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सोशल साइट से मिला क्राइम करने का आइडिया, यूट्यूब के वीडियो देख सीखीं नोट छापने की बारीकियां

Mon, 02 Dec 2019 07:34 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Mon, 02 Dec 2019 07:34 PM IST
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Police arrest a gang who Learned specifics of printing notes by watching YouTube videos
पुलिस की गिरफ्त में नकली नोट छापने वाला गिरोह - फोटो : अमर उजाला
हरदोई में श्रवण देवी मंदिर के पास किराए के मकान में पिछले पांच माह से 100 व 500 सौ रुपये के नकली नोट न सिर्फ छापे जा रहे थे, बल्कि उन्हें जिले के साथ ही आस पास के जनपदों में चलाया व बेंचा जा रहा था। लगातार शिकायतें मिलने के बाद पुलिस ने मुखबिरों का नेटवर्क सक्रिय किया तो रविवार की रात पहले सप्लायर व इसके बाद पूरा गिरोह पुलिस के हत्थे चढ़ गया। 
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सुरसा के ग्राम रामपुर निवासी अतुल पुत्र जदुनाथ व आशीष पुत्र सत्यप्रकाश निवासी ग्राम घमुइया थाना सुरसा दोनों अच्छे मित्र हैं। बिलग्राम क्षेत्र के एक डिग्री कॉलेज में बीएससी के छात्र हैं। दोनों की पिछले काफी समय से ग्राम घमोइया निवासी आलोक पुत्र गंगाराम व शहर के मोहल्ला आजाद नगर निवासी ओमप्रकाश उर्फ गोल्डर पुत्र श्रवण कुमार से दोस्ती थी।
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आधुनिकता की चकाचौंध में फंसकर चारों जल्द से जल्द पैसा कमाना चाहते थे। यही चाहत लोगों से रोजगार की जानकारी जुटाते जुटाते सोशल मीडिया तक पहुंच गई। पुलिस के मुताबिक अतुल ने मोबाइल पर ही यूट्यूब पर एक दिन नकली नोट बनाए जाने का वीडियो देखा। यहीं से उसके मन में यह काम करने की ललक सवार हो गई। पहले उसने अपने दोस्त आशीष व इसके बाद आलोक एवं ओमप्रकाश उर्फ गोल्डन को इसके लिए राजी किया।

काफी प्रयास के बाद जब चारों में सहमति बन गई तो उन्होंने इस काम को अंजाम देने के सुरक्षित ठिकाना तलाश किया। तलाश के दौरान चारों ने मिलकर शहर के श्रवण देवी मंदिर के पास रहने वाले जान पहचान के व्यक्ति का मकान किराए पर लिया और इसके बाद नोट छापने की कोशिश शुरू  हो गई थी। काम मुश्किल था, इस लिए शुरुआत में लोकल प्रिंटर व आम कागज इस्तेमाल करने पर चारों को असफलता का सामना करना पड़ा।

 
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हालांकि बाद में चारों को यूट्यूब पर ही नोट के साइज समेत कागज व ब्रांडेट प्रिंटर आदि के बारे में सटीक जानकारी मिली। सबकुछ पता चलने के बाद लगभग पांच माह पूर्व चारों ने शाजहांपुर से अच्छी क्वालिटी का कागज और ब्रांडेड कलर प्रिंटर एवं कटर आदि खरीदा। कई प्रयास के बाद चारों ने मिलकर 100 और 500 के नोट छापने शुरू कर दिए।

शुरुआती खामियां दूर करने के बाद अब बारी आई नोटों को बाजार में चलाने की। इसका जिम्मा आशीष को सौंपा गया। आशीष को बतौर सप्लायर सामने लाया गया। पुलिस द्वारा किए गए खुलासे के मुताबिक अतुल, आलोक व ओमप्रकाश छापे गए नोटों को आधी कीमत पर आशीष को देते थे, इसके बाद वह कब कहां और कितने में बिकेंगे इसका जिम्मा आशीष संभालता था।

पुलिस के अनुसार आरोपी पांच माह में तीन लाख से अधिक की करंसी छांपकर बाजार में चला चुके थे। आरोपियों ने शाहजहांपुर और बिलग्राम मेले में भी करंसी बेंची और चलाई थी। एसपी आलोक प्रियदर्शी का कहना है कि आरोपियों के बारे में और जानकारी जुटाई जा रही है। 
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