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पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने माना, नहाने लायक नहीं है ‘कानपुर का गंगाजल’
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 03 Jan 2017 03:45 PM IST
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कानपुर की गंगा में बढ़ा प्रदूषण
- फोटो : अमर उजाला
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पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की टीम ने ये माना है कि ‘कानपुर का गंगाजल’ अब नहाने लायक भी नहीं है। बोर्ड की टीम की जांच के बाद बताया कि गंगाजल का सामान्य कलर (गंदगी) 10 हैजन होती है, जबकि सोमवार को जांच में गंदगी 20 हैजन मिली। 20 हैजन कलर वाला पानी पीने लायक नहीं होता। ऐसे पानी में नहाने या देर तक खड़ा रहना स्किन के लिए नुकसानदायक होता है।
मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर और एटा की फैक्ट्रियों के कचरे से प्रदूषित हो चुकी काली नदी का कचरा अब गंगा को और प्रदूषित कर रहा है। पिछले कई दिनों से गंगा में जो काला पानी आ रहा है वह काली नदी का ही है, जिससे काफी बदबू आ रही है। काली नदी का पानी गंदे नाले के पानी से भी बद्तर हो गया है। पशुओं ने भी पीना छोड़ दिया है। सोमवार को गंगा काली होने का खुलासा होने के बाद उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम गंगा बैराज पर पहुंची। जांच में गंगा जल में गंदगी मानकों से दोगुनी पाई गई। इसकी रिपोर्ट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजी गई है। उधर, नरौरा से ज्यादा पानी छोड़े जाने से गंगा के जलस्तर में इजाफा हुआ है। माघ मेले के मद्देनजर और पानी छोड़ा जाएगा।
कई जिलों की गंदगी गिरा रही कानपुर की गंगा में
फर्रुखाबाद की काली नदी मुजफ्फरनगर के जानगढ़ तहसील के अंतवाड़ा गांव से निकलती है। बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, एटा और कन्नौज समेत प्रदेश के नौ जिलों में बहती है। मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, एटा आदि की फैक्ट्रियों का गंदा पानी इसी में गिराया जाता है। काली नदी में चार दिन से काला पानी आ रहा है। कन्नौज में महादेवी वर्मा घाट पर यह नदी गंगा में मिल जाती है। इस नदी के किनारे बसे गांव सहसापुर, ईसेपुर, नवादा, नगरिया, अभयपुर, कुम्हौली, नगला जसे, कमालपुर, बंथल शाहपुर और बहोरिकपुर के लोगों का कहना है कि मेरठ में लगी गन्ना मिल का पेराई सत्र शुरू होने पर भी यह समस्या हर साल बढ़ती है। मेरठ जिले की 31 इंडस्ट्रीज, शुगर मिल, पेपर मिल, टेक्सटाइल, डिस्लरी आदि का गंदा पानी काली नदी में ही मिलाया जाता है, जिससे इस नदी के पानी में मैग्नीज और लोहा जैसे भारी तत्व मौजूद हो गए हैं।
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उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम की जांच के बाद इसके क्षेत्रीय अधिकारी मोहम्मद सिकंदर ने बताया कि गंगाजल का सामान्य कलर (गंदगी) 10 हैजन होती है, जबकि सोमवार को जांच में गंदगी 20 हैजन मिली। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की उप क्षेत्रीय अधिकारी शिप्रा ने बताया कि नदी का बहाव कम होने से भी पानी गंदा और उसमें से बदबू आने लगती है क्योंकि उसमें घास-फूस आदि सड़ती है। 20 हैजन कलर वाला पानी पीनो लायक नहीं होता। ऐसे पानी में नहाने या देर तक खड़ा रहना स्किन के लिए नुकसानदायक होता है।
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मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर और एटा की फैक्ट्रियों के कचरे से प्रदूषित हो चुकी काली नदी का कचरा अब गंगा को और प्रदूषित कर रहा है। पिछले कई दिनों से गंगा में जो काला पानी आ रहा है वह काली नदी का ही है, जिससे काफी बदबू आ रही है। काली नदी का पानी गंदे नाले के पानी से भी बद्तर हो गया है। पशुओं ने भी पीना छोड़ दिया है। सोमवार को गंगा काली होने का खुलासा होने के बाद उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम गंगा बैराज पर पहुंची। जांच में गंगा जल में गंदगी मानकों से दोगुनी पाई गई। इसकी रिपोर्ट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजी गई है। उधर, नरौरा से ज्यादा पानी छोड़े जाने से गंगा के जलस्तर में इजाफा हुआ है। माघ मेले के मद्देनजर और पानी छोड़ा जाएगा।
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कई जिलों की गंदगी गिरा रही कानपुर की गंगा में
फर्रुखाबाद की काली नदी मुजफ्फरनगर के जानगढ़ तहसील के अंतवाड़ा गांव से निकलती है। बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, एटा और कन्नौज समेत प्रदेश के नौ जिलों में बहती है। मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, एटा आदि की फैक्ट्रियों का गंदा पानी इसी में गिराया जाता है। काली नदी में चार दिन से काला पानी आ रहा है। कन्नौज में महादेवी वर्मा घाट पर यह नदी गंगा में मिल जाती है। इस नदी के किनारे बसे गांव सहसापुर, ईसेपुर, नवादा, नगरिया, अभयपुर, कुम्हौली, नगला जसे, कमालपुर, बंथल शाहपुर और बहोरिकपुर के लोगों का कहना है कि मेरठ में लगी गन्ना मिल का पेराई सत्र शुरू होने पर भी यह समस्या हर साल बढ़ती है। मेरठ जिले की 31 इंडस्ट्रीज, शुगर मिल, पेपर मिल, टेक्सटाइल, डिस्लरी आदि का गंदा पानी काली नदी में ही मिलाया जाता है, जिससे इस नदी के पानी में मैग्नीज और लोहा जैसे भारी तत्व मौजूद हो गए हैं।
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उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम की जांच के बाद इसके क्षेत्रीय अधिकारी मोहम्मद सिकंदर ने बताया कि गंगाजल का सामान्य कलर (गंदगी) 10 हैजन होती है, जबकि सोमवार को जांच में गंदगी 20 हैजन मिली। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की उप क्षेत्रीय अधिकारी शिप्रा ने बताया कि नदी का बहाव कम होने से भी पानी गंदा और उसमें से बदबू आने लगती है क्योंकि उसमें घास-फूस आदि सड़ती है। 20 हैजन कलर वाला पानी पीनो लायक नहीं होता। ऐसे पानी में नहाने या देर तक खड़ा रहना स्किन के लिए नुकसानदायक होता है।