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राहत की चाहत
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Mon, 29 Feb 2016 01:31 AM IST
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भाजपा के ‘अच्छे दिन आएंगे’ के नारे से उठी उम्मीदें अभी तक कायम हैं। एनडीए सरकार के तीसरे बजट से हर कोई राहत की चाहत पाले है। संपत्ति की बिक्री पर टैक्स में कोई राहत चाहता है तो कोई व्यक्तिगत करदाताओं की तरह उद्यमों का टैक्स स्लैब। सेवा कर और कारपोरेट टैक्स में सुधार के साथ सीमेंट से एक्साइज का भेदभाव खत्म होने की मांगें भी हंै। व्यापारियों ने पेंशन और दुर्घटना बीमा की चाहत बताई तो सराफा बाजार ने चाहा है कि दो लाख की खरीद पर पैन अनिवार्यता खत्म हो। लाल इमली के मजदूरों को खुशी मिल चलने से होगी और आयकर दाताओं को बजट 2016-17 में केंद्र सरकार से राहत की उम्मीद है।
व्यापारियों को मिले पेंशन और दुर्घटना बीमा
खुदरा व्यापारियों को उम्मीद है कि ऑनलाइन कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए बजट में कुछ प्रावधान होंगे। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्याम बिहारी मिश्रा का कहना है कि काफी समय से ऑनलाइन कंपनियों के लिए नियामक आयोग बनाने की मांग की जा रही है। सरकार नगद खरीद पर पैनकार्ड अनिवार्यता की सीमा पांच लाख करे। खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम में संशोधन कर इसे सरल बनाया जाए। जीएसटी में उत्पादक या विदेशों से आयात पर प्रथम बिंदु पर टैक्स लगे। व्यापारियों के लिए दुर्घटना बीमा और पेंशन की व्यवस्था हो। व्यापारी कल्याण आयोग का गठन किया जाए। टोल टैक्स से पूरी तरह मुक्त रखा जाए। ट्रांसपोर्टर इसके लिए हर साल 10 हजार रुपये एकमुश्त देने को तैयार है।
संपत्ति बिक्री पर टैक्स में मिल सकती है छूट
बजट में संपत्ति की बिक्री पर दिए जाने वाले टैक्स में राहत मिल सकती है। टैक्स रिफार्म कमेटी ने इसके लिए वित्त मंत्री से सिफारिश की है। अमल हुआ तो संपत्ति की बिक्री वाली तिथि के बजाय संपत्ति के एग्रीमेंट के समय वाली कीमतों पर टैक्स देना होगा। इससे बिल्डरों को तो लाभ मिलेगा ही, उन लोगों को भी राहत मिलेगी, जिनकी जमीन की कीमत पहले से कम हुई है। आयकर की धारा 50 सी के तहत वर्तमान में यह प्रावधान है कि जमीन या भवन बेचने में होने वाले लाभ पर 20 फीसदी टैक्स देना होता है। संपत्ति चाहे जितने की बिके लेकिन टैक्स सर्किल रेट के हिसाब से लिया जाता है। मसलन किसी की जमीन 40 लाख रुपये में बिकती है और सर्किल रेट के हिसाब से उसकी कीमत 50 लाख है तो उसे टैक्स 50 लाख पर ही देना होगा। टैक्स रिफार्म कमेटी ने कहा है कि जमीन की बिक्री के समय लागू सर्किल रेट के बजाय एग्रीमेंट के समय वाले सर्किल रेट से टैक्स लिया जाए। इससे करदाता को टैक्स में थोड़ी राहत मिलेगी।
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व्यापारियों को मिले पेंशन और दुर्घटना बीमा
खुदरा व्यापारियों को उम्मीद है कि ऑनलाइन कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए बजट में कुछ प्रावधान होंगे। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्याम बिहारी मिश्रा का कहना है कि काफी समय से ऑनलाइन कंपनियों के लिए नियामक आयोग बनाने की मांग की जा रही है। सरकार नगद खरीद पर पैनकार्ड अनिवार्यता की सीमा पांच लाख करे। खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम में संशोधन कर इसे सरल बनाया जाए। जीएसटी में उत्पादक या विदेशों से आयात पर प्रथम बिंदु पर टैक्स लगे। व्यापारियों के लिए दुर्घटना बीमा और पेंशन की व्यवस्था हो। व्यापारी कल्याण आयोग का गठन किया जाए। टोल टैक्स से पूरी तरह मुक्त रखा जाए। ट्रांसपोर्टर इसके लिए हर साल 10 हजार रुपये एकमुश्त देने को तैयार है।
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संपत्ति बिक्री पर टैक्स में मिल सकती है छूट
बजट में संपत्ति की बिक्री पर दिए जाने वाले टैक्स में राहत मिल सकती है। टैक्स रिफार्म कमेटी ने इसके लिए वित्त मंत्री से सिफारिश की है। अमल हुआ तो संपत्ति की बिक्री वाली तिथि के बजाय संपत्ति के एग्रीमेंट के समय वाली कीमतों पर टैक्स देना होगा। इससे बिल्डरों को तो लाभ मिलेगा ही, उन लोगों को भी राहत मिलेगी, जिनकी जमीन की कीमत पहले से कम हुई है। आयकर की धारा 50 सी के तहत वर्तमान में यह प्रावधान है कि जमीन या भवन बेचने में होने वाले लाभ पर 20 फीसदी टैक्स देना होता है। संपत्ति चाहे जितने की बिके लेकिन टैक्स सर्किल रेट के हिसाब से लिया जाता है। मसलन किसी की जमीन 40 लाख रुपये में बिकती है और सर्किल रेट के हिसाब से उसकी कीमत 50 लाख है तो उसे टैक्स 50 लाख पर ही देना होगा। टैक्स रिफार्म कमेटी ने कहा है कि जमीन की बिक्री के समय लागू सर्किल रेट के बजाय एग्रीमेंट के समय वाले सर्किल रेट से टैक्स लिया जाए। इससे करदाता को टैक्स में थोड़ी राहत मिलेगी।
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