Kanpur: कोहरे की वजह से ट्रेनें 11 घंटे तक लेट, सभी उड़ानें रद्द, 107 बसों को रात में जहां के तहां रोका गया
कोहरे के चलते कानपुर में यातायात व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई है। दिल्ली से कानपुर सुबह छह बजे पहुंचने वाली ट्रेन 12452 श्रमशक्ति एक्सप्रेस साढ़े सात घंटे की देरी से दोपहर 1:37 बजे कानपुर सेंट्रल आई। 22435 वंदे भारत एक्सप्रेस ढाई घंटे लेट आई।
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कानपुर में घना कोहरा होने से शनिवार को भी चारों उड़ानें निरस्त रहीं। 56 ट्रेनें तीन से 11 घंटे तक लेट रहीं। परिवहन निगम के निर्देश पर 107 बसों को रात में ठहराव दिया गया। इसमें कानपुर रीजन की 45 बसें शामिल थीं। सुबह आठ बजे के बाद कोहरा छंटा तो बसें निकलीं। दोपहर 12 बजे तक 35 बसों को यात्री न होने की वजह से निरस्त करना पड़ा।
इंडिगो की मुंबई, बंगलूरू और स्पाइसजेट की दिल्ली और मुंबई की उड़ानें निरस्त रहीं। यह हाल नए साल पर छठे दिन है। दो जनवरी को स्पाइसजेट की दिल्ली और मुंबई की उड़ान का संचालन हुआ था, लेकिन 2023 में इंडिगो का एक भी विमान नहीं उड़ा।
1102 लोगों ने निरस्त कराए टिकट
दिल्ली से कानपुर सुबह छह बजे पहुंचने वाली ट्रेन 12452 श्रमशक्ति एक्सप्रेस साढ़े सात घंटे की देरी से दोपहर 1:37 बजे कानपुर सेंट्रल आई। 22435 वंदे भारत एक्सप्रेस ढाई घंटे लेट आई। 12423 डिब्रूगढ़ राजधानी 6:45 घंटा, 12301 हावड़ा राजधानी 5:30 घंटे लेट, 12313 सियालदह राजधानी पांच घंटे, पूर्वा एक्सप्रेस साढ़े सात घंटे, प्रयागराज एक्सप्रेस पांच घंटे, शिवगंगा सवा आठ घंटे, राजेंद्रनगर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस 6:30 घंटे, गोमती चार घंटे लेट रही। एक्सप्रेस मेल समेत प्रीमियम ट्रेनें भी लेट रहीं।
तेजस के 956 यात्रियों को मिलेगा हर्जाना
देश की पहली कारपोरेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस भी पांच घंटे तक लेट रही। इसके 956 यात्रियों को 250 रुपये की दर से हर्जाना दिया जाएगा। एक घंटा लेट होने पर यात्रियों को 100 रुपये और दो घंटे या उससे अधिक देरी पर 250 रुपये प्रति यात्री हर्जाना देने का नियम है। शनिवार को लखनऊ से दिल्ली जाने वाली 82501 तेजस एक्सप्रेस सवा पांच घंटे और नई दिल्ली से लखनऊ वाया कानपुर जाने वाली 82502 तेजस एक्सप्रेस साढ़े चार घंटे लेट रही।
रात में बसों के रुकने पर रैन बसेरा फुल
कोहरे की वजह से झकरकटी बस अड्डे पर 107 बसों को रोकना पड़ा। इससे बस अड्डे पर बने 30 बेड फुल रहे। इसमें 20 पुरुष और 10 महिला यात्रियों के लिए बेड हैं। इसके अलावा बाकी यात्रियों को रात में बसों कें भीतर, अलाव के आसपास गुजारनी पड़ी। 107 बसों में 45 बसें कानपुर क्षेत्र के सात डिपो थीं।