटाले में विजिलेंस ने अपनी जांच का दायरा और तेज कर दिया है। केस्को एमडी की संस्तुति के बाद लखनऊ से आई विजिलेंस टीम ने स्थानीय पुलिस और केस्को के कई इंजीनियरों से इस मामले में लंबी पूछताछ की है और अहम जानकारियां जुटाई हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पहले ही एक्सईएन श्रीकांत रंगीला और जेई मुन्ना यादव को निलंबित किया जा चुका है।
हिस्सेदारी के विवाद से खुला था पूरा खेल
प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि 10 टन स्क्रैप की जगह करीब 22 टन माल अवैध तरीके से बेचे जाने का यह खेल केवल एक गाड़ी पकड़े जाने तक सीमित नहीं था। आरोप है कि पिछले काफी समय से ठेकेदारों और कुछ भ्रष्ट इंजीनियरों की गहरी मिलीभगत से केस्को का कीमती स्क्रैप औने-पौने दामों पर बाहर भेजा जा रहा था। यह काला कारोबार दूसरे राज्यों तक फैला हुआ था।
मामले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब गुजरात की कबाड़ खरीदने वाली फर्म 'एमए ट्रेडर्स' की एक संदिग्ध गाड़ी पकड़ी गई और बाद में बिहार भेजी गई अतिरिक्त माल से लदी एक अन्य गाड़ी को भी मैनेज कर छुड़ाए जाने की बात सामने आई। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश किसी नियमित आंतरिक निगरानी के बजाय आपस में हिस्सेदारी (कमीशन) को लेकर हुए विवाद के बाद हुआ।
एक्सईएन और जेई को चार्जशीट देने की तैयारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए केस्को प्रबंधन ने इसकी आंतरिक जांच एसई प्रोजेक्ट को सौंपी थी। जांच रिपोर्ट में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद एक्सईएन श्रीकांत रंगीला और जेई मुन्ना यादव को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद ग्वालटोली थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई और आरोपी जेई मुन्ना यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।
सूत्रों के मुताबिक, अब दोनों इंजीनियरों को जल्द ही विभागीय चार्जशीट दिए जाने की तैयारी है। उनसे लिखित जवाब मांगा जाएगा और उनके पक्ष के आधार पर आगे की दंडात्मक कार्रवाई तय की जाएगी। यदि आरोप पूरी तरह सिद्ध हो जाते हैं, तो अतिरिक्त बेचे गए सामान की कुल बाजार कीमत के बराबर वित्तीय रिकवरी की जा सकती है। इसके अलावा, विभागीय नियमों के तहत स्थायी वेतन वृद्धि रोकने जैसी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।