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Kanpur News: डिग्री के साथ उद्योगों में कामकाज सीखेंगे विवि के छात्र
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कानपुर। डिग्री हाथ में आने के बाद नौकरी के लिए अनुभव जुटाने की चुनौती से विद्यार्थियों को राहत दिलाने की दिशा में छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) ने नई पहल की है। अब विद्यार्थियों की पढ़ाई को व्यावहारिक प्रशिक्षण से जोड़ने की तैयारी है।
इसके तहत स्नातक पाठ्यक्रमों में अप्रेंटिसशिप यानी कार्यस्थल पर काम सीखने का अवसर मिलेगा। विद्यार्थी पढ़ाई के साथ उद्योगों और संस्थानों में कामकाज की बारीकियां सीख सकेंगे। इससे उन्हें डिग्री पूरी करने के बाद रोजगार की तैयारी में मदद मिलेगी। प्रशिक्षण के दौरान निर्धारित प्रावधानों के तहत स्टाइपेंड यानी भत्ता भी मिल सकेगा।
विश्वविद्यालय में नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग स्कीम (नैट्स) के तहत अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (एईडीपी) लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके लिए विश्वविद्यालय ने बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग, नॉर्दर्न रीजन (बोट-एनआर), कानपुर के साथ एमओयू किया है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विद्यार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा देने के उद्देश्य से की गई है।
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योजना के तहत तीन वर्षीय स्नातक डिग्री कार्यक्रम में न्यूनतम एक और अधिकतम तीन सेमेस्टर जबकि चार वर्षीय डिग्री कार्यक्रम में न्यूनतम दो और अधिकतम चार सेमेस्टर की अप्रेंटिसशिप का प्रावधान है। इसके तहत विद्यार्थियों को कार्यस्थल पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। पाठ्यक्रम के अंतिम सेमेस्टर में नैट्स के नियमों के अनुसार अप्रेंटिसशिप करने पर स्टाइपेंड भी मिलेगा। महाविद्यालय विकास परिषद के निदेशक प्रो. राजेश द्विवेदी ने कहा कि छात्रों को निश्चित ही इससे लाभ मिलेगा। लगभग सभी कोर्स को शामिल करने पर चर्चा की रही है।
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इसके तहत स्नातक पाठ्यक्रमों में अप्रेंटिसशिप यानी कार्यस्थल पर काम सीखने का अवसर मिलेगा। विद्यार्थी पढ़ाई के साथ उद्योगों और संस्थानों में कामकाज की बारीकियां सीख सकेंगे। इससे उन्हें डिग्री पूरी करने के बाद रोजगार की तैयारी में मदद मिलेगी। प्रशिक्षण के दौरान निर्धारित प्रावधानों के तहत स्टाइपेंड यानी भत्ता भी मिल सकेगा।
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विश्वविद्यालय में नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग स्कीम (नैट्स) के तहत अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (एईडीपी) लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके लिए विश्वविद्यालय ने बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग, नॉर्दर्न रीजन (बोट-एनआर), कानपुर के साथ एमओयू किया है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विद्यार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा देने के उद्देश्य से की गई है।
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योजना के तहत तीन वर्षीय स्नातक डिग्री कार्यक्रम में न्यूनतम एक और अधिकतम तीन सेमेस्टर जबकि चार वर्षीय डिग्री कार्यक्रम में न्यूनतम दो और अधिकतम चार सेमेस्टर की अप्रेंटिसशिप का प्रावधान है। इसके तहत विद्यार्थियों को कार्यस्थल पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। पाठ्यक्रम के अंतिम सेमेस्टर में नैट्स के नियमों के अनुसार अप्रेंटिसशिप करने पर स्टाइपेंड भी मिलेगा। महाविद्यालय विकास परिषद के निदेशक प्रो. राजेश द्विवेदी ने कहा कि छात्रों को निश्चित ही इससे लाभ मिलेगा। लगभग सभी कोर्स को शामिल करने पर चर्चा की रही है।