सपा-कांग्रेस के ये रणनीतिकार हुए फेल, अब झेलनी पड़ रही दुश्वारियां
संजीवनी नहीं आई काम
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गौरतलब हो यूपी विधानसभा चुनाव से पहले प्रशांत किशोर कांग्रेस को संजीवनी देने पहुंचे थे इसलिए ये खासी चर्चा में रहे। कांग्रेस में जान डालने के लिए उन्होंने जो योजना तैयार की थी कई दिनों तक मीडिया में उसका भौकाल कायम रहा। एक वक्त लगने लगा था कि कांग्रेस की छवी सुधारने में प्रशांत कामयाब हो जाएंगे।
इसकी बड़ी वजह यह भी थी कि बीते लोकसभा चुनाव में प्रशांत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रचार प्रसार का जिम्मा संभाला था जिसमें वे सफल हुए थे। लेकिन प्रशांत का जलवा इस चुनाव में बरकरार नहीं रहा। हालांकि इस कांग्रसे को मिली हार का ठीकरा उनके माथे नहीं फोड़ा जा सकता। वह केवल मीडिया मैनेजमैंट तक ही सीमित थे। ऐसा खुद उनका कहना है। उन्होंने चुनाव के नतीजे आने के बाद मीडिया में बयान दे डाला। कहा कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने उनकी बातों को नहीं माना इसलिए कांग्रेस चुनाव हारी है।
लेकिन ये बात सच है कि चुनाव से पहले राहुल का गुरू बनने की भूमिका में प्रशांत किशोर ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। अंदर की बात तो कोई नहीं जानता कि चुनाव में कांग्रेस ने प्रशांत की बातों को फोलो किया या नहीं। कहा यह भी जा रहा है कि प्रशांत ऐसा बयान सिर्फ इसलिए दे रहें है ताकि उन्हें कोई अगला मिल सके और उनकी गाड़ी चलती रहे।
वही सपा में अभी से उन नामों पर चर्चा शुरू हो गई है जो इस चुनाव में अखिलेश के बेहद खास रहे। सेंट्रल यूपी के पूर्वी छोर पर स्थित हरदोई, उन्नाव और फतेहपुर जिले में भी भाजपा ने सपा को जोर का झटका दिया है। यहां सपा के राष्ट्रीय महासचिव नरेश अग्रवाल और प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम की प्रतिष्ठा सीधे तौर पर दांव पर लगी थी। नरेश अग्रवाल किसी तरह अपने बेटे नितिन अग्रवाल को जीता पाए।
हरदोई जिले में पिछले चुनाव में सपा को छह सीटें मिली थीं, जबकि दो बसपा के पास थी। इस बार कड़ी टक्कर के बीच सपा के राष्ट्रीय महासचिव नरेश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल तो चुनाव जीत गए, लेकिन अन्य सभी सीटों पर भाजपा विजयी रही।
इसी तरह उन्नाव में सपा के पास चार और भाजपा व बसपा के एक-एक सीट थी। यहां मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सिपहसलार एमएलसी सुनील सिंह साजन व अन्य नेताओं की सीधे तौर पर सक्रियता थी। इसके बाद भी यहां सपा ने सभी सीटें गंवा दी। भाजपा ने पांच तो बसपा को एक सीट पर कामयाबी हासिल की है।