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डॉक्टर को क्लीन चिट दी
ब्यूरो अमर उजाला कानपुर
Updated Tue, 23 Aug 2016 01:27 AM IST
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कानपुर। आईआईटी में मैटेरियल साइंस के रिसर्च स्कॉलर (पीएचडी) आलोक कुमार पांडेय की मौत पर गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने वहां के स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉ. शैलेंद्र किशोर को क्लीन चिट दे दी है। इसके बाद आईआईटी की इंस्टीट्यूट एडवाइजरी कमेटी (आईएससी) ने डॉक्टर का निलंबन खत्म कर दिया। यह रिपोर्ट सोमवार को सार्वजनिक की गई। साथ ही कहा है कि अब डॉक्टर इलाज कर सकते हैं। इस रिपोर्ट पर स्टूडेंटों से फीडबैक लिया जाएगा। बताते चलें कि रिपोर्ट पहले दी गई थी लेकिन निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना के शहर से बाहर होने के कारण सोमवार को रिपोर्ट का अध्ययन किया जा सका।
आईआईटी के रिसर्च स्कॉलर की मौत 8 अगस्त को हुई थी। इसके बाद स्टूडेंटों ने आंदोलन किया और तीन दिनों तक पठन-पाठन का काम ठप रखा। इसी मामले में आईआईटी प्रशासन ने पांच सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की। इसकी रिपोर्ट आ गई है। इसी सिलसिले में सोमवार को आईएसी की मीटिंग भी हुई।
रजिस्ट्रार (प्रोफेसर इंचार्ज) प्रो. सुधीर मिश्रा ने बताया कि फैक्ट फाइडिंग कमेटी ने रिसर्च स्कॉलर के इलाज में लापरवाही से इंकार किया है। कमेटी ने जो रिपोर्ट दी है, उसके मुताबिक रिसर्च स्कॉलर को हार्ट अटैक था। प्राथमिक उपचार के बाद रिसर्च स्कॉलर को कार्डियोलॉजी के लिए रिफर कर दिया गया। रास्ते में ही रिसर्च स्कॉलर की मौत हो गई। इस रिपोर्ट का संज्ञान लेकर ही चिकित्सक को बहाल किया गया है। कमेटी की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी गई है। पूरी रिपोर्ट स्टूडेंट और मीडिया को दी जाएगी। आईएसी की मीटिंग में स्टूडेंट जिमखाना क्लब के अध्यक्ष आशुतोष रंका भी शामिल हुए थे। बताते चलें कि चिकित्सक के निलंबन का विरोध मेडिकल एसोसिएशन ने किया था लेकिन आईआईटी प्रशासन के सकारात्मक आश्वासन के बाद आंदोलन का रास्ता नहीं अपनाया था।
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स्वास्थ्य केंद्र के कायाकल्प की सलाह
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने स्वास्थ्य केंद्र के कायाकल्प की सलाह भी दी है। कहा है कि आधुनिक सुविधा- संसाधनों से लैस आईसीयू बनाया जाना चाहिए। आईआईटी में आठ हजार स्टूडेेंट, शिक्षक और कर्मचारी रहते हैं। अच्छे चिकित्सक की नियुक्ति जरूरी है। पैथालॉजी सेंटर और चिकित्सकीय परीक्षण की आधुनिक मशीनें भी लगाई जानी चाहिए।
स्टूडेंटों पर दबाव बढ़ा
रिसर्च स्कॉलर की मौत पर फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के बाद स्टूडेंटोें पर दबाव बढ़ गया है। अब आंदोलनरत स्टूडेंटों को कार्रवाई का डर सता रहा है। इस मामले में आईआईटी प्रशासन का रवैया सख्त है। प्रशासन ने आंदोलन को गैर कानूनी बताते हुए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है। इस मामले में स्टूडेंट बोलने को तैयार नहीं हैं। दोबारा आंदोलन की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
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आईआईटी के रिसर्च स्कॉलर की मौत 8 अगस्त को हुई थी। इसके बाद स्टूडेंटों ने आंदोलन किया और तीन दिनों तक पठन-पाठन का काम ठप रखा। इसी मामले में आईआईटी प्रशासन ने पांच सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की। इसकी रिपोर्ट आ गई है। इसी सिलसिले में सोमवार को आईएसी की मीटिंग भी हुई।
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रजिस्ट्रार (प्रोफेसर इंचार्ज) प्रो. सुधीर मिश्रा ने बताया कि फैक्ट फाइडिंग कमेटी ने रिसर्च स्कॉलर के इलाज में लापरवाही से इंकार किया है। कमेटी ने जो रिपोर्ट दी है, उसके मुताबिक रिसर्च स्कॉलर को हार्ट अटैक था। प्राथमिक उपचार के बाद रिसर्च स्कॉलर को कार्डियोलॉजी के लिए रिफर कर दिया गया। रास्ते में ही रिसर्च स्कॉलर की मौत हो गई। इस रिपोर्ट का संज्ञान लेकर ही चिकित्सक को बहाल किया गया है। कमेटी की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी गई है। पूरी रिपोर्ट स्टूडेंट और मीडिया को दी जाएगी। आईएसी की मीटिंग में स्टूडेंट जिमखाना क्लब के अध्यक्ष आशुतोष रंका भी शामिल हुए थे। बताते चलें कि चिकित्सक के निलंबन का विरोध मेडिकल एसोसिएशन ने किया था लेकिन आईआईटी प्रशासन के सकारात्मक आश्वासन के बाद आंदोलन का रास्ता नहीं अपनाया था।
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स्वास्थ्य केंद्र के कायाकल्प की सलाह
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने स्वास्थ्य केंद्र के कायाकल्प की सलाह भी दी है। कहा है कि आधुनिक सुविधा- संसाधनों से लैस आईसीयू बनाया जाना चाहिए। आईआईटी में आठ हजार स्टूडेेंट, शिक्षक और कर्मचारी रहते हैं। अच्छे चिकित्सक की नियुक्ति जरूरी है। पैथालॉजी सेंटर और चिकित्सकीय परीक्षण की आधुनिक मशीनें भी लगाई जानी चाहिए।
स्टूडेंटों पर दबाव बढ़ा
रिसर्च स्कॉलर की मौत पर फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के बाद स्टूडेंटोें पर दबाव बढ़ गया है। अब आंदोलनरत स्टूडेंटों को कार्रवाई का डर सता रहा है। इस मामले में आईआईटी प्रशासन का रवैया सख्त है। प्रशासन ने आंदोलन को गैर कानूनी बताते हुए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है। इस मामले में स्टूडेंट बोलने को तैयार नहीं हैं। दोबारा आंदोलन की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।