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कौन है पीएम और सीएम! कैसे संवरेगा नौनिहालों का भविष्य, बंटाधार शिक्षा के ये उदाहरण आपको झकझोर देंगे
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 11 Jul 2018 10:00 PM IST
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टूटी फर्श के बीच बैठे बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में परिषदीय स्कूलों के जूनियर कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों को प्रदेश के मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के नाम तक नहीं पता है। यह स्थिति कहीं सुदूर ग्रामीण इलाके के स्कूल की नहीं है, बल्कि कलेक्ट्रेट के पीछे स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय की है। प्राथमिक विद्यालय बहवलपुर शिक्षामित्र के सहारे चल रहा है। सहायक व प्रधानाध्यापक अक्सर नदारद रहते हैं। माती मुख्यालय के करीब के स्कूलों की हालत यह है तो गांवों के स्कूलों का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार नहीं हो पा रहा है। बुधवार को अमर उजाला टीम परिषदीय स्कूलों की हकीकत देखने निकली तो हालात दयनीय मिले। कलेक्ट्रेट परिसर से सटे हुए उच्च प्राथमिक विद्यालय माती किशुनपुर में शैक्षिक स्तर बेहद कमजोर मिला। यहां कक्षा सात व आठ के कई बच्चे अपने देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम तक नहीं बता पाए।
कक्षा सात की छात्रा माधुरी ने देश के पीएम का नाम योगी आदित्यनाथ बताया और सीएम का नाम नरेंद्र मोदी बताया। अन्य बच्चों ने भी इसी पर सहमति जताई। कक्षा 7 की शिवाली, पारूल, पूजा किरन, सौरभ आदि को 20 तक पहाड़ा नहीं आता है। प्रधानाध्यापिका मीना कुमारी व सहायक अवशेष कुमार मौजूद मिले जबकि शिक्षिका पारूल मित्तल नदारद मिली।
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बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार नहीं हो पा रहा है। बुधवार को अमर उजाला टीम परिषदीय स्कूलों की हकीकत देखने निकली तो हालात दयनीय मिले। कलेक्ट्रेट परिसर से सटे हुए उच्च प्राथमिक विद्यालय माती किशुनपुर में शैक्षिक स्तर बेहद कमजोर मिला। यहां कक्षा सात व आठ के कई बच्चे अपने देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम तक नहीं बता पाए।
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कक्षा सात की छात्रा माधुरी ने देश के पीएम का नाम योगी आदित्यनाथ बताया और सीएम का नाम नरेंद्र मोदी बताया। अन्य बच्चों ने भी इसी पर सहमति जताई। कक्षा 7 की शिवाली, पारूल, पूजा किरन, सौरभ आदि को 20 तक पहाड़ा नहीं आता है। प्रधानाध्यापिका मीना कुमारी व सहायक अवशेष कुमार मौजूद मिले जबकि शिक्षिका पारूल मित्तल नदारद मिली।
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शिक्षा के नाम पर बच्चों के साथ खिलवाड़
प्राथमिक विद्यालय मदारपुर के शौचालय के टूटे दरवाजे
- फोटो : अमर उजाला
परिसर में स्थित प्राथमिक विद्यालय के बच्चों का शैक्षिक स्तर बेहद कमजोर मिला। प्रधानाध्यापिका अनामिका पाल ने बताया कि सहायक सरिता दोहरे 15 दिन के मेडिकल अवकाश पर हैं। स्कूल में पंजीकृत 71 में 43 बच्चे मौजूद थे। कक्षा 5 की नंदनी, प्रीती देवी, शमां आदि छात्राएं बीस तक पहाड़ा नहीं सुना पाए। प्राथमिक विद्यालय मदारपुर में सहायक अध्यापक स्नेहलता और शिक्षामित्र सरला मौजूद थीं, जबकि प्रधानाध्यापिका नीरा सिंह नदारद थीं।
स्कूल में पंजीकृृत 46 के सापेक्ष मौके पर 17 बच्चे मिले। प्राथमिक विद्यालय बहवलपुर में केवल शिक्षामित्र सरिता देवी मौजूद मिलीं। यहां के प्रधानाध्यापक अंजू कटियार व सहायक सुधीर कुमार नदारद थे। यहां पंजीकृत 39 बच्चों में 16 मौजूद थे। इन दोनों स्कूलों का शैक्षिक स्तर कमजोर था। ग्रामीणों ने शिक्षकों पर लापरवाही का आरोप लगाया।
