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चिंताजनक: यूपी में 17 साल के लड़के-लड़कियां हो रहीं एचआईवी संक्रमित, स्थिति भयावह; विशेषज्ञों ने कही ये बात
Mon, 17 Mar 2025 02:01 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 17 Mar 2025 02:01 PM IST
सार
यूपी में 17 साल के लड़के-लड़कियां एचआईवी संक्रमित हो रहीं हैं। संक्रामक रोग अस्पताल में एआरटी सेंटर में वर्तमान में पांच हजार संक्रमित इलाज रहा रहे हैं।
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एचआईवी
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
17-18 साल की उम्र में लड़के और लड़कियां एचआईवी संक्रमित हो रहे हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के एआरटी सेंटर के माध्यम से इलाज करा रहे पांच हजार संक्रमितों को यह पता ही नहीं है कि उन्हें संक्रमण कैसे मिला है?
किसी और मर्ज के इलाज के लिए जांच कराने पर एचआईवी संक्रमण पता चल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति भयावह है। पहले माना जाता रहा है कि ट्रक ड्राइवर जैसे पेशे वालों को ही यह संक्रमण अधिक होता है।
संक्रामक रोग अस्पताल में एआरटी सेंटर वर्ष 2009 में खुला था। तब से अब तक 13 हजार संक्रमित पंजीकृत हुए हैं। इस समय पांच हजार संक्रमित सेंटर पर आकर इलाज ले रहे हैं। संक्रमितों में 60 फीसदी पुरुष और 40 फीसदी महिलाएं हैं। संक्रमितों का आयु वर्ग 17 से 50 वर्ष के बीच है।
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एआरटी सेंटर प्रभारी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि इनमें 15 संक्रमित 17 साल से कम उम्र के हैं। जेल के 40 बंदियों को भी संक्रमण है। संक्रमितों की संख्या बढ़ने पर उन्हें संबंधित जिलों के लिंक सेंटरों पर इलाज के लिए भेज दिया जा रहा है। इससे संक्रमितों को इलाज लेने में आसानी होती है।
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किसी और मर्ज के इलाज के लिए जांच कराने पर एचआईवी संक्रमण पता चल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति भयावह है। पहले माना जाता रहा है कि ट्रक ड्राइवर जैसे पेशे वालों को ही यह संक्रमण अधिक होता है।
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संक्रामक रोग अस्पताल में एआरटी सेंटर वर्ष 2009 में खुला था। तब से अब तक 13 हजार संक्रमित पंजीकृत हुए हैं। इस समय पांच हजार संक्रमित सेंटर पर आकर इलाज ले रहे हैं। संक्रमितों में 60 फीसदी पुरुष और 40 फीसदी महिलाएं हैं। संक्रमितों का आयु वर्ग 17 से 50 वर्ष के बीच है।
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एआरटी सेंटर प्रभारी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि इनमें 15 संक्रमित 17 साल से कम उम्र के हैं। जेल के 40 बंदियों को भी संक्रमण है। संक्रमितों की संख्या बढ़ने पर उन्हें संबंधित जिलों के लिंक सेंटरों पर इलाज के लिए भेज दिया जा रहा है। इससे संक्रमितों को इलाज लेने में आसानी होती है।
एचआईवी संक्रमण का फैलाव चिंता का विषय
लिंक सेंटर बांदा, जालौन, सैफई (इटावा), फतेहपुर, झांसी आदि जिलों में चल रहे हैं। डॉ. सिंह ने बताया कि एचआईवी संक्रमण कहां से मिला? ज्यादातर को स्रोत पता नहीं रहता। विशेषज्ञों का कहना है कि एचआईवी संक्रमण का फैलाव चिंता का विषय है।
लिंक सेंटर बांदा, जालौन, सैफई (इटावा), फतेहपुर, झांसी आदि जिलों में चल रहे हैं। डॉ. सिंह ने बताया कि एचआईवी संक्रमण कहां से मिला? ज्यादातर को स्रोत पता नहीं रहता। विशेषज्ञों का कहना है कि एचआईवी संक्रमण का फैलाव चिंता का विषय है।
बहुत से लोग अपने संक्रमण को छिपा लेते हैं। इससे खतरा और बढ़ने लगता है। इलाज में देर हो जाती है। अगर किसी को संक्रमण पता चले तो तुरंत एआरटी सेंटर पर जाकर जांच कराएं। समय से इलाज शुरू हो तो एचआईवी के साथ सामान्य जिंदगी गुजारी जा सकती है।
झोलाछाप के एक ही सीरिंज से कई लोगों को इंजेक्शन लगाने से भी संक्रमण
टैटू, झोलाछाप के इंजेक्शन से संक्रमण संक्रमितों की हिस्ट्री से पता चल रहा है कि टैटू बनवाने, झोलाछाप के एक ही सीरिंज से कई लोगों को इंजेक्शन लगाने से संक्रमण मिला है। कई संक्रमित जब सर्जरी कराने के लिए अस्पताल में आए तो जांचों में पता चला।
टैटू, झोलाछाप के इंजेक्शन से संक्रमण संक्रमितों की हिस्ट्री से पता चल रहा है कि टैटू बनवाने, झोलाछाप के एक ही सीरिंज से कई लोगों को इंजेक्शन लगाने से संक्रमण मिला है। कई संक्रमित जब सर्जरी कराने के लिए अस्पताल में आए तो जांचों में पता चला।
साथ ही गर्भवतियों को डिलीवरी के समय होने वाली जांचों में संक्रमण उजागर हुआ है। एचआईवी के साथ हेपेटाइटिस बी और सी का संक्रमण भी इसी तरह पकड़ में आता है। संक्रमितों का हैलट के गैस्ट्रोइंटोलॉजी और एआरटी सेंटर पर इलाज चल रहा है।