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होलिका दहन आज, सूर्यास्त के बाद कभी भी जलाएं
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 12 Mar 2017 12:40 PM IST
सार
- रात 8:24 बजे तक होलिका दहन शुभ
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विस्तार
होलिका दहन रविवार को है। इस बार न तो भद्रा है और न ही चतुर्दशी, ऐसे में सूर्यास्त (6:18 बजे) के बाद किसी भी समय होलिका का दहन किया जा सकता है। रात 8:24 तक होलिका दहन करना ज्यादा शुभ है। इसके बाद प्रतिपदा लग रही है। वहीं सोमवार परेवा वाले दिन रंग खेला जाएगा और मंगलवार को भाई दूज है। सुबह 10:50 बजे से शाम 4:47 बजे तक टीका करना शुभ है।
पंडित केए दुबे पद्मेश ने बताया कि होलिका दहन में तीन बातों का ध्यान रखा जाता है। पहला प्रतिपदा या चतुर्दशी न हो। इसके अलावा भद्रा नक्षत्र और दिन में होली नहीं जलाई जाती। 12 मार्च सुबह 8:21 बजे तक भद्रा है, जबकि रात 8:24 बजे तक पूर्णिमा है। इसलिए सूर्यास्त के बाद रात 8:24 बजे तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है। काली और तंत्र साधना का मुहूत रात 11:27 से 12:34 बजे तक है। महामोहपाध्याय डॉ. आदित्य पांडेय ने भी बताया कि सूर्यास्त के बाद होलिका दहन किसी भी समय करना शुभ होगा। हालांकि अमृतकाल का योग शाम 7:43 से 9:15 बजे तक है। यह श्रेष्ठ मुहूर्त है। उन्होंने बताया कि भाईदूज का मुहूर्त सुबह 10:50 से 12:18 बजे तक है। अमृतकाल 12:18 से 1:46 बजे तक है। वहीं शुभ मुहूर्त 3:15 से 4:47 बजे तक है।
होली पूजन मंत्र
रोली, सिंदूर, अबीर, गुलाल, मिठाई आदि से होलिका का पूजन करने के बाद
‘वन दितासी सुरेंद्रेण ब्रह्मणा सक्रेन च, अत्स्त्वम पाहिनो देति भूते भूति प्रदाभव।’ मंत्र का जाप करें।
होलिका जलाने का मंत्र
दीप याम्य जदे घोरे चिति राक्षसि सतमे, हिताय सर्व जगतां प्रीत्ये पार्वती पते।
कौड़ी लगाएं घर की नकारात्मक ऊर्जा भगाएं
होलिका दहन में जाने से पहले 27 पीली और 27 काली कौड़ी एक काले कपड़े में बांधकर घर की दहलीज पर हुआकर होलिका में डाल दें। ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
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भस्म लगाएं बीमारी भगाएं
होलिका दहन के अगले दिन उसकी भस्म ले आएं। भस्म में जल मिलाकर कमल पुष्प या विष्णुकांता के फूल से जल का पूरे घर में छिड़काव करने से बीमारी भागती है।
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पंडित केए दुबे पद्मेश ने बताया कि होलिका दहन में तीन बातों का ध्यान रखा जाता है। पहला प्रतिपदा या चतुर्दशी न हो। इसके अलावा भद्रा नक्षत्र और दिन में होली नहीं जलाई जाती। 12 मार्च सुबह 8:21 बजे तक भद्रा है, जबकि रात 8:24 बजे तक पूर्णिमा है। इसलिए सूर्यास्त के बाद रात 8:24 बजे तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है। काली और तंत्र साधना का मुहूत रात 11:27 से 12:34 बजे तक है। महामोहपाध्याय डॉ. आदित्य पांडेय ने भी बताया कि सूर्यास्त के बाद होलिका दहन किसी भी समय करना शुभ होगा। हालांकि अमृतकाल का योग शाम 7:43 से 9:15 बजे तक है। यह श्रेष्ठ मुहूर्त है। उन्होंने बताया कि भाईदूज का मुहूर्त सुबह 10:50 से 12:18 बजे तक है। अमृतकाल 12:18 से 1:46 बजे तक है। वहीं शुभ मुहूर्त 3:15 से 4:47 बजे तक है।
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होली पूजन मंत्र
रोली, सिंदूर, अबीर, गुलाल, मिठाई आदि से होलिका का पूजन करने के बाद
‘वन दितासी सुरेंद्रेण ब्रह्मणा सक्रेन च, अत्स्त्वम पाहिनो देति भूते भूति प्रदाभव।’ मंत्र का जाप करें।
होलिका जलाने का मंत्र
दीप याम्य जदे घोरे चिति राक्षसि सतमे, हिताय सर्व जगतां प्रीत्ये पार्वती पते।
कौड़ी लगाएं घर की नकारात्मक ऊर्जा भगाएं
होलिका दहन में जाने से पहले 27 पीली और 27 काली कौड़ी एक काले कपड़े में बांधकर घर की दहलीज पर हुआकर होलिका में डाल दें। ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
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भस्म लगाएं बीमारी भगाएं
होलिका दहन के अगले दिन उसकी भस्म ले आएं। भस्म में जल मिलाकर कमल पुष्प या विष्णुकांता के फूल से जल का पूरे घर में छिड़काव करने से बीमारी भागती है।