राजौरी में सेना पर आतंकी हमला: कानपुर का जांबाज भी हुआ शहीद, ग्रामीण बोले- सबका चहेता था करन, गांव में मातम
Kanpur News: सैन्य जानकारी के अनुसार, सेना की आरआर बटालियन द्वारा टोपा पीर क्षेत्र में आतंकी गतिविधियों होने के चलते तलाशी अभियान शुरू किया गया था। इसी दौरान गुरुवार दोपहर जिप्सी से सवार होकर बफलियाज मार्ग से गुजरने के दौरान आतंकियों ने हमला कर दिया।
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जम्मू-कश्मीर के राजौरी थाना मंडी में गुरुवार को सेना के वाहनों पर हुए आतंकी हमले में बलिदान हुए पांच जवानों में से एक चौबेपुर (कानपुर) का भी जांबाज लाल था। आर्मी में जीडी सिपाही करन कुमार यादव ( भीम) चौबेपुर थाना क्षेत्र के भाऊपुर गांव का निवासी था।
देर रात अधिकारियों से जानकारी मिलने के बाद घरवालों में कोहराम मच गया। जानकारी पर पूरे गांव में मातम बना हुआ है। भाऊपुर गांव निवासी किसान बालक राम यादव का बेटा करन कुमार दो भाई व तीन बहनों में मंझला था। परिवार में बहन साधना व आराधना की शादी हो चुकी है।
टोपा पीर क्षेत्र में तलाशी अभियान शुरू किया गया
वहीं, बहन सोमवती तथा छोटा भाई अर्जुन अविवाहित है। करन वर्ष 2013 में सेना में भर्ती हुआ था। इन दिनों उसकी तैनाती जम्मू कश्मीर के राजौरी क्षेत्र में थी। सैन्य जानकारी के अनुसार, सेना की आरआर बटालियन द्वारा टोपा पीर क्षेत्र में आतंकी गतिविधियों होने के चलते तलाशी अभियान शुरू किया गया था।
जिप्सी पर आतंकियों ने हमला कर दिया
इसी दौरान गुरुवार दोपहर जिप्सी से सवार होकर बफलियाज मार्ग से गुजरने के दौरान आतंकियों ने हमला कर दिया। हमले में पांच जवान मौके पर ही बलिदान हो गए, जिसमें नायक चालक करन कुमार चौबेपुर का निवासी था। पिता बालक राम ने बताया कि करन की पत्नी अंजू बच्चों के साथ रामादेवी में रह रही है।
गांव में मातम का माहौल छाया
करन की छह वर्षीय बेटी आर्या व दो वर्ष का बेटा आर्यन है। इधर सूचना मिलने के बाद घर में कोहराम मचा हुआ था, मां सरस्वती और पत्नी बेसुध थी। वहीं, गांव में मातम का माहौल छाया हुआ था। पिता बालक राम ने बताया कि उन्हें बेटे की शहादत पर गर्व है। परिवार वह गांव के लोग प्यार से उसे भीम भी कहा करते थे।
करन बेहद मिलनसार और लोगों का चहेता था
हमले में बलिदान होकर उसने देश ही नहीं कानपुर और चौबेपुर का भी नाम रोशन किया है। गांव के लोगों ने बताया कि करन बेहद मिलनसार था और लोगों का चहेता था। वह जब गांव आता था, तो लोगों के बीच घूल मिल जाता था। पूरा गांव भीम की शहादत पर नम आंखों से गर्व कर रहा है।