बकराें काे अंधा बना रहा वायरल बुखार, अाप भी जानें लक्षण
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बाहर से आए बकरे फैला रहे बीमारी
बीमारियों की जड़ है मांस
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. विशाल गुप्ता बताते हैं कि दवाएं केमिकल से बनी होती हैं। मांस पकाने से वायरस और बैक्टीरिया तो मर जाते हैं लेकिन केमिकल नहीं खत्म होते। जिन जानवरों को हाई डोज एंटीबायोटिक और अन्य दवाएं दी जा रही हैं उनका मांस खाने से बीमार होना तय है। मान लीजिए किसी जानवर को जेंटामाइसिन का इंजेक्शन लगाया गया। यह इंजेक्शन ब्लड के माध्यम से उसके मांस में आएगा। इस मांस को खाने वाले आदमी के पेट में जाकर जेंटामाइसिन आंतों पर असर डालेगा। इससे उल्टी-दस्त हो सकती है। यदि यह मांस शरीर में पच गया तो किडनी और लिवर को असर पहुंचाएगा इसलिए स्वस्थ बकरे का मांस खाएं और कम से कम।
ये है बीमार बकराें के लक्षण
-नाक से पानी आना
- सुस्ती
- शरीर गर्म रहना
- ठीक से न चल पाना
- आंखों की रोशनी जाना
एंटीबायोटिक देनी पड़ रही
बुखार से तप रहे बकरों को एंटीबायोटिक इंजेक्शन और गोलियां दी जा रही हैं। बेचने वाले इन्हें जल्द से जल्द ठीक करने के लिए डॉक्टरों से गुहार लगा रहे हैं। एक दिन में बुखार ठीक नहीं हो रहा है तो दूसरे दिन फिर डॉक्टर के पास बकरे को लेकर पहुंच जा रहे हैं। जल्दी ठीक करने के चक्कर में बकरों को हाई डोज एंटीबायोटिक धड़ल्ले से दी जा रही है।