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Kanpur News: कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ
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सैफई। गांव बहादुपुर में मंगलवार को श्रीमद्भागवत कथा का कलश यात्रा के साथ शुभारंभ किया गया। कलश यात्रा आयोजन स्थल से ग्राम नरोहली, बिजपुरी, पुठिया, नगला बरी, नगला राठौर, हैवरा कोठी होते हुए वापस कथा स्थल पर पहुंची।
पवित्र जलस्त्रोत से जल भरने के बाद कन्याओं ने सिर पर कलश रखकर कलश यात्रा निकाली। यात्रा में महिला श्रद्धालु शामिल रहीं। आरती के साथ शुरु किए गए श्रीमद् भागवत कथा में सुनील शास्त्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को सर्वप्रथम इसकी महिमा से अवगत कराया।
शास्त्री ने बताया कि इस कथा को सबसे पहले अभिमन्यु के बेटे राजा परीक्षित ने सुनी थी, जिसके प्रभाव से उसके अंदर तक्षक नामक नाग के काटने से होने वाली मृत्यु का भय दूर हुआ और उसने मोक्ष को प्राप्त किया था। परीक्षित सुरेंद्र सिंह यादव एवं यज्ञकर्ता आचार्य दिनेश चंद्र ने विशेष सहयोग किया।
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अहंकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है: अमरीश शुक्ला
जसवंतनगर। किसी भी व्यक्ति को अहंकार नहीं करना चाहिए, अहंकार बुद्धि और ज्ञान का हरण कर लेता है। अहंकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। यह बात वृंदावन धाम से पधारे सरस कथा वाचक अमरीश शुक्ला ने ग्राम नगला छंद काली माता पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कहीं।
मंगलवार को वृंदावन धाम से पधारे सरस कथा वाचक ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया। प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। उन्होंने बताया कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था।
भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। शास्त्री ने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। जैसे ही कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ पूरा पंडाल जयकारों से गूंजने लगा।
इस कार्यक्रम में परीक्षित की भूमिया में मोहिनी देवी तथा श्याम चौहान थे। इसके अलावा शिवांत मोनू मिश्रा, सचिन गुप्ता, उर्मिला देवी, प्रदीप ठाकुर, अजीत सिंह, कौशलेंद्र, सर्वेन्द्र, शैलेन्द्र, रवि चौहान, आदि व्यवस्था में जुटे रहे।
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पवित्र जलस्त्रोत से जल भरने के बाद कन्याओं ने सिर पर कलश रखकर कलश यात्रा निकाली। यात्रा में महिला श्रद्धालु शामिल रहीं। आरती के साथ शुरु किए गए श्रीमद् भागवत कथा में सुनील शास्त्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को सर्वप्रथम इसकी महिमा से अवगत कराया।
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शास्त्री ने बताया कि इस कथा को सबसे पहले अभिमन्यु के बेटे राजा परीक्षित ने सुनी थी, जिसके प्रभाव से उसके अंदर तक्षक नामक नाग के काटने से होने वाली मृत्यु का भय दूर हुआ और उसने मोक्ष को प्राप्त किया था। परीक्षित सुरेंद्र सिंह यादव एवं यज्ञकर्ता आचार्य दिनेश चंद्र ने विशेष सहयोग किया।
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अहंकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है: अमरीश शुक्ला
जसवंतनगर। किसी भी व्यक्ति को अहंकार नहीं करना चाहिए, अहंकार बुद्धि और ज्ञान का हरण कर लेता है। अहंकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। यह बात वृंदावन धाम से पधारे सरस कथा वाचक अमरीश शुक्ला ने ग्राम नगला छंद काली माता पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कहीं।
मंगलवार को वृंदावन धाम से पधारे सरस कथा वाचक ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया। प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। उन्होंने बताया कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था।
भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। शास्त्री ने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। जैसे ही कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ पूरा पंडाल जयकारों से गूंजने लगा।
इस कार्यक्रम में परीक्षित की भूमिया में मोहिनी देवी तथा श्याम चौहान थे। इसके अलावा शिवांत मोनू मिश्रा, सचिन गुप्ता, उर्मिला देवी, प्रदीप ठाकुर, अजीत सिंह, कौशलेंद्र, सर्वेन्द्र, शैलेन्द्र, रवि चौहान, आदि व्यवस्था में जुटे रहे।