परिषदीय स्कूलों में शिक्षा के नाम पर जहां बच्चों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। प्राथमिक विद्यालय मदारपुर के कमरों की फर्श टूटी है, फर्नीचर नहीं है। बच्चे गड्ढ़ों में टाटपट्टी बिछाकर बैठने को मजबूर हैं। स्कूल की मरम्मत के लिए धन मिलता फिर भी हेड मास्टर ने जरूरत समझ में नहीं आ रही है और न ही किसी अधिकारी को यहां की दुर्दशा दिख रही है। शौचालय के जर्जर हालत में हैं दरवाजे टूटे हैं। बच्चे व शिक्षक सभी खुले में ही शौच जाने का मजबूर हैं। वहीं माती किशुनपुर प्राथमिक विद्यालय के शौचालय में ताला लगा था, जबकि जूनियर स्कूल के शौचालय गंदगी से पटे पड़े थे।
स्कूल में पंजीकृृत 46 के सापेक्ष मौके पर 17 बच्चे मिले। प्राथमिक विद्यालय बहवलपुर में केवल शिक्षामित्र सरिता देवी मौजूद मिलीं। यहां के प्रधानाध्यापक अंजू कटियार व सहायक सुधीर कुमार नदारद थे। यहां पंजीकृत 39 बच्चों में 16 मौजूद थे। इन दोनों स्कूलों का शैक्षिक स्तर कमजोर था। ग्रामीणों ने शिक्षकों पर लापरवाही का आरोप लगाया।
परिषदीय स्कूलों में शिक्षा के नाम पर जहां बच्चों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। प्राथमिक विद्यालय मदारपुर के कमरों की फर्श टूटी है, फर्नीचर नहीं है। बच्चे गड्ढ़ों में टाटपट्टी बिछाकर बैठने को मजबूर हैं। स्कूल की मरम्मत के लिए धन मिलता फिर भी हेड मास्टर ने जरूरत समझ में नहीं आ रही है और न ही किसी अधिकारी को यहां की दुर्दशा दिख रही है। शौचालय के जर्जर हालत में हैं दरवाजे टूटे हैं। बच्चे व शिक्षक सभी खुले में ही शौच जाने का मजबूर हैं। वहीं माती किशुनपुर प्राथमिक विद्यालय के शौचालय में ताला लगा था, जबकि जूनियर स्कूल के शौचालय गंदगी से पटे पड़े थे।
दूध वितरण में खानापूरी...
प्राथमिक विद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे को डेढ़ सौ एमएल व जूनियर कक्षाओं में पढने वाले बच्चों को दो सौ मिलीलीटर दूध दिया जाना है। माती किशुनपुर प्राथमिक स्कूल में 43 बच्चे मौजूद थे। बच्चों से दूध मिलने की बाबत पूछा गया तो उन्होंने दूध मिलने की बात से इंकार कर दिया जबकि शिक्षिका ने बताया कि तीन लीटर दूध लाए थे।
यदि हेड मास्टर की बात मान ली जाए तो डेढ़ सौ एमएल के हिसाब से तीन लीटर दूध केवल 20 बच्चों के लिए पर्याप्त है। जबकि, स्कूल में 43 बच्चे उपस्थित थे तो उनके लिए साढ़े छह लीटर दूध की आवश्यकता थी। दूध वितरण में भी स्कूलों में खानापूरी की जा रही है।
बोले जिम्मेदार
मुख्यालय के नजदीक विद्यालय में इस तरह से हो रही लापरवाही की जानकारी नहीं है। औचक निरीक्षण कर शैक्षिक स्तर सुधारने का प्रयास किया जाएगा और लापरवाही करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई की जाएगी - संगीता सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी
यदि हेड मास्टर की बात मान ली जाए तो डेढ़ सौ एमएल के हिसाब से तीन लीटर दूध केवल 20 बच्चों के लिए पर्याप्त है। जबकि, स्कूल में 43 बच्चे उपस्थित थे तो उनके लिए साढ़े छह लीटर दूध की आवश्यकता थी। दूध वितरण में भी स्कूलों में खानापूरी की जा रही है।
बोले जिम्मेदार
मुख्यालय के नजदीक विद्यालय में इस तरह से हो रही लापरवाही की जानकारी नहीं है। औचक निरीक्षण कर शैक्षिक स्तर सुधारने का प्रयास किया जाएगा और लापरवाही करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई की जाएगी - संगीता सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी