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यहां जान जोखिम में डाल शिक्षा लेने पर मजबूर छात्र 

Thu, 10 Nov 2016 10:49 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 10 Nov 2016 10:49 PM IST
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student taking life risk for education
भीखमपुर के जर्जर भवन के कारण बाहर पढ़ते बच्चे - फोटो : अमर उजाला
सरकार विद्यालयों में शिक्षा के स्तर में गुणवत्ता लाने और भवनों की कायाकल्प के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर देती है। इसके बाद भी विद्यालयों में सुधार होता नजर नहीं आ रहा है। औरैया के अधिकांश विद्यालयों की जर्जर और बदहाल बिल्डिंगों में नौनिहालों को पढ़ाया जा रहा है। कभी भी यह जर्जर इमारतें जमींदोज होकर मासूमों की जिंदगी छीन सकती हैं। कई बार विद्यालयों की छतों से गिरे मलबे से बच्चे घायल भी हो चुके हैं। इसके बावजूद शिक्षा महकमे के अधिकारी सुध नहीं ले रहे हैं। 
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दशक पुराने इन विद्यालयों के भवन की क्षमता समाप्त

student taking life risk for education
छत से टूट टूट कर गिरता है प्लास्टर - फोटो : अमर उजाला
जिले में 1063 प्राथमिक विद्यालय और 453 जूनियर हाईस्कूल विद्यालय है। इन विद्यालयों में करीब 200 जर्जर अवस्था में निष्प्रयोज्य साबित हो रहे हैं। कई दशक पुराने इन विद्यालयों के भवन की क्षमता समाप्त हो चुकी है। इससे यह कभी गिर सकते हैं।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि विद्यालय भवन परिसर में कमरों की संख्या के अनुसार प्रत्येक शिक्षा सत्र के दौरान प्रधानाध्यापकों को पांच हजार से लेकर आठ हजार रुपये का बजट मेंटीनेंस रंगाई पुताई व मरम्मतीकरण के लिए दिया जाता है। इसके अलावा सभी विद्यालयों को पांच हजार रुपये का बजट स्टेशनरी व आवश्यक सामान की खरीदारी के लिए मुहैया कराया जाता है। प्रधानाध्यापकों के अनुसार मंहगाई के दौर में यह बजट पर्याप्त नहीं है। इतने में सिर्फ पुताई संभव हो पाती है, जबकि मरम्मतीकरण का कार्य नहीं कराया जा सकता है। 

 
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