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Kanpur News: नए शिक्षक सुरक्षित, सीनियर पर तबादले की तलवार
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कानपुर। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया ने विभागीय तैनाती व्यवस्था की परतें खोल दी हैं। कानपुर के 14 ब्लॉकों के परिषदीय विद्यालयों में जारी 851 सरप्लस शिक्षकों की सूची ने विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि मानक के विपरीत शहर के नजदीक सुविधाजनक विद्यालयों में तैनाती पाने वाले नए शिक्षक इस प्रक्रिया में बच गए जबकि लंबे समय से एक ही विद्यालय में सेवाएं दे रहे वरिष्ठ शिक्षकों को दूरदराज क्षेत्रों में भेजे जाने का खतरा पैदा हो गया है।
कानपुर नगर में 1705 परिषदीय विद्यालयों में 5935 शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्राथमिक विद्यालयों में 30 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 35 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक का मानक निर्धारित है। इसके बावजूद कल्याणपुर, बिधनू और चौबेपुर जैसे मुख्यालय से सटे ब्लॉकों के कई विद्यालयों में मानक से अधिक शिक्षक तैनात हो गए।
शिक्षक संगठनों का आरोप है कि पूर्व में प्रभाव और सिफारिश के आधार पर कुछ शिक्षकों ने शहर के आसपास के विद्यालयों में तैनाती हासिल कर ली जिससे कई स्कूल सरप्लस की श्रेणी में आ गए। अब समायोजन की प्रक्रिया में उन्हीं विसंगतियों को दूर किया जा रहा है लेकिन सूची में शामिल कई वरिष्ठ शिक्षक इसे लेकर आपत्ति जता रहे हैं।
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पुराना नियम बदला, वरिष्ठ शिक्षकों पर बढ़ा संकट
शिक्षा विभाग में पहले व्यवस्था थी कि किसी विद्यालय में शिक्षक अधिक होने पर सबसे बाद में आने वाले शिक्षक को हटाया जाएगा। इस बार समायोजन नीति में विद्यालयों के एकीकरण और पदों के पुनर्निर्धारण के बाद कई पुराने शिक्षक भी सरप्लस सूची में आ गए हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि सूची मानव संपदा पोर्टल के पुराने आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है। उनका आरोप है कि विद्यालयों में वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन नहीं कराया गया जिससे वरिष्ठता और तैनाती को लेकर विसंगतियां सामने आई हैं।
केस-1:
कल्याणपुर में पांच शिक्षक, जरूरत तीन की
कल्याणपुर ब्लॉक के सिंहपुर कछार स्थित विद्यालय में पांच शिक्षक तैनात हैं जबकि छात्र संख्या के मानक के अनुसार यहां केवल तीन शिक्षकों की जरूरत है। आरोप है कि अतिरिक्त तैनाती के कारण विद्यालय में शिक्षक-छात्र अनुपात प्रभावित हुआ। विद्यालय में एक शिक्षिका की नियुक्ति वर्ष 2017 में हुई थी जबकि चार शिक्षकों की तैनाती वर्ष 2011 में हुई थी। नियुक्ति तिथियों में मामूली अंतर के कारण वरिष्ठता क्रम प्रभावित हो रहा है। समायोजन की स्थिति में दो शिक्षकों पर स्थानांतरण की संभावना बन रही है।
केस-2:
23 साल बाद बदल सकता है शिक्षक का स्कूल
चौबेपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बनसठी में छह शिक्षक तैनात हैं जबकि छात्र संख्या के आधार पर एक शिक्षक सरप्लस है। नई प्रक्रिया के तहत वर्ष 2003 में नियुक्त सबसे वरिष्ठ शिक्षक के इससे प्रभावित होने की संभावना है। करीब 23 वर्षों तक इसी विद्यालय में सेवा देने के बाद अब उनके स्थानांतरण की स्थिति बन रही है। वहीं इसी वर्ष नियुक्त एक अन्य शिक्षक कुछ दिन बाद विद्यालय पहुंचने के कारण वरिष्ठता क्रम में पीछे रह गए और सरप्लस सूची से बाहर हो गए।
27 जुलाई तक दर्ज होंगी आपत्तियां
समायोजन प्रक्रिया में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में बीएसए कानपुर नगर ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। प्रभावित शिक्षक 27 जुलाई तक बीएसए कार्यालय में ऑफलाइन आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। आपत्तियां केवल सूची में दर्ज आंकड़ों की त्रुटि और वरिष्ठता संबंधी बिंदुओं पर स्वीकार की जाएंगी। बीएसए कार्यालय सभी आपत्तियों को संकलित कर एक अगस्त तक उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद को भेजेगा।
वर्जन
