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गन्ने के साथ चावल, बाजरा, मक्का से भी बनाएं एथेनॉल, जानिए आपका क्या फायदा होगा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 01 Nov 2018 10:47 AM IST
सार
- नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट के राष्ट्रीय सेमिनार में हुई चर्चा
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विस्तार
कानपुर स्थित नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट के राष्ट्रीय सेमिनार में वक्ताओं ने चावल, बाजरा, मक्का और गन्ने आदि से एथेनॉल बनाने की बात कही। बताया कि अभी बन रहे एथेनॉल में चार-पांच प्रतिशत का ही पेट्रोल में मिश्रण हो पायेगा।
बुधवार को नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट (एनएसआई) में ‘प्रमोशन ऑफ डिस्टीलरीज फॉर एथेनॉल ब्लेंडिंग एंड को-जनरेशन ऑफ पावर’ विषय पर सेमिनार हुआ। उद्घाटन एनएसआई के निदेशक प्रो. नरेंद्र मोहन ने किया। सेमिनार में प्रो. नरेंद्र मोहन ने कहा कि एथेनॉल के उत्पादन को बढ़ाने के लिए सिर्फ मोलासेस पर निर्भर न रहकर अन्य फीड स्टॉक का भी इस्तेमाल करें। अभी 82 प्रतिशत कच्चे तेल की मांग की आपूर्ति विदेशी आयात से की जाती है। इसमें 70 बिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च आता है। पेट्रोल में 10 फीसदी एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य पूरा करके विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
इस मौके पर बलरामपुर चीनी मिल्स के सलाहकार केपी सिंह ने बताया कि देश में बढ़ती वाहनों की संख्या के मद्देनजर प्रतिवर्ष 330 करोड़ लीटर एथेनॉल उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त करना होगा। सेमिनार में एक्सेल इंडस्ट्रीज पुणे के विशेषज्ञों, निस्टा के अध्यक्ष डॉ. राममूर्ति सिंह सहित अन्य संस्थानों के विशेषज्ञों ने विचार व्यक्त किए। कहा कि मोलासेस के अलावा गन्ने के जूस से सीधे एथेनॉल का उत्पादन कर सकते हैं। इसके अलावा बाजार की मांग के अनुरूप खराब अनाज, चुकंदर, मीठी चरी, कसावा तथा अन्य सेलुलोज आधारित पदार्थों से एल्कोहल का उत्पादन कर लाभ कमाया जा सकता है।
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बुधवार को नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट (एनएसआई) में ‘प्रमोशन ऑफ डिस्टीलरीज फॉर एथेनॉल ब्लेंडिंग एंड को-जनरेशन ऑफ पावर’ विषय पर सेमिनार हुआ। उद्घाटन एनएसआई के निदेशक प्रो. नरेंद्र मोहन ने किया। सेमिनार में प्रो. नरेंद्र मोहन ने कहा कि एथेनॉल के उत्पादन को बढ़ाने के लिए सिर्फ मोलासेस पर निर्भर न रहकर अन्य फीड स्टॉक का भी इस्तेमाल करें। अभी 82 प्रतिशत कच्चे तेल की मांग की आपूर्ति विदेशी आयात से की जाती है। इसमें 70 बिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च आता है। पेट्रोल में 10 फीसदी एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य पूरा करके विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
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इस मौके पर बलरामपुर चीनी मिल्स के सलाहकार केपी सिंह ने बताया कि देश में बढ़ती वाहनों की संख्या के मद्देनजर प्रतिवर्ष 330 करोड़ लीटर एथेनॉल उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त करना होगा। सेमिनार में एक्सेल इंडस्ट्रीज पुणे के विशेषज्ञों, निस्टा के अध्यक्ष डॉ. राममूर्ति सिंह सहित अन्य संस्थानों के विशेषज्ञों ने विचार व्यक्त किए। कहा कि मोलासेस के अलावा गन्ने के जूस से सीधे एथेनॉल का उत्पादन कर सकते हैं। इसके अलावा बाजार की मांग के अनुरूप खराब अनाज, चुकंदर, मीठी चरी, कसावा तथा अन्य सेलुलोज आधारित पदार्थों से एल्कोहल का उत्पादन कर लाभ कमाया जा सकता है।
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