{"_id":"5c3acca3bdec22736d6a011e","slug":"now-this-techniques-will-protect-cyber-attacks","type":"story","status":"publish","title_hn":"साइबर सिक्योरिटी के ये हैं आसान तरीके, आप भी जान लें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साइबर सिक्योरिटी के ये हैं आसान तरीके, आप भी जान लें
Sun, 13 Jan 2019 11:06 AM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 13 Jan 2019 11:06 AM IST
विज्ञापन
केंद्र सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. पीके सक्सेना ने साबइर अटैक से बचने की दी जानकारी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कानपुर स्थित पीएसआईटी में चल रहे क्रिप्टोलॉजी एंड नेटवर्क सिक्योरिटी कार्यशाला के दूसरे दिन केंद्र सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. पीके सक्सेना ने साइबर सिक्योरिटी और ऑनलाइन बैंकिंग पर जानकारी दी। कहा कि देश में इस ओर तेजी से काम हो रहा है।
एक तरफ जहां डिजिटलाइजेशन पर सरकार का फोकस है, वहीं दूसरी ओर उसे सुरक्षित करने के लिए तमाम तकनीकें तैयार की जा रही हैं। वैज्ञानिक साबइर अटैक रोकने के लिए और बैंकिंग सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए क्वांटम कंप्यूटर के जरिए इंक्रिप्शन प्रणाली को तैयार कर रहे हैं। इससे न केवल डेटा को सुरक्षित रखा जा सकेगा, बल्कि लेनदेन की प्रक्रिया में भी तेजी आएगी।
शांति स्वरूप भटनागर अवॉर्ड से सम्मानित आईआईटी के सीनियर प्रोफेसर नितिन कुमार सक्सेना ने प्रीमेलिटी टेस्टिंग थ्योरी और प्राइम नंबर का गणितीय प्रयोग बताया। उन्होंने कहा कि छात्र गणितीय एल्गोरिथम का प्रयोग क्रिप्टोग्राफी में करके अच्छा सॉफ्टवेयर तैयार कर सकते हैं।
विज्ञापन
आईआईटी के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो. संदीप शुक्ला ने साइबर सिक्योरिटी और मशीन लर्निंग पर जानकारी दी। बताया कि मशीन लर्निंग के जरिए आज सब संभव है। हमारी सोच के अनुरूप कंप्यूटर और रोबोट काम कर सकते हैं। दिमाग पढ़ने की क्षमता विकसित की जा रही है। आईआईटी रोपड़ के प्रो. सौमित्र कुमार, डॉ. अमित अवस्थी, एमएनएनआईटी प्रयागराज के प्रो. शशांक श्रीवास्तव, कार्यक्रम संयोजक डॉ. अतुल चतुर्वेदी, डॉ. एसएल शुक्ला आदि मौजूद रहे।
डिफेंस को सुरक्षित करेगा डीआरडीओ
डीआरडीओ के वैज्ञानिक डॉ. धनंजय ने जेंटिल इंट्रोडक्शन टू क्वांटम एंड पोस्ट क्वांटम क्रिप्टोग्राफी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (डीएसटी) ने क्वांटम पर काम करने के लिए 80 करोड़ रुपये का अनुदान दिया है। चीन इस मामले में काफी आगे है। अब हमारी कोशिश है कि हमारे वैज्ञानिक भी सकारात्मक शोध करें।
विज्ञापन
एक तरफ जहां डिजिटलाइजेशन पर सरकार का फोकस है, वहीं दूसरी ओर उसे सुरक्षित करने के लिए तमाम तकनीकें तैयार की जा रही हैं। वैज्ञानिक साबइर अटैक रोकने के लिए और बैंकिंग सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए क्वांटम कंप्यूटर के जरिए इंक्रिप्शन प्रणाली को तैयार कर रहे हैं। इससे न केवल डेटा को सुरक्षित रखा जा सकेगा, बल्कि लेनदेन की प्रक्रिया में भी तेजी आएगी।
विज्ञापन
शांति स्वरूप भटनागर अवॉर्ड से सम्मानित आईआईटी के सीनियर प्रोफेसर नितिन कुमार सक्सेना ने प्रीमेलिटी टेस्टिंग थ्योरी और प्राइम नंबर का गणितीय प्रयोग बताया। उन्होंने कहा कि छात्र गणितीय एल्गोरिथम का प्रयोग क्रिप्टोग्राफी में करके अच्छा सॉफ्टवेयर तैयार कर सकते हैं।
विज्ञापन
आईआईटी के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो. संदीप शुक्ला ने साइबर सिक्योरिटी और मशीन लर्निंग पर जानकारी दी। बताया कि मशीन लर्निंग के जरिए आज सब संभव है। हमारी सोच के अनुरूप कंप्यूटर और रोबोट काम कर सकते हैं। दिमाग पढ़ने की क्षमता विकसित की जा रही है। आईआईटी रोपड़ के प्रो. सौमित्र कुमार, डॉ. अमित अवस्थी, एमएनएनआईटी प्रयागराज के प्रो. शशांक श्रीवास्तव, कार्यक्रम संयोजक डॉ. अतुल चतुर्वेदी, डॉ. एसएल शुक्ला आदि मौजूद रहे।
डिफेंस को सुरक्षित करेगा डीआरडीओ
डीआरडीओ के वैज्ञानिक डॉ. धनंजय ने जेंटिल इंट्रोडक्शन टू क्वांटम एंड पोस्ट क्वांटम क्रिप्टोग्राफी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (डीएसटी) ने क्वांटम पर काम करने के लिए 80 करोड़ रुपये का अनुदान दिया है। चीन इस मामले में काफी आगे है। अब हमारी कोशिश है कि हमारे वैज्ञानिक भी सकारात्मक शोध करें।