टेनरी विवाद: कब्जा करवाने में साहब का खेल, खरीदने की कर चुका है डील, फोन बंद कर हुआ अंडरग्राउंड
जाजमऊ में विवादित टेनरी पर कब्जा कराने की साजिश साहब नाम से मशहूर टेनरी मालिक ने रची थी। साहब ने इस टेनरी को खरीदने की डील कर खुद खाली करवाने की जिम्मेदारी ली थी।
विस्तार
कानपुर में जाजमऊ स्थित शालीमार टेनरी पर कब्जे को लेकर हुए बवाल के पीछे एक टेनरी मालिक की बड़ी भूमिका है। यह टेनरी मालिक साहब के नाम से मशहूर है। जानकारी मिली है कि साहब ने शालीमार टेनरी खरीदने के लिए एक पक्ष से डील कर ली थी। खुद उसने कब्जा खाली कराने की जिम्मेदारी ले ली थी। इस वजह से डील उचित दामों के बजाए बेहद कम पर डील हुई थी।
अभी तक इस तक पुलिस की जांच की आंच नहीं पहुंची है। बवाल के बाद वह फोन बंद कर अंडरग्राउंड हो गया है। बचने की जुगत में लगा हुआ है। बता दें कि जाजमऊ 150 फीट रोड पर स्थित शालीमार टेनरी को लेकर 13 जुलाई को बवाल हो गया था। एक पक्ष में दिवंगत टेनरी मालिक की पत्नी शहनाज जहां हैं और दूसरे पक्ष में उनका भतीजा। शहनाज की तरफ से पूर्व भाजपा नेता नारायण सिंह भदौरिया, तो दूसरी तरफ से सपा नेता अपने-अपने समर्थकों के साथ जुटे थे।
दोनों पक्षों में जमकर बवाल हुआ था। मंगलवार को जानकारी मिली थी कि इसके पीछे एक बड़े टेनरी मालिक शामिल था। जिसने नारायण सिंह भदौरिया को एक करोड़ में टेनरी खाली कराने ठेका दिया था। बुधवार को इस संबंध और एक अहम जानकारी मिली। पता चला कि यह टेनरी मालिक साहब के नाम से मशहूर है। उसने खुद ही एक पक्ष से टेनरी औने पौने दामों में खरीदने की डील कर चुका था। जब बात दूसरे पक्ष की कब्जे की आई थी तो उसने कहा था कि वह कब्जा खाली करवा लेगा लेकिन ऐसा हो नहीं सका।
टेनरी मालिक का उन्नाव में बड़ा रैकेट
टेनरी मालिक कई पुलिसकर्मियों का करीबी है। एक थानेदार उसकी आवभगत में लगा रहता है। इसलिए उसके हौसले बढ़े हैं। चकेरी में वह किराए के फ्लैट में रहता है। उसका पूरा साम्राज्य उन्नाव में है। जमीन कब्जे के तमाम आरोप उस पर लगे हैं। बड़ी जमीनों पर कब्जे भी किए हैं। शालीमार टेनरी पर कब्जे की साजिश विफल होने के बाद से साहब अंडरग्राउंड हो गया है। उसने एक थानेदार से संपर्क किया है। थानेदार ने बचाव करने का आश्वासन भी दिया है। देखना है कि उच्चाधिकारी इस मसले को संज्ञान में लेते हैं या नहीं।
कुछ पत्रकारों का शागिर्द है साहब
शहर के कुछ पत्रकार टेनरी मालिक साहब के बेहद करीबी हैं। वह उसको पनाह देकर कार्रवाई से बचाने के प्रयास में हर बार जुटे रहते हैं। इस बार भी वह इसी जद्दोजहद में लगे हैं।
नारायण के करीबियों पर अब तक कार्रवाई नहीं
नारायण सिंह भदौरिया जमानत पर है। उसके साथी रॉकी यादव व विवेक निगम समेत अन्य की भी गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई है। शुरूआती कार्रवाई के बाद से पुलिस सुस्त पड़ गई है। सवाल है कि जिस तरह से नारायण सिंह भदौरिया अफसरों पर वकीलों व नेताओं के जरिए दबाव बनाने के प्रयास में लगा है क्या यह उसी का असर है।
मामले में प्रत्येक पहलू की जांच कर रही है। अगर कोई साजिश में शामिल रहा है, तो उसको भी छोड़ा नहीं जाएगा। टीमें लगातार आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास में लगी हैं। - प्रमोद कुमार, डीसीपी पूर्वी