शासन के आदेश के बाद सरप्लस शिक्षकों की सूची तैयार की गई थी। इस पर अब उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत पूरी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जिन शिक्षकों को आपत्ति है वे अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। - हरिओम सिंह, बीएसए कानपुर नगर
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कानपुर नगर में 1705 परिषदीय विद्यालयों में 5935 शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्राथमिक विद्यालयों में 30 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 35 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक का मानक निर्धारित है। इसके बावजूद कल्याणपुर, बिधनू और चौबेपुर जैसे मुख्यालय से सटे ब्लॉकों के कई विद्यालयों में मानक से अधिक शिक्षक तैनात हो गए।
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शिक्षक संगठनों का आरोप है कि पूर्व में प्रभाव और सिफारिश के आधार पर कुछ शिक्षकों ने शहर के आसपास के विद्यालयों में तैनाती हासिल कर ली जिससे कई स्कूल सरप्लस की श्रेणी में आ गए। अब समायोजन की प्रक्रिया में उन्हीं विसंगतियों को दूर किया जा रहा है लेकिन सूची में शामिल कई वरिष्ठ शिक्षक इसे लेकर आपत्ति जता रहे हैं।
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पुराना नियम बदला, वरिष्ठ शिक्षकों पर बढ़ा संकट
शिक्षा विभाग में पहले व्यवस्था थी कि किसी विद्यालय में शिक्षक अधिक होने पर सबसे बाद में आने वाले शिक्षक को हटाया जाएगा। इस बार समायोजन नीति में विद्यालयों के एकीकरण और पदों के पुनर्निर्धारण के बाद कई पुराने शिक्षक भी सरप्लस सूची में आ गए हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि सूची मानव संपदा पोर्टल के पुराने आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है। उनका आरोप है कि विद्यालयों में वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन नहीं कराया गया जिससे वरिष्ठता और तैनाती को लेकर विसंगतियां सामने आई हैं।
केस-1:
कल्याणपुर में पांच शिक्षक, जरूरत तीन की
कल्याणपुर ब्लॉक के सिंहपुर कछार स्थित विद्यालय में पांच शिक्षक तैनात हैं जबकि छात्र संख्या के मानक के अनुसार यहां केवल तीन शिक्षकों की जरूरत है। आरोप है कि अतिरिक्त तैनाती के कारण विद्यालय में शिक्षक-छात्र अनुपात प्रभावित हुआ। विद्यालय में एक शिक्षिका की नियुक्ति वर्ष 2017 में हुई थी जबकि चार शिक्षकों की तैनाती वर्ष 2011 में हुई थी। नियुक्ति तिथियों में मामूली अंतर के कारण वरिष्ठता क्रम प्रभावित हो रहा है। समायोजन की स्थिति में दो शिक्षकों पर स्थानांतरण की संभावना बन रही है।
केस-2:
23 साल बाद बदल सकता है शिक्षक का स्कूल
चौबेपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बनसठी में छह शिक्षक तैनात हैं जबकि छात्र संख्या के आधार पर एक शिक्षक सरप्लस है। नई प्रक्रिया के तहत वर्ष 2003 में नियुक्त सबसे वरिष्ठ शिक्षक के इससे प्रभावित होने की संभावना है। करीब 23 वर्षों तक इसी विद्यालय में सेवा देने के बाद अब उनके स्थानांतरण की स्थिति बन रही है। वहीं इसी वर्ष नियुक्त एक अन्य शिक्षक कुछ दिन बाद विद्यालय पहुंचने के कारण वरिष्ठता क्रम में पीछे रह गए और सरप्लस सूची से बाहर हो गए।
27 जुलाई तक दर्ज होंगी आपत्तियां
समायोजन प्रक्रिया में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में बीएसए कानपुर नगर ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। प्रभावित शिक्षक 27 जुलाई तक बीएसए कार्यालय में ऑफलाइन आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। आपत्तियां केवल सूची में दर्ज आंकड़ों की त्रुटि और वरिष्ठता संबंधी बिंदुओं पर स्वीकार की जाएंगी। बीएसए कार्यालय सभी आपत्तियों को संकलित कर एक अगस्त तक उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद को भेजेगा।
वर्जन
शासन के आदेश के बाद सरप्लस शिक्षकों की सूची तैयार की गई थी। इस पर अब उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत पूरी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जिन शिक्षकों को आपत्ति है वे अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। - हरिओम सिंह, बीएसए कानपुर नगर